पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान उत्तर प्रदेश में बीजेपी के उन 42 उम्मीदवारों में से एक थे जिन्हें 2024 के लोकसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा. 2014 और 2019 में बालियान मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट से चुनाव जीते थे लेकिन 2024 में इसी सीट से हार गए. बाक़ी कारणों के अलावा बालियान अपनी हार के पीछे पार्टी की अंदरूनी राजनीति को भी बड़ा कारण मानते रहे हैं.
'लोकसभा चुनाव की हार की समीक्षा जरूरी '
उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी को उन गलतियों से सीख लेने की जरूरत है जिसके चलते 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को उत्तर प्रदेश में करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा. ये कहना है पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान का जो पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले से ताल्लुक रखते हैं. एनडीटीवी से एक्सक्लूसिव बातचीत में बालियान ने कहा कि राज्य में लोकसभा चुनाव में मिली हार की गंभीर समीक्षा किए जाने की जरूरत है जो अभी तक नहीं हो सकी है.
'कमिटी को दी गई राय का क्या हुआ , नहीं पता'
मुजफ्फरनगर सीट से लोकसभा सांसद रहे बालियान के मुताबिक लोकसभा चुनाव की हार की समीक्षा के लिए पार्टी ने राज्य में एक कमिटी बनाई थी जिसने शुरू में हारे हुए तमाम उम्मीदवारों से उनकी राय मांगी थी. उन्होंने बताया कि पार्टी उम्मीदवारों की हार के अलग अलग कारण रहे थे लेकिन कुछ ऐसे कारण भी थे जो सबके लिए मान्य थे. ऐसे में सबने अपनी राय दी थी लेकिन बालियान ने कहा कि या तो उसपर आगे कोई कार्रवाई नहीं की गई या इसकी जानकारी किसी को नहीं दी गई. बालियान ने शिकायती भरे लहजे में कहा कि कमिटी को दी गई राय पर कोई कार्रवाई की गई या नहीं , उसके बारे में शायद पार्टी के बड़े नेताओं को पता ही लेकिन उन नेताओं को नहीं पता जो हार गए थे.
मुजफ्फरनगर सीट से चुनाव हार गए थे बालियान
पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान बीजेपी के उन 42 उम्मीदवारों में शामिल हैं जिन्हें 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में हार का सामना करना पड़ा. 2014 और 2019 में बालियान मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट से चुनाव जीते थे लेकिन 2024 में इसी सीट से हार गए. बीजेपी ने कुल 80 सीटों में से 75 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे जिनमें 33 सीटों पर जीत हासिल हुई थी. बाकी 5 सीटों पर बीजेपी की सहयोगी पार्टियां चुनाव लड़ी थीं. बालियान का बयान ऐसे समय में आया है जब पार्टी विधानसभा चुनाव के लिए कमर कस रही है. पिछले महीने ही पार्टी ने राज्य में अपना नया प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी को बनाया है. बालियान ने चौधरी को काफी अनुभवी नेता बताया.
अंदरूनी राजनीति भी बनी थी हार का कारण
लोकसभा चुनाव की हार के पीछे बाकी कारणों के अलावा पार्टी की अंदरूनी राजनीति को भी एक बड़ी वजह बताया गया था. उस समय कहा गया था कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय नेतृत्व के बीच कई सीटों पर टिकटों को लेकर आपस में एक राय नहीं थी जिसके चलते सही उम्मीदवारों का चयन नहीं हो सका. जातिगत समीकरण साधने में भी पार्टी पूरी तरह सफल नहीं हो पाई जिससे पिछड़ों और दलितों का एक बड़ा वर्ग पार्टी से छिटक गया. इतना ही नहीं , अंदरूनी राजनीति के चलते कई सीटों पर ठाकुर और ब्राह्मण जैसी अगड़ी जातियों के बीच भी जबरदस्त खींचतान देखने को मिली थी. इसके अलावा आपसी खींचतान के चलते चुनाव अभियान में शिथिलता और समन्वय में कमी के भी आरोप लगे थे.
जाति के आधार पर विधायकों की बैठक गलत
हाल ही में बीजेपी के ब्राह्मण विधायकों की अलग बैठक काफी चर्चा में थी. एनडीटीवी से बात करते हुए बालियान ने इस बैठक को तो गलत बताया लेकिन ये भी कहा कि अगर ब्राह्मण विधायकों की बैठक गलत थी तो बाकी जातियों के विधायकों की बैठक को भी रोकना चाहिए. बालियान ने किसी विशेष जाति का नाम तो नहीं लिया लेकिन साफ है कि उनका इशारा बीजेपी के राजपूत विधायकों की बैठक की ओर था जो कुछ ही दिन पहले हुई थी. माना जाता है कि राजपूत विधायकों की बैठक के टक्कर में ही ब्राह्मण विधायकों ने अपनी अलग बैठक की थी.
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