- कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा और ओडिशा के लिए नए प्रभारियों की नियुक्ति कर संगठन में बदलाव शुरू किया है
- राजेन्द्र पाल गौतम को उत्तर प्रदेश का प्रभारी और अनुसूचित जाति सेल का चेयरमैन नियुक्त किया गया है
- कांग्रेस समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन पर कायम है, मायावती से गठबंधन की कोई पुष्टि नहीं हुई है
कांग्रेस ने संगठन में फेरबदल की शुरुआत कर दी है. कांग्रेस आलाकमान ने तीन राज्यों के प्रभारियों की नियुक्ति की है. उत्तर प्रदेश के लिए राजेन्द्र पाल गौतम, हरियाणा के लिए संजय दत्त और ओडिशा के लिए लालजी देसाई को प्रभार दिया गया है. इन सब में सबसे महत्वपूर्ण है उत्तर प्रदेश के प्रभारी के तौर पर राजेन्द्र पाल गौतम की नियुक्ति. गौतम कांग्रेस के अनुसूचित जाति सेल के चेयरमैन भी हैं. राजेन्द्र गौतम पहले आम आदमी पार्टी थे और दिल्ली सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं. वह अपनी सामाजिक न्याय की लड़ाई और अंबेडकरवादी सोच के लिए जाने जाते हैं.
कांग्रेस ने राजेंद्र गौतम को दी बड़ी जिम्मेदारी
इसी मजबूत विचारधारा की वजह से वह राहुल गांधी के नजरों में आए और उन्हें अनुसूचित जाति विभाग की जिम्मेदारी दी गई. ये वही शख्स हैं जो पिछले दिनों सांसद तनुज पूनिया के साथ बसपा नेता मायावती के घर पहुंच गए थे वो भी बिना बुलाए. जाहिर है इनकी मायावती से मुलाकात नहीं हो पाई थी. अब इनकी नियुक्ति से यह मायने लगाए जा रहे हैं कि क्या ये मायावती को उत्तरप्रदेश में साथ लाने की कोशिश करेंगे. क्या राहुल गांधी राजेन्द्र गौतम को इसलिए लाए हैं कि वो अखिलेश यादव के साथ-साथ मायावती के साथ भी गठबंधन करना चाहते हैं.
दरअसल कांग्रेस में उत्तर प्रदेश को लेकर एक बात साफ है कि यहां राहुल गांधी और प्रियंका का सीधा दखल रहता है. कांग्रेस में यदि आप उत्तर प्रदेश को लेकर किसी से बात करें तो आपको जवाब मिलेगा कि राहुल और प्रियंका जी इस मामले को देख रहे है. यदि आप किसी से पूछें कि क्या समाजवादी पार्टी से बातचीत शुरू हुई तो जवाब मिलेगा कि आप राहुल जी से त कर लें.
क्या मायावती से गठबंधन का संकेत है?
राजेन्द्र गौतम की नियुक्ति पर एआईसीसी के प्रवक्ता और कांग्रेस के पूर्व विधायक अखिलेश प्रताप सिंह ने एनडीटीवी से कहा कि गौतम को उत्तर देश का प्रभारी बनाना बहुत अच्छा निर्णय है. इससे कांग्रेस को ताकत मिलेगी, वह जमीन से जुड़े नेता हैं, इसका असर दलित और पिछड़े वर्ग पर पड़ेगा. जब अखिलेश प्रताप सिंह से पूछा कि कुछ दिनों पहले राजेन्द्र गौतम मायावती से मिलने चले गए थे, क्या मायावती से गठबंधन का संकेत है?
इस पर उन्होंने कहा कि इसे ऐसा ना माना जाए, वो तो हालचाल पूछने चले गए थे. जहां तक उत्तर प्रदेश में गठबंधन की बात है कांग्रेस हाईकमान प्रदेश नेतृत्व से बात करके फैसला लेंगे. वैसे भी उत्तर प्रदेश में हमारा इंडिया गठबंधन मजबूती से चल रहा है. वहीं जब एनडीटीवी ने कांग्रेस सांसद तनुज पूनिया से बात की तो उन्होंने कहा कि “यह बढ़िया निर्णय है, इससे कांग्रेस का दलित और पिछड़ा वोट साथ रहेगा. 2024 में भी हमें इन दोनों वर्गों का वोट मिला था और आने वाले विधानसभा चुनाव में भी दलित और पिछड़ा समाज पर हमारा असर बरकरार रहेगा.
कांग्रेस का गठबंधन समाजवादी पार्टी के साथ
जब तनुज पूनिया से यह पूछा कि क्या मायावती से भी गठबंधन हो सकता है क्योंकि राजेन्द्र गौतम के साथ तनुज पूनिया ही मायावती के घर मिलने गए थे तो उनका जवाब था कि हम तो ऐसे ही अचानक मिलने चले गए थे मगर इसका मतलब गठबंधन से नहीं लगाना चाहिए. हमारा गठबंधन समाजवादी पार्टी के साथ है और रहेगा.
राहुल गांधी का बड़ा दांव
बहरहाल उत्तर प्रदेश की राजनीति को लेकर राहुल गांधी ने पहला दांव खेल दिया है. एक दलित को प्रभारी बना कर राहुल गांधी ने अपने मंसूबे साफ कर दिए हैं और जहां तक मायावती की बात है तो राजनीति में कोई किसी का दोस्त या दुश्मन नहीं होता, वो या तो सहयोगी होते हैं या विरोधी. राजेन्द्र गौतम को प्रभारी बना कर राहुल गांधी ने मायावती के लिए खिड़की खोली है या दरवाजा बंद किया है इसके लिए उनके अगले कदम तक इंतजार करना पड़ेगा.
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