- नोएडा थाना फेस-1 पुलिस ने सेक्टर-10 में चल रहे फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया
- आरोपी लैप्स बीमा पॉलिसी का पैसा वापस दिलाने के नाम पर निवेश या प्रोसेसिंग फीस वसूलकर ठगी करते थे
- गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से लैपटॉप, मोबाइल, कॉलिंग डाटा शीट समेत कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए हैं
नोएडा के थाना फेस-1 पुलिस ने बड़ी कामयाबी मिली है. पुलिस ने लैप्स बीमा पॉलिसी का पैसा वापस दिलाने के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने इस गिरोह के 3 आरोपियों को धर दबोचा. उनके कब्जे से लैपटॉप, मोबाइल फोन और कॉलिंग डाटा शीट समेत कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जब्त किए गए हैं.
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नोएडा में फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश
पुलिस के मुताबिक, ये लोग सेक्टर-10 में चलाए जा रहे फर्जी कॉल सेंटर के जरिए ठगी की घटना को अंजाम देते थे. गिरफ्तार तीनो आरोपियों की पहचान वरुण शर्मा, मदन गुप्ता और प्रदीप वर्मा के रूप में हुई है. पुलिस जांच में ये भी पता चला है कि आरोपियों ने अब तक कई लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी की है. इस मामले में करीब 20 बैंक खातों में जमा 1 करोड़ 20 लाख रुपये की राशि को फ्रीज कराया गया है.

लैप्स बीमा पॉलिसी का पैसा वापस दिलाने के नाम पर ठगी
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे लोगों को फोन कर उनकी लैप्स बीमा पॉलिसी का पैसा वापस दिलाने का झांसा देते थे. इसके बदले निवेश या प्रोसेसिंग फीस के नाम पर 10,500 रुपये से लेकर 1 लाख रुपये तक की रकम वसूलते थे. आरोपी ठगी की रकम को फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर करवाते थे.
10 हजार रुपये में खरीदते थे 5 हजार लोगों का डेटा
पुलिस ने बताया कि आरोपियों के पास से बरामद लैपटॉप में ठगी से जुड़ी डाटा शीट्स मिली हैं. मुख्य आरोपी वरुण शर्मा ने 10 हजार रुपये में करीब 5 हजार लोगों का डाटा खरीदा था, जिसे कॉल सेंटर के कर्मचारियों में बांटा गया. पुलिस ने बताया कि आरोपी रियल एस्टेट में निवेश और LIC पॉलिसी को कम समय में मैच्योर कर पूरी रकम वापस दिलाने के नाम पर भी लोगों को ठगते थे. इस गिरोह के खिलाफ NCRP पोर्टल पर 20 से अधिक शिकायतें विभिन्न राज्यों में दर्ज मिली हैं.
ठगी की रकम से लगाते थे ऑनलाइन सट्टा
एडीसीपी नोएडा शैव्या गोयल के मुताबिक, आरोपी ठगी से हासिल पैसों का इस्तेमाल ऑनलाइन क्रिकेट बेटिंग (सट्टा) खेलने में करते थे. वे 20 प्रतिशत कमीशन पर सट्टा खाते खरीदते और 80 प्रतिशत रकम अपने बैंक खातों में जमा कर लेते थे. फिलहाल पुलिस इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है.
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