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थाने के अंदर से लाखों का सोना उठाकर ले गए बंदर! हैरान कर देगा लखीमपुर खीरी का ये अनोखा मामला

लखीमपुर में पुल‍ि‍स मालखाने में रखे हुए लाखों रुपये के आभूषण बंदर उठा ले गए. ये बात पुलिस ने साल 2024 में अपने कोतवाली रिकॉर्ड से 2013 की एक जनरल डायरी की प्रविष्टि का हवाला देते हुए जिला एवं सत्र न्यायालय को बताई.

थाने के अंदर से लाखों का सोना उठाकर ले गए बंदर! हैरान कर देगा लखीमपुर खीरी का ये अनोखा मामला
कोतवाली के बाहर बाइक पर बैठे बंदर.
  • लखीमपुर खीरी का अनोखा मामला
  • पुल‍िस ने कहा- बंदर उठा ले गए लाखों का सोना
  • कोर्ट ने पुलिस की अजीबोगरीब दलील को मानने से क‍िया इनकार

यूपी के लखीमपुर खीरी से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां पुल‍ि‍स मालखाने में रखे हुए लाखों रुपये के आभूषण बंदर उठा ले गए. ये बात खीरी की सदर कोतवाली पुलिस ने साल 2024 में अपने कोतवाली रिकॉर्ड से 2013 की एक जनरल डायरी की प्रविष्टि का हवाला देते हुए जिला एवं सत्र न्यायालय को बताई. जानकारी दी गई क‍ि कई लाख रुपये के कथित सोने के आभूषण, जो 2007 से एक महिला के पोस्टमार्टम के बाद कोतवाली के मालखाने में सुरक्षित अभिरक्षा में रखे हुए थे वह भारी बारिश में क्षतिग्रस्त हो गए और बाद में बंदरों का एक शरारती झुंड उन्हें उठा ले गया. हालांकि, जिला एवं सत्र न्यायालय ने कोतवाली पुलिस की इस अजीबोगरीब दलील को मानने से इनकार कर दिया.

जिला एवं सत्र न्यायालय ने 26 जुलाई 2024 को अपने आदेश के माध्यम से तत्कालीन खीरी पुलिस अधीक्षक को उक्त आपराधिक कृत्य के लिए जिम्मेदार पुलिस कर्मियों की पहचान करने, उचित विभागीय व आपराधिक कार्रवाई सुनिश्चित करने और आवेदक को हुए नुकसान का मुआवजा देने का आदेश दिया था. हालांकि, अदालती आदेश के करीब दो साल बाद भी शिकायतकर्ता मुदित कुमार अग्रवाल अपनी दिवंगत पत्नी आभा रानी उर्फ जूली अग्रवाल की संपत्ति वापस पाने का इंतजार कर रहे हैं.

पुल‍िस ने क्‍या बताया? 

खीरी के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. ख्याति गर्ग ने बताया कि 26 जुलाई 2024 को अदालत के आदेश के बाद 28 मई 2025 को तत्कालीन हेड मुहर्रिर के खिलाफ आईपीसी की धारा 409 के तहत एक आपराधिक मामला दर्ज किया गया था. डॉ. ख्याति गर्ग ने आगे बताया, "सदर मालखाने से लापता आभूषणों के संबंध में उपनिरीक्षक अरविंद कुमार तिवारी द्वारा एफआईआर की जांच में यह सामने आया कि ये वस्तुएं 2007 के एक पोस्टमार्टम की पोटली से संबंधित थीं.

कोर्ट में अंत‍िम र‍िपोर्ट जमा करके बंद कर द‍िया गया मामला 

उन्होंने कहा, जांच के दौरान यह पुख्ता तौर पर स्थापित हो चुका है कि यह संपत्ति पूर्व हेड मुहर्रिरों चंद्रिका प्रसाद और रामबख्श पाल के कार्यकाल के दौरान गायब हुई थी. उन्होंने बताया चूंकि दोनों संबंधित हेड मुहर्रिरों का निधन हो चुका है, इसलिए उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू नहीं की जा सकती. आगे कहा कि उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए अदालत में अंतिम रिपोर्ट जमा कर दी गई है और मामला बंद कर दिया गया है. 


शिकायतकर्ता मुदित कुमार अग्रवाल के वकील शैलेंद्र सिंह गौर के मुताबिक, मुदित की पत्नी आभा रानी उर्फ जूली अग्रवाल की मौत 2007 में दिवाली की रात को हुई थी और जूली के माता-पिता द्वारा मुदित और उसके परिवार के सदस्यों के खिलाफ दहेज का मामला दर्ज कराया गया था. उन्होंने बताया कि 2007 में पोस्टमार्टम के दौरान डॉक्टरों ने शव पर मौजूद सोने के आभूषण एक पोटली सदर कोतवाली के हेड मुहर्रिर को सौंप दिए थे, जिन्हें कोतवाली की सुरक्षित अभिरक्षा में रखा गया था. 

2024 में सामने आई अनोखी कहानी 

शैलेंद्र सिंह गौर ने कहा क‍ि 2007 के मामले में जमानत मिलने के बाद, मुदित कुमार अग्रवाल ने 2024 में जिला एवं सत्र न्यायालय में एक आवेदन दायर कर अपनी पत्नी आभा रानी उर्फ जूली के शव से बरामद सोने के आभूषणों को मुक्त करने का अनुरोध किया था. तभी सोने के आभूषणों के बारिश में क्षतिग्रस्त होने और बाद में बंदरों द्वारा ले जाए जाने की यह अनोखी घटना सामने आई. 

26 जुलाई 2024 के अदालती आदेश के अनुसार, कोतवाली पुलिस ने 10 जुलाई 2024 को एक रिपोर्ट दाखिल की थी, जिसमें अधिकारियों ने 2013 की एक जीडी एंट्री का हवाला दिया था. इसमें कहा गया था कि जब पोटली को सुखाने के लिए खुले में रखा गया था, तब आभूषण बारिश में क्षतिग्रस्त हो गए थे और बंदर उन्हें उठा ले गए थे.

पुलिस की इन दलीलों को अतार्किक बताते हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने 26 जुलाई 2024 को संबंधित पुलिस कर्मियों की पहचान करने, उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू करने और शिकायतकर्ता को हुए नुकसान का मुआवजा देने का आदेश दिया था. 

शिकायतकर्ता मुदित कुमार अग्रवाल के वकील शैलेंद्र सिंह गौर ने कहा कि उनका मुवक्किल इस संबंध में राहत पाने के लिए उच्च न्यायालय का रुख करेगा, क्योंकि अब तक कई आवेदन देने के बावजूद उसे उसकी चोरी हुई संपत्ति नहीं मिली है।

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लेखक के बारे में
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प्रतीक श्रीवास्तव
संवाददाता
प्रतीक श्रीवास्तव लखीमपुर खीरी से NDTV के संवाददाता हैं.  और पढ़ें
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