- लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के सिविल निर्माण में भ्रष्टाचार और घोटाले के आरोपों पर हाईकोर्ट ने गंभीर आदेश दिया है
- कोर्ट ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार से इस मामले में विस्तृत जवाब देने को कहा है
- सड़क परिवहन मंत्रालय के सचिव, NHAI अध्यक्ष और यूपी परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव को जवाब देने का निर्देश मिला है
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के सिविल निर्माण में हुए भ्रष्टाचार और घोटाले के आरोपों पर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बडा़ आदेश दिया है. इस मामले में केंद्र और यूपी सरकार से जवाब मांगा गया है. कोर्ट ने भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के सचिव, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव समेत सभी पक्षकारों को काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया है. याचिका में एक्सप्रेसवे के निर्माण में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और घोटाले का आरोप लगाया गया है. जिसमें मामले की कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की मांग भी की थी.
'अधिकारी अपना पक्ष स्पष्ट करें'
मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि याचिका में उठाए गए सभी तथ्यों पर अधिकारियों को अपना पक्ष स्पष्ट करना जरूरी है. कोर्ट ने सभी प्रतिवादियों को निर्देश दिया कि वे एफिडेविट में हर बिंदु का जवाब दें. अब सभी पक्षों के जवाब दाखिल होने के बाद अगली सुनवाई होगी.
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 13 जुलाई 2026 को किया था. लेकिन कुछ दिनों बाद बारिश सड़क का धंसने का मामला सामने आया था. जिसे NHAI ने ठीक करवाया था. ऐसे में एक्सप्रेसवे गुणवत्ता और निर्माण में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में याचिका दायर की गई थी. जिस पर सुनवाई के बाद अब प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार दोनों से जवाब तलब किया गया है.
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