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This Article is From Feb 03, 2019

प्रयागराज के कुंभ में बहीखातों से मिल रही है खानदान की जानकारी

अगर कोई आपके परदादा या दादा के दादा का नाम पूछ ले तो आप शायद न बता पाएं, लेकिन संगम किनारे बैठे पंडों के लिए ये चुटकियों का काम है. 

संगम के तट पर दारा गंज के पंडे हर जिले के बहीखातों के साथ बैठे रहते हैं
प्रयागराज:

अगर कोई आपके परदादा या दादा के दादा का नाम पूछ ले तो आप शायद न बता पाएं, लेकिन संगम किनारे बैठे पंडों के लिए ये चुटकियों का काम है. तुमरे पिता का नाम गरीश रहा...उनके बाबा कै नाव चंद्र प्रकाश रहे...तोहरे चाचा का नाव भोले रहा....बड़ी बड़ी मूंछ वाले राम रतन पंडा अपने बहीखाता खोल कर आशीष तो बताते गए...कुछ देर के लिए आशीष भावुक हो गए...लेकिन इन पंडों के मानों ये रोज का काम हो. मप्र के रीवा जिले से कुंभ में दादी का अस्थिकलश लेकर आए आशीष को उनके खानदान की जानकारी राम रतन से बहीखातों के जरिये मिली. जिस बाबा की अस्थि विसर्जन वो कर चुके हैं, वो अपने पिता की अस्थियां लेकर करीब साठ साल पहले इलाहाबाद या कुंभ मेले में आए थे. पिता से लेकर चाचा की जानकारी कोई आधुनिक कंप्यूटर या आधार का डाटा नहीं दे सकता है, लेकिन इलाहाबाद के दारागंज के पुश्तैनी पंडे आपको दे सकते हैं. मप्र के रीवा से आए आशीष ने बताया कि पंडों ने उनके परिवार के बारे में पूरी जानकारी बताई कि पिता और उनके पिता कब यहां आए. सारी जानकारी इस बहीखाते में है.

श्मशान छोड़कर कुंभ में क्यों पहुंचे हैं अघोरी?

बहीखातों को बड़े से बॉक्स में रखा जाता है और संगम के तट पर दारा गंज के ये पंडे हर जिले के बहीखातों के साथ बैठे रहते हैं. इन पंडो का भी निशान होता है मसलन राम रतन पंडे का निशान है तबेलिया. दारागंज के राम गोपाल पंडा बताते हैं कि हमारा तबेलिया निशान बहुत पुराना है. तबेलिया में मप्र का आदमी दाल चावल बनाकर खाता था, इसीलिए हमारा ये निशान है. दो सौ साल से यही  निशान है. ये पंडे न सिर्फ अपने जजमानों के खानदान का ब्योरा रखते हैं, बल्कि कुंभ मेले में रुकने का बंदोबस्त भी करते हैं. इसी के चलते ऊंचे ऊंचे झंडों पर हर पंडे का खास निशान होता है जिससे उनके यजमान कुंभ में लाखों की भीड़ के बावजूद उन्हें खोज लेते हैं. जब मोबाइल नहीं था तब इन्हीं निशान को देखकर श्रद्धालु इन पंडों के यहां रुकने पहुंचते थे. गोरखपुर से आए गोपाल जी बताते हैं कि हर पंडे का अलग निशान होता है. किसी का तीन तुमड़ी किसी का तिरंगा झंडा है किसी का एक तुमड़ी है. यह एक प्रतीक है और इसी को देखकर हम आते है.  

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