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पिता हाथ जोड़ते रहे, बेटा तड़पता रहा, कानपुर में रैली से कारण लगी जाम ने छीन ली सिपाही की जान

कानपुर में एक मजबूर पिता के हाथों में उसके बेटे ने दम तोड़ दिया. क्योंकि भीषण जाम में एंबुलेंस डेढ़ घंटे तक फंसी रही, जिसकी वजह से एंबुलेंस समय से अस्पताल नहीं पहुंच पाई और इलाज नहीं मिल पाने की वजह से बेटे की मौत हो गई.

पिता हाथ जोड़ते रहे, बेटा तड़पता रहा, कानपुर में रैली से कारण लगी जाम ने छीन ली सिपाही की जान
कानपुर में ट्रैफिक जाम में फंसी रही एंबुलेंस, इकलौते बेटे की चली गई जान (फोटो:NDTV)
  • कानपुर में एक राजनीतिक रैली के कारण टाटमिल चौराहे पर भारी जाम लगा, जिससे एंबुलेंस रास्ता नहीं पा सकी
  • 22 वर्षीय सिपाही प्रांशु सचान का डंपर से टक्कर के बाद गंभीर घायल होने पर अस्पताल ले जाते वक्त देरी हुई
  • एंबुलेंस करीब डेढ़ से दो घंटे तक जाम में फंसी रही, पिता ने ट्रैफिक पुलिस से रास्ता मांगने की कोशिश की
कानपुर:

एक पिता के सामने उसके इकलौते बेटे ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया. इसकी वजह थी कानपुर शहर का भीषण जाम और एक राजनीतिक रैली. 2025 बैच के 22 साल के युवा प्रांशु सचान का एक्सीडेंट हुआ था. उसके पिता तुरंत उसे एंबुलेंस में लेकर अस्पताल जा रहे थे. लेकिन आरोप है कि शहर में एक राजनीतिक रैली के चलते टाटमिल चौराहे और आसपास के इलाकों में भारी जाम लगा हुआ था, जिसकी वजह से एंबुलेंस को रास्ता नहीं मिल पाया. इस दौरान प्रांशु के पिता लोगों के हाथ जोड़कर रास्ता मांगते रहे, लेकिन जाम की वजह से एंबुलेंस करीब डेढ़ घंटे बाद अस्पताल पहुंच पाई. तब तक प्रांशु की मौत हो चुकी थी.

क्या है कानपुर की यह घटना 

दरअसल, ​घाटमपुर थाना क्षेत्र के मोतीपुर गांव के रहने वाले किसान प्रमोद सचान के 22 साल के एकलौते बेटे प्रांशु सचान 2025 में सिपाही के पद पर तैनात हुए थे. प्रांशु अंबेडकरनगर जिले की डांडा कोतवाली में तैनात थे. मंगलवार को प्रांशु विभिन्न जिलों में सम्मन तामील कराने निकले थे. काम पूरा करने के बाद जब वह फतेहपुर जा रहा थे, तभी रास्ते में उसके पिता प्रमोद सचान भी मिल गए, जिन्हें वह बाइक पर बैठाकर फतेहपुर के लिए रवाना हुआ. फतेहपुर के कल्याणपुर क्षेत्र में बक्सर मोड़ के पास पीछे से आ रहे एक तेज रफ्तार डंपर ने उनकी बाइक में जोरदार टक्कर मार दी. इस भीषण हादसे में प्रांशु डंपर के पहिये के नीचे कुचलकर गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि पिता को मामूली चोटें आईं थी. 

स्थानीय लोगों की मदद से पुलिस ने प्रांशु को नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पहुंचाया गया. जहां से उसकी नाजुक हालत को देखते हुए उसे कानपुर के हैलट अस्पताल रेफर कर दिया गया. प्रांशु को एंबुलेंस से कानपुर के हैलट अस्पताल लाया जा रहा था, जिसमें उनके पिता प्रमोद भी मौजूद थे. आरोप है कि शहर में कल एक राजनीतिक रैली के चलते टाटमिल चौराहे और आसपास के इलाकों में भारी जाम लगा हुआ था. 

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सॉरी दादा, आप लाने में देर कर चुके हैं

​टाटमिल पर एंबुलेंस करीब एक घंटे तक जाम में फंसी रही. इस दौरान प्रांशु लगातार खून से लथपथ होकर दर्द से तड़प रहा था. पिता कभी बेटे के घाव से बहते खून को रोकने की कोशिश करते, तो कभी एंबुलेंस से उतरकर ट्रैफिक पुलिस और सड़क पर मौजूद लोगों के सामने हाथ जोड़कर रास्ता देने की गुहार लगाते रहे. ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों ने भी एंबुलेंस निकलवाने का पूरा प्रयास किया, लेकिन वाहनों की अंतहीन कतारों के आगे किसी की कोशिश कामयाब नहीं हुई. तकरीबन डेढ़ से दो घंटे की मशक्कत के बाद जब एंबुलेंस आखिरकार हैलट अस्पताल पहुंची, तब तक बहुत देर हो चुकी थी. डॉक्टरों ने प्रांशु का परीक्षण करने के बाद उसे मृत घोषित कर दिया और पिता से कहा, सॉरी दादा, आप लाने में देर कर चुके हैं. ​यह सुनते ही पिता का कलेजा फट गया और वह बदहवास होकर जमीन पर गिर पड़े. इकलौते बेटे की इस तरह दर्दनाक मौत से परिवार में कोहराम मच गया है.

​गुरुवार को पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद परिजन सिपाही प्रांशु का पार्थिव शरीर लेकर उनके पैतृक गांव मोतीपुर के लिए रवाना किया गया. गांव में पुलिस विभाग की ओर से उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर और अंतिम सलामी दी जाएगी. इस असमय और दर्दनाक घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था और वीआईपी मूवमेंट, रैलियों के दौरान लगने वाले जाम पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. 

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