Kanpur Money Laundering Case: उत्तर प्रदेश के कानपुर में सामने आया 3200 करोड़ रुपये के कथित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क (Money Laundering Network) का मामला अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच के केंद्र में है. हैरानी की बात यह है कि इस पूरे कथित घोटाले का खुलासा महज 8 लाख रुपये की एक संदिग्ध लूट की शिकायत से हुआ. शुरुआती जांच में लूट की कहानी झूठी निकली और पुलिस जब मामले की तह तक पहुंची तो करोड़ों नहीं, बल्कि 3200 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध लेनदेन का नेटवर्क सामने आया. जांच में टेनरी, स्क्रैप और स्लॉटर हाउस कारोबार के नाम पर सैकड़ों फर्जी फर्मों और दर्जनों बैंक खातों के जरिए धन के कथित अवैध प्रवाह का खुलासा हुआ. अब ED, पुलिस, आयकर और जीएसटी विभाग मिलकर मामले की जांच में जुटे हैं.
8 लाख की लूट की कहानी से खुला राज
इस पूरे मामले की शुरुआत 16 फरवरी को हुई, जब यशोदा नगर निवासी वासिद और उसके साथी अरशद ने पुलिस को सूचना दी कि उनसे 8 लाख रुपये लूट लिए गए हैं. पुलिस जांच के दौरान दोनों के बयान बार-बार बदलने लगे. संदेह होने पर जब पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की, तो कथित लूट की कहानी फर्जी निकली. जांच में सामने आया कि दोनों कानपुर के कारोबारी महफूज आलम उर्फ पप्पू छूरी के लिए काम करते थे. पुलिस के अनुसार, उन्होंने शिवांश टेनरी के नाम पर फूलबाग स्थित आईडीबीआई बैंक से 3.20 करोड़ रुपये निकाले थे. इसमें से बड़ी राशि परिजनों को सौंपने के बाद वे शेष रकम लेकर जा रहे थे, तभी मामला जांच के दायरे में आ गया.

Kanpur Money Laundering Case: महफूज आलम उर्फ पप्पू छुरी
पप्पू छूरी पर लगा नेटवर्क चलाने का आरोप
जांच एजेंसियों के अनुसार, महफूज आलम उर्फ पप्पू छूरी इस कथित नेटवर्क का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है. जांच में सामने आया कि टेनरी, स्क्रैप और स्लॉटर हाउस कारोबार की आड़ में 400 से अधिक कथित बोगस फर्मों का संचालन किया जा रहा था. आरोप है कि लोगों को लोन, बीमा और अन्य सुविधाओं का झांसा देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाए जाते थे. बाद में इन खातों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर वित्तीय लेनदेन के लिए किया जाता था. जांच में एपीएमसी प्रमाणपत्रों के उपयोग से भी संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों के संकेत मिले हैं.
68 खातों से 3200 करोड़ का लेनदेन
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह ने 12 अलग-अलग बैंकों में कुल 68 बैंक खाते संचालित किए. बताया गया है कि लगभग ढाई वर्ष की अवधि में इन खातों के माध्यम से 3200 करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन हुआ. इतनी बड़ी रकम के ट्रांजेक्शन ने जांच एजेंसियों को चौंका दिया है. अब ED इस बात की जांच कर रही है कि बैंक खाते किन दस्तावेजों के आधार पर खोले गए, उनमें इतनी बड़ी रकम कैसे जमा और निकाली गई तथा कहीं बैंकिंग प्रक्रिया में किसी स्तर पर गड़बड़ी या मिलीभगत तो नहीं हुई.
12 बैंक जांच के दायरे में
मामले में जिन बैंकों के खाते जांच के दायरे में आए हैं, उनमें शामिल बताए जा रहे हैं.
- HDFC बैंक – 14 खाते
- सिटी यूनियन बैंक – 7 खाते
- कोटक महिंद्रा बैंक – 6 खाते
- RBL बैंक – 5 खाते
- इंडसइंड बैंक – 5 खाते
- यूनियन बैंक – 4 खाते
- बंधन बैंक – 4 खाते
- एक्सिस बैंक – 3 खाते
- ICICI बैंक – 2 खाते
- बैंक ऑफ बड़ौदा – 2 खाते
- बैंक ऑफ इंडिया – 1 खाता
कई राज्यों तक फैला था नेटवर्क
पुलिस जांच के अनुसार, यह कथित नेटवर्क सिर्फ कानपुर या उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था. इसके तार पंजाब, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली और पश्चिम बंगाल तक फैले होने की बात सामने आई है. जांच एजेंसियां विभिन्न राज्यों में वित्तीय लेनदेन और खातों के बीच कनेक्शन की पड़ताल कर रही हैं.

Kanpur Money Laundering Case: ये सब आरोपी जेल में हैं
परिवार और सहयोगियों पर भी शिकंजा
पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क में पप्पू छूरी के परिवार और करीबी सहयोगियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है. जांच के दौरान पत्नी शायदा, बेटा फैज, बेटी एनम, भाई मिशब, साला मेहताब और भतीजा मासूम समेत कई लोगों के नाम सामने आए हैं. पुलिस मेहताब, मासूम, फिरोज खान, संजीव दीक्षित और नूर आलम सहित कई आरोपियों पर कार्रवाई कर चुकी है.
ED, आयकर और GST की संयुक्त नजर
मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू सामने आने के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने जांच तेज कर दी है. इसके अलावा आयकर विभाग और जीएसटी विभाग भी वित्तीय लेनदेन, कर संबंधी दस्तावेजों और कारोबारी गतिविधियों की जांच में जुटे हैं. साथ ही आरोपियों की चल और अचल संपत्तियों का भी ब्यौरा एकत्र किया जा रहा है.

Kanpur Money Laundering Case: पप्पू छुरी
जेल में है कथित मास्टरमाइंड
महफूज आलम उर्फ पप्पू छूरी फिलहाल जेल में बंद बताया जा रहा है. उस पर पहले से कई मुकदमे दर्ज हैं. जांच एजेंसियों का मानना है कि ED की विस्तृत जांच के बाद इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिकाएं भी सामने आ सकती हैं. फिलहाल 3200 करोड़ रुपये के इस कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले ने बैंकिंग सिस्टम, फर्जी फर्मों और वित्तीय निगरानी व्यवस्था पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.
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