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3 साल तक नहीं हुई सुनवाई; शिकायतों की माला पहन जनसुनवाई में पहुंचा ग्रामीण, उठाया भ्रष्टाचार का मुद्दा

शिवपुरी के पीपलखेड़ा गांव का ग्रामीण 3 साल की शिकायतों की माला पहनकर जनसुनवाई पहुंचा. पंचायत में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही के लगाए आरोप.

3 साल तक नहीं हुई सुनवाई; शिकायतों की माला पहन जनसुनवाई में पहुंचा ग्रामीण, उठाया भ्रष्टाचार का मुद्दा
3 साल की शिकायतों की माला पहन जनसुनवाई पहुंचा ग्रामीण, शिवपुरी में पंचायत भ्रष्टाचार के लगाए आरोप

Shivpuri News: मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले में जनसुनवाई (Jansunwai) के दौरान एक ऐसा दृश्य सामने आया जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए. ग्राम पीपलखेड़ा निवासी दिमांग सिंह लोधी अपने गले में पिछले तीन वर्षों में अधिकारियों को दिए गए शिकायत पत्रों की माला पहनकर कलेक्ट्रेट पहुंचे. उनका आरोप है कि ग्राम पंचायत में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़ा हो रहा है, लेकिन लगातार शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई. वर्षों से दफ्तरों के चक्कर लगाकर थक चुके ग्रामीण ने इस अनोखे तरीके से प्रशासन का ध्यान अपनी ओर खींचने की कोशिश की. जनसुनवाई में पहुंचे अधिकारी और आम लोग भी यह दृश्य देखकर हैरान रह गए.

आवेदनों की माला बनाकर पहुंचा फरियादी

आमतौर पर जनसुनवाई में लोग अपनी शिकायतों की फाइल लेकर पहुंचते हैं, लेकिन पीपलखेड़ा गांव के दिमांग सिंह लोधी ने विरोध का अनोखा तरीका अपनाया. उन्होंने पिछले तीन वर्षों में विभिन्न अधिकारियों को दिए गए शिकायत पत्रों की प्रतियां जोड़कर माला बनाई और उसे गले में पहनकर जनसुनवाई में पहुंचे. दिमांग सिंह का कहना है कि बार-बार आवेदन देने के बावजूद उनकी शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. ऐसे में उन्होंने सोए हुए सिस्टम को जगाने के लिए यह तरीका अपनाया.

Jansunwai Shivpuri: शिकायतों की माला पहने हुए ग्रामीण

Jansunwai Shivpuri: शिकायतों की माला पहने हुए ग्रामीण

ग्राम पंचायत में भ्रष्टाचार के लगाए आरोप

दिमांग सिंह ने ग्राम पंचायत के सरपंच और सचिव पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि पंचायत में विकास कार्य केवल कागजों पर दिखाए जा रहे हैं, जबकि जमीन पर हालात बिल्कुल अलग हैं. ग्रामीण का आरोप है कि शासन की कई योजनाएं कागजों में संचालित हो रही हैं, लेकिन गांव के लोगों को उनका लाभ नहीं मिल रहा. उन्होंने दावा किया कि पंचायत में हुए कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के प्रमाण भी अधिकारियों को सौंपे जा चुके हैं.

तीन साल से लगा रहे गुहार

पीड़ित ग्रामीण के मुताबिक वह पिछले तीन वर्षों से अलग-अलग स्तर के अधिकारियों के पास शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं. उन्होंने कई बार आवेदन, दस्तावेज और सबूत प्रस्तुत किए, लेकिन आज तक मामले में कोई निर्णायक कार्रवाई नहीं हुई. दिमांग सिंह का कहना है कि प्रशासनिक उदासीनता के कारण गांव के लोग विकास से वंचित हैं और पंचायत में जवाबदेही समाप्त होती जा रही है.

Jansunwai Shivpuri: सिंधिया ने कलेक्टर को लिखा था पत्र

Jansunwai Shivpuri: सिंधिया ने कलेक्टर को लिखा था पत्र

जनसुनवाई में छा गया मामला

जब दिमांग सिंह शिकायत पत्रों की माला पहनकर जनसुनवाई में पहुंचे तो वहां मौजूद अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य फरियादियों का ध्यान उनकी ओर गया. कुछ समय के लिए जनसुनवाई कक्ष में इसी मामले की चर्चा होती रही. ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल एक व्यक्ति की लड़ाई नहीं, बल्कि गांव के विकास और पारदर्शिता का सवाल है.

कलेक्टर ने लिया संज्ञान

मामला सामने आने के बाद शिवपुरी कलेक्टर अर्पित वर्मा ने इसे गंभीरता से लिया है. उन्होंने कहा कि फरियादी द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच कराई जाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. कलेक्टर ने अधिकारियों को मामले के सभी तथ्यों की पड़ताल करने और शिकायतों की सत्यता जांचने के निर्देश दिए हैं.

Jansunwai Shivpuri: भ्रष्टाचार का आरोप

Jansunwai Shivpuri: भ्रष्टाचार का आरोप

व्यवस्था पर उठे कई सवाल

यह घटना प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर कई सवाल छोड़ गई है. यदि कोई व्यक्ति लगातार तीन वर्षों तक शिकायत करता रहा, तो उसकी शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई? यदि शिकायतें गलत थीं तो उन्हें निरस्त क्यों नहीं किया गया और यदि सही थीं तो कार्रवाई में इतनी देरी क्यों हुई? स्थानीय लोगों का मानना है कि योजनाओं की वास्तविक निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित किए बिना ग्रामीण विकास के दावों को धरातल पर उतारना मुश्किल है.

अब कार्रवाई पर टिकी निगाहें

दिमांग सिंह के इस अनोखे प्रदर्शन ने पंचायत और प्रशासन दोनों को कठघरे में खड़ा कर दिया है. अब ग्रामीणों की नजर इस बात पर है कि जांच के बाद वास्तव में कार्रवाई होती है या यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाता है.

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