UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है. योगी सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर गंभीर आरोप लगाए हैं. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स' पर किए गए एक पोस्ट में राजभर ने मध्य प्रदेश में जमीन निवेश, एक्सप्रेसवे परियोजनाओं और कथित प्रभावशाली निवेशकों के संबंध में कई सवाल उठाए. उन्होंने दावा किया कि अखिलेश यादव कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों को सार्वजनिक नहीं कर रहे हैं और उनकी नाराजगी के पीछे मध्य प्रदेश में कथित निवेश से जुड़े हितों का मामला हो सकता है. हालांकि इन आरोपों पर समाजवादी पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
सोशल मीडिया पोस्ट पर घेरा
ओम प्रकाश राजभर ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव को सीधे निशाने पर लिया. उन्होंने सवाल किया कि आखिर वह (अखिलेश यादव) क्या छिपाना चाहते हैं. राजभर ने दावा किया कि अखिलेश यादव की बेचैनी के पीछे मध्य प्रदेश में किए गए कथित निवेश और उससे जुड़े हितों की चिंता हो सकती है.
अखिलेश यादव जी, माननीय मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव जी के संबंध में इतना हल्ला क्यों कर रहे हो? इतना शोर करके छुपाना क्या चाहते हो आप? ऐसा क्यों चाहते हैं कि दुनिया वही देखे जो आप दिखाएं?
— Om Prakash Rajbhar (@oprajbhar) June 24, 2026
अब बताता हूं, आपकी पीड़ा क्या है? आप क्यों घबरा गए! कैसे आपके निवेश पर चोट पहुंच गई और क्यों…
आईएएस अधिकारी के रिश्तों को लेकर भी उठाए सवाल
राजभर ने अपने पोस्ट में मध्य प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी भरत यादव का उल्लेख करते हुए दावा किया कि उनका संबंध समाजवादी पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष और वरिष्ठ नेता चंद्रपाल यादव के परिवार से है. उन्होंने आरोप लगाया कि भरत यादव, चंद्रपाल यादव के दामाद हैं और इस रिश्ते को सार्वजनिक रूप से सामने नहीं लाया जा रहा है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सड़क और हाईवे परियोजनाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी होने के कारण जमीन निवेश से जुड़े लोगों को लाभ पहुंचने की आशंका से इन मामलों को लेकर चिंता दिखाई दे रही है.
एक्सप्रेसवे परियोजनाओं पर लगाए आरोप
ओपी राजभर ने अपनी पोस्ट में उत्तर प्रदेश की पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान बने लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे का भी जिक्र किया. उन्होंने आरोप लगाया कि एक्सप्रेसवे निर्माण के दौरान फिरोजाबाद से इटावा तक बड़े पैमाने पर जमीन की खरीद-फरोख्त हुई थी. राजभर का दावा है कि बाद में एक्सप्रेसवे के रूट में बदलाव कर उसे सैफई क्षेत्र की ओर मोड़ा गया, जिससे परियोजना की लंबाई बढ़ी और कुछ लोगों को आर्थिक लाभ मिला. हालांकि इन आरोपों के समर्थन में कोई दस्तावेज या आधिकारिक प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया गया है.
मध्य प्रदेश निवेश को लेकर जांच की मांग
राजभर ने यह भी आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश में सड़क और एक्सप्रेसवे परियोजनाओं से जुड़े संभावित निवेशों की जांच की जानी चाहिए. उन्होंने मांग की कि जांच एजेंसियां यह पता लगाएं कि मध्य प्रदेश में उत्तर प्रदेश के किन-किन प्रभावशाली और कथित सफेदपोश लोगों का निवेश शामिल है तथा इन निवेशों का किसी परियोजना से कोई संबंध है या नहीं.
गोमती रिवर फ्रंट परियोजना का भी किया जिक्र
अपने पोस्ट में ओपी राजभर ने गोमती रिवर फ्रंट परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि पूर्व में इस परियोजना से जुड़ी रिपोर्टें चर्चा में रही हैं. उन्होंने दावा किया कि इसी तरह किसी अन्य परियोजना से जुड़ी रिपोर्ट सामने आने की आशंका भी कुछ लोगों की चिंता का कारण हो सकती है.
सपा की ओर से नहीं आया जवाब
राजभर के इन आरोपों के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है. हालांकि खबर लिखे जाने तक अखिलेश यादव या समाजवादी पार्टी की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई थी. ऐसे में फिलहाल यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित है. यदि भविष्य में किसी पक्ष की ओर से प्रतिक्रिया या कोई दस्तावेजी जानकारी सामने आती है, तो पूरे विवाद की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी.
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