- वृद्धाश्रम में नारी शक्ति मिशन के तहत पुलिस ने बुजुर्ग महिलाओं को उपहार और आवश्यक सामग्री वितरित की
- एक बुजुर्ग महिला ने भावुक होकर आईपीएस बजरंग प्रसाद से अपनी पीड़ा साझा की और पुलिस को अपना सहारा बताया
- आईपीएस बजरंग प्रसाद उत्तर प्रदेश कैडर के 2023 बैच के अधिकारी हैं और आगरा में पहली पोस्टिंग पर तैनात हैं
आगरा के रामलला वृद्धाश्रम में उस समय भावुक माहौल बन गया, जब नारी शक्ति मिशन के तहत पहुंचे एसीपी हरिपर्वत और आईपीएस अधिकारी बजरंग प्रसाद से एक बुजुर्ग महिला लिपटकर रोने लगी. महिला ने भावुक होकर कहा, "बच्चों ने तो छोड़ दिया है, अब आप ही हमारा सहारा बन रहे हैं." महिला की बात सुन वहां मौजूद पुलिसकर्मियों और वृद्धाश्रम के अन्य लोगों की आंखें भी नम हो गईं.
दरअसल, आगरा पुलिस की ओर से नारी शक्ति मिशन के तहत रामलला वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्गों के बीच उपहार और जरूरी सामग्री वितरित की गई. कार्यक्रम में एसीपी हरिपर्वत आईपीएस बजरंग प्रसाद समेत कई पुलिस अधिकारी मौजूद रहे. वृद्धाश्रम पहुंची पुलिस टीम जब बुजुर्गों से बातचीत कर रही थी, तभी एक बुजुर्ग महिला भावुक होकर आईपीएस बजरंग प्रसाद के गले लग गई. महिला रोते हुए अपनी पीड़ा सुनाने लगी. उसने कहा कि उसके बच्चों ने उसे छोड़ दिया है, लेकिन पुलिसकर्मी उसके लिए सहारा बनकर पहुंचे हैं. यह दृश्य देखकर वहां मौजूद सभी लोग भावुक हो गए.

आईपीएस अधिकारी बजरंग प्रसाद भी हुए भावुक
IPS बजरंग प्रसाद ने महिला को संभाला और सांत्वना दी. वहीं, महिला पुलिस अधिकारियों ने वृद्धाश्रम में रह रही अन्य बुजुर्ग महिलाओं को भी उपहार और आवश्यक सामग्री वितरित की. पुलिस के इस व्यवहार से खुश होकर बुजुर्ग महिलाओं ने उनका सम्मान किया और आभार व्यक्त किया. यह पल आईपीएस अधिकारी बजरंग प्रसाद के लिए भी बेहद भावुक रहा. एक ओर जहां वह समाज सेवा के उद्देश्य से वृद्धाश्रम पहुंचे थे, वहीं दूसरी ओर बुजुर्ग महिला की पीड़ा ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया.
कौन हैं आईपीएस बजरंग प्रसाद?
उत्तर प्रदेश कैडर के 2023 बैच के आईपीएस अधिकारी बजरंग प्रसाद वर्तमान में आगरा में अपनी पहली पोस्टिंग पर तैनात हैं. उनका जीवन संघर्ष, धैर्य और सफलता की एक प्रेरक मिसाल माना जाता है. 2 सितंबर 1998 को उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में जन्मे बजरंग प्रसाद ने वर्ष 2022 की संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर 454वीं रैंक हासिल की थी. उन्होंने तीसरे प्रयास में यह सफलता प्राप्त की. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीएससी की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह सिविल सेवा की तैयारी के लिए दिल्ली चले गए थे.
पिता की हत्या के बाद भी नहीं टूटा हौसला
बजरंग प्रसाद के जीवन का सबसे कठिन दौर वर्ष 2020 में आया, जब जमीन विवाद में उनके पिता राजेश कुमार यादव की हत्या कर दी गई. उस समय वह दिल्ली में रहकर यूपीएससी परीक्षा की तैयारी कर रहे थे और प्रारंभिक परीक्षा में केवल कुछ दिन ही बाकी थे. परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, लेकिन उनकी मां कुसुमलता ने बेटे के सपनों को टूटने नहीं दिया. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने बेटे की पढ़ाई प्रभावित न हो इसलिए उसे अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए भी घर नहीं बुलाया. बाद में बजरंग प्रसाद ने अपनी मेहनत जारी रखी और आखिरकार आईपीएस अधिकारी बनकर मां का सपना पूरा किया.
14 अगस्त 2026 को उन्होंने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए बताया था कि उनके पिता की हत्या के मामले में सभी नौ दोषियों को बस्ती की अदालत ने दस-दस वर्ष की सजा सुनाई है. बजरंग प्रसाद के तीन भाई हैं, जबकि उनकी बहन भारतीय सेना में सेवाएं दे रही हैं. परिवार की कठिन परिस्थितियों और लगातार संघर्ष के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी. यही वजह है कि उनकी कहानी आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है.
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