- नोएडा पुलिस और साइबर सेल ने लॉटरी का झांसा देकर ठगी करने वाले साइबर गैंग के दस आरोपियों को गिरफ्तार किया
- आरोपियों के कब्जे से ठगी में इस्तेमाल 20 मोबाइल फोन, चार डेबिट कार्ड और दस हजार दो सौ रुपये नकद बरामद हुए हैं
- गिरोह फेसबुक और इंस्टाग्राम पर फर्जी लॉटरी के विज्ञापन चलाकर लोगों को आकर्षित करता था
नोएडा के थाना फेस-3 पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने सोशल मीडिया के माध्यम से लॉटरी का झांसा देकर लोगों से ठगी करने वाले एक बड़े साइबर गैंग का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 10 शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इनके कब्जे से ठगी में प्रयुक्त 20 मोबाइल फोन, 4 डेबिट कार्ड और 10,200 रुपये नकद बरामद किए गए हैं.
18 शिकायतें दर्ज
एडीसीपी सेंट्रल नोएडा स्वतंत्र सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान एलन एंटनी, अंकित कुमार, राहुल, शकील, राजशेखर, गुरु प्रसाद, विनय डीपी, विनोद कुमार, संतोष और चेतन के रूप में हुई है. सभी को सेक्टर-121 स्थित एक फ्लैट से गिरफ्तार किया गया. पुलिस के अनुसार पिछले करीब दो महीनों से एनसीआरपी पोर्टल और समन्वय पोर्टल पर संदिग्ध मोबाइल नंबरों, आईएमईआई और बैंक खातों से संबंधित शिकायतें प्राप्त हो रही थीं. जांच में पता चला कि कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में इस गिरोह के खिलाफ करीब 18 शिकायतें दर्ज हैं.
कैसे फंसाते थे
साइबर सेल और स्थानीय पुलिस ने जांच के दौरान पाया कि आरोपी लगातार फर्जी बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और सिम कार्डों का इस्तेमाल कर रहे थे, ताकि उनकी पहचान न हो सके.पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फर्जी लॉटरी और इनाम जीतने के विज्ञापन प्रसारित करते थे. विज्ञापनों में अपना संपर्क नंबर साझा कर लोगों को आकर्षित किया जाता था. संपर्क करने वाले लोगों को मात्र 50 रुपये में फर्जी लॉटरी टिकट भेजा जाता था.
ऐसे जीतते थे विश्वास
इसके बाद पीड़ितों को 12 लाख रुपये की लॉटरी निकलने का झांसा दिया जाता था और टीडीएस, जीएसटी, एनओसी, इनकम टैक्स क्लीयरेंस, आरबीआई क्लीयरेंस और फाइनल ट्रांसफर चार्ज जैसे विभिन्न शुल्कों के नाम पर अलग-अलग किश्तों में रकम वसूली जाती थी. पुलिस जांच में सामने आया कि यह गिरोह मुख्य रूप से दक्षिण भारत के लोगों को निशाना बनाता था. आरोपी उनकी स्थानीय भाषा में बातचीत कर विश्वास जीतते थे. ठगी को विश्वसनीय बनाने के लिए फर्जी आयकर विभाग और भारतीय रिजर्व बैंक के प्रमाण पत्र तैयार कर व्हाट्सएप के माध्यम से भेजे जाते थे.
कैसे पकड़े गए
एडीसीपी स्वतंत्र सिंह ने बताया कि गिरोह किसी व्यक्ति के झांसे में आने के बाद उससे 2 से 2.5 लाख रुपये तक की ठगी कर लेता था. पुलिस को 17 और 18 जून की रात करीब 1:30 बजे सेक्टर-121 स्थित फ्लैट नंबर-302 के संबंध में सूचना मिली थी. इसके बाद थाना फेस-3 पुलिस और साइबर सेल की टीम ने संयुक्त छापेमारी कर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस के मुताबिक आरोपियों को फर्जी बैंक खाते और सिम कार्ड उपलब्ध कराने वाला एक अन्य व्यक्ति भी जांच के दायरे में है. पकड़े जाने से बचने के लिए आरोपी लगातार मोबाइल नंबर और सिम बदलते रहते थे तथा इस्तेमाल के बाद सिम कार्ड नष्ट कर देते थे. फिलहाल पुलिस आरोपियों के नेटवर्क और अन्य सहयोगियों की तलाश में जुटी है.
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