- मुरादाबाद जिले के बिलारी से समाजवादी पार्टी के विधायक फहीम इरफान का जाति प्रमाणपत्र निरस्त कर दिया गया है.
- जिला स्तरीय जाति प्रमाणपत्र सत्यापन समिति ने विधायक के OBC के झोजा जाति वर्गीकरण को सही नहीं पाया है.
- सभी पक्षों की सुनवाई और दस्तावेज जांच के बाद विधायक और उनके परिजनों के जाति प्रमाणपत्र निरस्त किए गए.
उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के एक विधायक की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही है. सपा विधायक पर फर्जी प्रमाण पत्र लगा चुनाव जीतने का आरोप लगा था, जो जिला स्तरीय जाति प्रमाणपत्र सत्यापन समिति में सही निकला. दरअसल यह मामला मुरादाबाद के बिलारी से सपा विधायक फहीम इरफान से जुड़ा है. फहीम इरफान पर चुनाव जीतने में फर्जी प्रमाण पत्र के इस्तेमाल का पुराना मामला चल था. जिसे डीएम अनुज सिंह की अध्यक्षता में गठित जांच समिति ने सही पाया. OBC सर्टिफिकेट रद्द होने के बाद अब सपा विधायक फहीम इरफान की विधानसभा सदस्यता पर खतरे की तलवार लटक रही है. हालांकि विधायक ने कहा कि आदेश की कॉपी मिलने के बाद आगे के कानूनी विकल्पों को तलाशेंगे.
सुनवाई के बाद विधायक का जाति प्रमाण पत्र निरस्त
समिति ने अपने आदेश में कहा- मोहम्मद फहीम इरफान पुत्र स्व.मोहम्मद इरफान निवासी ग्राम इब्राहीमपुर तहसील बिलारी का अन्य पिछड़ा वर्ग में झोजा जाति में वर्गीकृत होना स्पष्ट रूप से नहीं पाया गया. इसलिए इन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग के अंतर्गत झोजा जाति का लाभ प्रदान किया जाना उचित नहीं है. सुनवाई के बाद विधायक फहीम का यह जाति प्रमाणपत्र निरस्त कर दिया है.
लवली यादव ने दर्ज करवाई थी शिकायत
बताते चले कि सपा विधायक के खिलाफ यह शिकायत विश्वास यादव उर्फ लवली यादव ने दर्ज करवाया था. 19 जुलाई 2024 को उन्होंने समिति के समक्ष शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि विधायक मोहम्मद फहीम, उनके चाचा हाजी मोहम्मद उस्मान और उस्मान की दो बेटियों – फरहीन जहां और समरीन जहां– के जाति प्रमाणपत्र सही नहीं हैं.
शिकायत के बाद 4 सदस्यीय समिति गठित की गई और पूरे मामले की विस्तृत सुनवाई की गई. दोनों पक्षों को दस्तावेज और साक्ष्य पेश करने का अवसर दिया गया. रिकॉर्ड, पुराने अभिलेख और वर्गीकरण से जुड़े दस्तावेजों की जांच की गई.
विधायक ने खुद को झोजा जाति का बताया था
समिति ने अपने आदेश में कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर झोजा जाति में विधायक और उनके परिजनों का वर्गीकरण स्पष्ट रूप से सिद्ध नहीं हो पाया. इसी आधार पर विधायक मोहम्मद फहीम, उनके चाचा और दोनों बेटियों के अन्य पिछड़ा वर्ग के तहत जारी जाति प्रमाणपत्र निरस्त कर दिए गए.
डीएम बोले- सभी पक्षों को सुनने के बाद लिया गया निर्णय
समिति ने अपने फैसले में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के पुराने निर्णयों का भी उल्लेख किया, जिनमें झोजा और तुर्क को अलग-अलग श्रेणी माना गया है.
यह मामला किसी सिविल कोर्ट या हाईकोर्ट में नहीं चल रहा था, बल्कि जिला स्तरीय जाति प्रमाणपत्र सत्यापन समिति के सामने ही इसकी सुनवाई हुई.
जिलाधिकारी अनुज सिंह ने कैमरे के सामने बयान देने से इनकार किया, लेकिन फोन पर बातचीत में पुष्टि की कि समिति ने सभी पक्षों को सुनने और दस्तावेजों की समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया है.
विधायक ने कहा- आदेश की कॉपी मिलने पर कानूनी विकल्प तलाशेंगे
वहीं विधायक मोहम्मद फहीम का कहना है कि उन्हें आदेश की आधिकारिक प्रति अभी प्राप्त नहीं हुई है. उनका कहना है कि आदेश मिलने के बाद वे कानूनी विकल्प अपनाएंगे. दूसरी ओर हाजी मोहम्मद उस्मान ने कहा है कि उनके पास पुश्तैनी दस्तावेज मौजूद हैं और यदि जरूरत पड़ी तो वे मंडलीय अपीलीय फोरम में अपील करेंगे.
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