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अतीक का कसारी-मसारी अब कृष्णपुरी, CM योगी की घोषणा ने सेट किया UP चुनाव का नैरेटिव, मथुरा बनेगा बड़ा मुद्दा

यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज में अतीक अहमद के इलाके कसारी-मसारी को श्री कृष्णपुरी के रूप में विकसित करने की घोषणा की है. सीएम ने माफिया के कब्जे वाली जमीन पर जरूरतमंदों को बनने वाले घर का भूमिपूजन भी किया है.

अतीक का कसारी-मसारी अब कृष्णपुरी, CM योगी की घोषणा ने सेट किया UP चुनाव का नैरेटिव, मथुरा बनेगा बड़ा मुद्दा
प्रयागराज में अतीक अहमद के इलाके कसारी-मसारी को श्रीकृष्णपुरी के रूप में विकसित करने की घोषणा के बड़े मायने हैं.
NDTV
  • प्रयागराज के कसारी-मसारी इलाके का नाम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कृष्णपुरी करने की घोषणा की है.
  • माफिया अतीक अहमद के दौर की पहचान रहे कसारी-मसारी क्षेत्र को अब कृष्णपुरी नाम से जाना जाएगा.
  • मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि विवाद को लेकर राजनीतिक दलों के बीच यूपी विधानसभा चुनाव से पहले सक्रियता बढ़ी है.
प्रयागराज:

प्रयागराज का चकिया और चकिया का कसारी-मसारी... वो नाम जिसका जिक्र आते ही माफिया अतीक अहमद के दौर का खौफ जेहन में उतर आता है. अब अतीक और उसका साम्राज्य तो नहीं ही बचा, उसके मुहल्ले की पहचान भी मिट्टी में मिल गई. जिस कसारी मसारी की पहचान अतीक अहमद से होती थी, अब वो कृष्णपुरी हो गया है. खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कसारी-मसारी का नाम कृष्णपुरी करने की घोषणा की. 

कृष्ण के नाम से क्यों बदला गया संगमी नगरी का ये इलाका?

यूं तो एक मुहल्ले का नाम बदला जाना कोई बड़ी बात नहीं लगती, लेकिन संगम नगरी के इस इलाके में भगवान कृष्ण के नाम से नाम बदलना एक बड़ा संकेत भी दिखाई देता है. अयोध्या के भगवान राम के मंदिर निर्माण के बाद अब हर तरफ कृष्ण जन्मभूमि की आजादी की बात हो रही है. 

PDA के रथ पर सवार अखिलेश यादव से भी मथुरा ना जाने को लेकर सवाल पूछे जा रहे हैं. ऐसे में चर्चा है कि क्या कुछ महीनों बाद होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव में भगवान कृष्ण की जन्मस्थली मथुरा बड़ा मुद्दा बनने जा रहा है? 

प्रयागराज में माफिया से मुक्त कराई गई भूमि पर पद्म लोक आवास योजना के अंतर्गत ₹191 करोड़ की लागत से 602 आवासों के निर्माण हेतु आयोजित भूमिपूजन कार्यक्रम में सीएम योगी.

प्रयागराज में माफिया से मुक्त कराई गई भूमि पर पद्म लोक आवास योजना के अंतर्गत ₹191 करोड़ की लागत से 602 आवासों के निर्माण हेतु आयोजित भूमिपूजन कार्यक्रम में CM योगी.
Photo Credit: सीएम योगी का एक्स हैंडल.

कृष्ण जन्मभूमि का मुद्दा लगातार उठ रहा 

मथुरा और श्री कृष्ण की चर्चा इसलिए भी अहम हो जाती है क्योंकि बीते कुछ महीनों में कृष्ण जन्मभूमि का मुद्दा जोर-शोर से उठाया गया. सीएम योगी आदित्यनाथ जन्माष्टमी में मथुरा में थे. उन्होंने कृष्ण जन्मभूमि का जिक्र भी किया. एक तरफ जन्मभूमि का मुकदमा जिला अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक चल रहा है तो वहीं दूसरी तरफ मथुरा में जन्मभूमि के लिए कारसेवा की घोषणा की गई है. बाबरी विध्वंस की तारीख़ 6 दिसंबर को कारसेवा के लिए चुना गया है. 

अखिलेश को मिल चुकी चुनौती, मथुरा पर क्लियर करें स्टैंड

सीएम योगी आदित्यनाथ ने इसी साल समाजवादी पार्टी के मुखिया को मथुरा पर स्टैंड साफ करने की चुनौती दी थी. उन्होंने अयोध्या का जिक्र करते हुए कहा कि अखिलेश यादव को अयोध्या की चिंता ना करके एक बार प्रभु श्री रामलला का दर्शन कर लेना चाहिए. इसके बाद मथुरा का जिक्र कर उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि खुलकर बोलिए कि श्री राम जन्मभूमि मुक्ति के आंदोलन की तर्ज पर ही श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति का भी अभियान चलना चाहिए. 

अखिलेश भी सॉफ्ट हिंदुत्व की राह पर

समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव भी सॉफ्ट हिंदुत्व की राह पर चल रहे हैं. वो काशी, मथुरा या अयोध्या के दौरे पर तो नहीं जा रहे लेकिन अपने गृह जनपद इटावा में केदारेश्वर मंदिर का निर्माण कराने के बाद वो चुनाव से पहले उसकी प्राण-प्रतिष्ठा की घोषणा कर रहे हैं. अखिलेश यादव कहते हैं कि केदारेश्वर मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद वो अयोध्या या मथुरा जाएंगे. वहीं अक्सर सपा दफ्तर पर पोस्टर्स के ज़रिए अखिलेश यादव को कृष्ण भक्त दिखाने की कोशिश होती रही है. 

मथुरा पर क्यों किया जा रहा फोकस?

यूपी विधानसभा चुनाव से पहले मथुरा के कृष्ण जन्मभूमि का मुद्दा बड़ा किए जाने की संभावना दिखाई देने लगी है. इसकी वजह ये भी मानी जा रही है कि जून महीने में अयोध्या के राम मंदिर के चंदा/चढ़ावा चोरी के आरोपों को अखिलेश यादव के बार बार उठाने की वजह से मथुरा को फोकस किया जा रहा हो. यादव राजनीति करने वाले अखिलेश यादव को यदुवंशी कृष्ण के मामले पर घेरकर बीजेपी सनातन के मुद्दे को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है. 

हिंदुत्व और कानून-व्यवस्था दोनों एक साथ बढ़ाने की कोशिश

प्रयागराज के कसारी-मसारी को कृष्णपुरी बनाने के कदम को इसी कड़ी में एक और कोशिश किया जाना माना जा सकता है. इससे सीएम योगी आदित्यनाथ ने हिंदुत्व और कानून व्यवस्था का मुद्दा एक साथ बढ़ाने की कोशिश की है. यूपी में नाम बदलने की परंपरा लगभग हर सरकार का एक राजनैतिक हथियार रहा है. 

महापुरुषों के नाम पर जिले, कस्बे या मुहल्ले का नाम रखने से जातियों को साधने की कोशिश होती रही है लेकिन अतीक के इलाक़े को कृष्ण के नाम पर करके बीजेपी ने नैरेटिव बदलने का काम ज़रूर किया है.

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