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'बार-बार क्‍यों लग रहे अवैध वसूली के आरोप', इलाहाबाद HC ने यूपी बेसिक शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार मामले में अपनाया सख्त रुख

इला‍हाबाद हाई कोर्ट ने एक शिक्षक द्वारा छह वर्षों से लंबित याचिका को अचानक वापस लेने की अर्जी पर सुनवाई करते हुए यह सख्त रुख अपनाया है.

'बार-बार क्‍यों लग रहे अवैध वसूली के आरोप', इलाहाबाद HC ने यूपी बेसिक शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार मामले में अपनाया सख्त रुख

प्रयागराज:  इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर बेहद तल्ख और गंभीर टिप्पणी की है. कोर्ट ने विभाग के अंदर चिंताजनक और परेशान करने वाली परिस्थितियों पर ध्यान दिलाते हुए कहा है कि इस विभाग में भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के आरोप लगातार और बार-बार कोर्ट के सामने लाए जा रहे है.

कोर्ट ने एक शिक्षक द्वारा छह वर्षों से लंबित याचिका को अचानक वापस लेने की अर्जी पर सुनवाई करते हुए यह सख्त रुख अपनाया. कोर्ट ने माना कि बिना किसी लिखित प्रशासनिक आदेश या रिकॉर्ड के अचानक मामलों का सुलझ जाना विभाग की संदिग्ध और चिंताजनक स्थिति की ओर इशारा करता है. कोर्ट ने साफ किया है कि न्यायिक प्रक्रिया को अस्पष्ट प्रशासनिक कार्रवाइयों के जरिए विफल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती.

ज‍िला बेस‍िक शि‍क्षा अधि‍कारी को न‍िर्देश

कोर्ट ने ज‍िला बेसिक शिक्षा अधिकारी, प्रयागराज को यह निर्देश दिया है कि वो अपना एक व्यक्तिगत हलफ़नामा दाखिल करें जिसमें ये बताया जाए कि याचिकाकर्ता की शिकायत का समाधान कैसे और किस तरह से किया गया है, क्या मौजूदा रिट याचिका में चुनौती दिए गए आदेश को असल में वापस ले लिया गया है, रद्द कर दिया गया है, उसमें बदलाव किया गया है या उसे किसी अन्य तरह से अमान्य कर दिया गया है और यदि ऐसा है तो अधिकारी कौन है जिसने यह कार्रवाई की है. उस आदेश या दस्तावेज़ की एक कॉपी रिकॉर्ड पर रखी जाए जिसके आधार पर याचिकाकर्ता का दावा है कि उसकी शिकायत का समाधान हो गया है.

10 स‍ितंबर को होगी अगली सुनवाई

हलफनामे में उन हालात का भी ज़िक्र होना चाहिए, जिनमें बाद का फ़ैसला यदि कोई लिया गया हो और उस फ़ैसले को लेने के लिए ज़िम्मेदार अधिकारी कौन था. कोर्ट अब इस मामले में अगली सुनवाई दस सितंबर को करेगी. यह आदेश जस्टिस जस्टिस मंजू रानी चौहान की सिंगल बेंच ने उपहार कुशवाहा की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है.

क्‍या है पूरा मामला?  

यह पूरा मामला प्रयागराज के एक जूनियर बेसिक स्कूल में कार्यरत सहायक शिक्षक उपहार कुशवाहा से जुड़ा हुआ है. वर्ष 2018 में बेसिक शिक्षा अधिकारी, प्रयागराज ने उनके खिलाफ एक आदेश जारी किया था जिससे उनकी सेवा शर्तें और नियमित वेतन प्रभावित हो रहे थे. शिक्षक ने इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी. नवंबर 2019 में कोर्ट ने इस मामले में शिक्षक को राहत देते हुए बीएसए के आदेश पर रोक लगा दी थी.

यह याचिका पिछले छह वर्षों से अदालत में लंबित चल रही थी. इसी दौरान 20 अगस्त को याचिकाकर्ता शिक्षक ने अचानक अदालत से अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी. शिक्षक का तर्क था कि विभाग के साथ उनका विवाद अब सुलझ गया है. हालांकि, कोर्ट ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया. 

'मौखिक रूप से मामला सुलझने का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता' 

जस्टिस मंजू रानी चौहान की कोर्ट ने हैरानी जताते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने यह तो कह दिया कि शिकायत सुलझ गई है, लेकिन रिकॉर्ड पर ऐसा कोई आधिकारिक दस्तावेज या आदेश पेश नहीं किया गया, जिससे यह साफ हो सके कि आखिर विवाद किस आधार पर और किस प्रकार हल हुआ. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वर्षों से लंबित याचिका और अंतरिम आदेश के बाद बिना किसी पारदर्शी प्रशासनिक दस्तावेज के केवल मौखिक रूप से मामला सुलझने का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता.

मामला गंभीर, कोर्ट ने व्‍यक्‍त संदेश

कोर्ट ने संदेह व्यक्त किया कि न्यायिक प्रक्रिया का उपयोग अपनी सुविधा अनुसार अंतरिम राहत लेने और बाद में बिना किसी ठोस स्पष्टीकरण के पर्दे के पीछे सांठगांठ करके मामला रफा-दफा करने के लिए नहीं किया जा सकता. बेसिक शिक्षा विभाग की इस कार्यशैली पर कड़ा ऐतराज जताते हुए अदालत ने साफ कहा कि वह विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार के बार-बार आ रहे मामलों से अपनी आंखें नहीं मूंद सकती. मामले की गंभीरता को देखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रयागराज को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का सख्त निर्देश दिया है. 

बीएसए को अदालत में यह स्पष्ट करना होगा कि शिक्षक की शिकायत को किस प्रकार निपटाया गया, क्या 2018 का मूल आदेश वापस लिया गया था या रद्द किया गया था और यह फैसला किस अधिकारी की मंजूरी से लिया गया था. इसके अलावा, हलफनामे में उन परिस्थितियों और जिम्मेदार अधिकारियों का भी ब्योरा देने को कहा गया है जिनके तहत यह बाद का फैसला लिया गया. कोर्ट ने रजिस्ट्रार अनुपालन और बीएसए के वकील को आदेश का सख्ती से पालन कराने का निर्देश दिया है. इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख 10 सितंबर तय की गई है. 

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