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This Article is From Jun 30, 2025

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्रैंड ओमेक्स को 25 करोड़ रुपये जमा करने का दिया निर्देश

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि अगली किश्तें 15 अक्टूबर 2025, 15 अप्रैल 2026, 15 अक्टूबर 2026 और 15 अप्रैल 2027 को देय थी.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्रैंड ओमेक्स को 25 करोड़ रुपये जमा करने का दिया निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा के सेक्टर 93 B स्थित ग्रैंड ओमेक्स लिमिटेड को 25 करोड़ रुपये जमा करने और नोएडा में रुकी हुई परियोजनाओं में घर खरीदारों के पक्ष में पहले से जारी 170 फ्लैटों के अतिरिक्त 50 फ्लैट आवंटित करने का निर्देश दिया है. ग्रैंड ओमेक्स बिल्डहोम लिमिटेड बिल्डर/डेवलपर ने ग्रैंड ओमेक्स और फॉरेस्ट स्पा नामक आवास परियोजनाओं के विकास के लिए न्यू ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण (नोएडा) से भूमि पट्टे पर ली थी. इन दोनों परियोजनाओं में घर खरीदने वाले याचिकाकर्ताओं ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, क्योंकि बिल्डर को फ्लैटों की पूरी कीमत चुकाने के बावजूद उनके पक्ष में त्रिपक्षीय समझौते निष्पादित नहीं किए जा रहे थे.

सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला

कोर्ट में कहा गया कि प्राधिकरण इस पर अमल नहीं कर रहा था, क्योंकि बिल्डर लीज समझौते के तहत 250 करोड़ रुपये की बकाया राशि का भुगतान करने में विफल रहा था. बिल्डर/डेवलपर को नोटिस जारी करते हुए इलाहाबाद  हाईकोर्ट  ने निर्देश दिया था कि संपूर्ण बकाया राशि के भुगतान के अधीन, नोएडा अपने अधिकार क्षेत्र में ओमेक्स को किसी भी परियोजना के लिए कोई अधिभोग/पूर्णता प्रमाण पत्र जारी नहीं करेगा. इसके खिलाफ ओमेक्स ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की, जिसे खारिज कर दिया गया.

जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस अनीश कुमार गुप्ता की डबल बेंच ने तरूण कपूर और 29 अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने बिल्डरों/डेवलपर्स को कई तरह की छूट देकर एनसीआर क्षेत्र में अटकी परियोजनाओं को पूरा करने के लिए एक योजना जारी की थी. इसका लाभ उठाते हुए ओमेक्स ने 93 करोड़ रुपये (कुल बकाया का 25%) जमा करा दिया. इसके अनुसार लंबित 678 में से 170 फ्लैटों को मुक्त कर दिया गया और सब-लीज डीड निष्पादित करने का निर्देश दिया गया.

अदालत ने क्या दिया आदेश

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि अगली किश्तें 15 अक्टूबर 2025, 15 अप्रैल 2026, 15 अक्टूबर 2026 और 15 अप्रैल 2027 को देय थी. बिल्डर के वकील ने तर्क दिया कि प्राधिकरण द्वारा शुल्कों की पुनर्गणना के खिलाफ एक सिविल रिवीजन दायर किया गया था. हालांकि, उन्होंने यह भी प्रस्ताव दिया कि यदि प्राधिकरण 50 और फ्लैट जारी करता है तो बिल्डर 25 करोड़ रुपये जमा करने के लिए तैयार है. इस प्रस्ताव पर प्राधिकरण द्वारा कोई आपत्ति नहीं की गई थी इसलिए कोर्ट ने निर्देश दिया की दो हफ्ते के अंदर डेवलपर/बिल्डर द्वारा 25 करोड़ रुपये जमा करने पर 170 फ्लैटों के अलावा 50 अतिरिक्त फ्लैट जारी किए जाएंगे. डेवलपर द्वारा प्रदान की गई क्रेता-बिल्डर समझौते की तारीख/आवंटन की तारीख के साथ घर खरीदारों की सूची, साथ ही पूरक हलफनामे, उन फ्लैटों के संबंध में सब - लीज़ डीड के निष्पादन का आधार बनेंगे जो पहले ही जारी किए जा चुके है या तत्काल आदेश के अनुसार जारी किए जाएंगे.

घर खरीदने वालों के वकील ने मामले को लंबित रखने पर जोर दिया ताकि डेवलपर और न्यू ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण से स्थिति रिपोर्ट मांगी जा सके इसलिए अदालत ने निर्देश दिया कि उक्त निर्देशों के साथ पहले के अंतरिम आदेश को संशोधित किया जाए और नोएडा ऑथोरिटी को सुनवाई की अगली तारीख पर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया जाए. इस मामले में अगली सुनवाई जुलाई के दूसरे हफ्ते में होगी.

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