उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय समीकरण हमेशा चुनावी नतीजों को प्रभावित करते रहे हैं. 2027 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए समाजवादी पार्टी अब अपने PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) अभियान को और मजबूत करने में लगी है. इसी रणनीति के तहत पार्टी ने लोधी समाज पर विशेष ध्यान देना शुरू किया है. लोधी समुदाय प्रदेश की प्रमुख ओबीसी जातियों में गिना जाता है और इसका प्रभाव पश्चिमी उत्तर प्रदेश, रुहेलखंड, ब्रज क्षेत्र, बुंदेलखंड तथा अवध के कई जिलों में देखा जाता है.
राजनीतिक जानकारों के अनुसार लोधी मतदाता करीब 70 विधानसभा सीटों और लगभग 12 लोकसभा सीटों पर प्रभाव डालने की क्षमता रखते हैं. कई क्षेत्रों में यह समुदाय जीत और हार का अंतर तय करने वाला माना जाता है.
किन जिलों में है लोध समाज की मजबूत मौजूदगी
लोधी समुदाय की अच्छी आबादी बुलंदशहर, रामपुर, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, बदायूं, अलीगढ़, कासगंज, एटा, आगरा, मैनपुरी और फिरोजाबाद जैसे जिलों में है. इसके अलावा इटावा, औरैया, कन्नौज, फर्रुखाबाद, कानपुर देहात, कानपुर नगर, झांसी, ललितपुर, जालौन, हमीरपुर, महोबा, फतेहपुर, उन्नाव, रायबरेली, लखीमपुर खीरी, सीतापुर और लखनऊ सहित कई जिलों में भी इस समाज का प्रभाव देखा जाता है.
भाजपा का पारंपरिक आधार रहा है लोध वोट
उत्तर प्रदेश में भाजपा के विस्तार के साथ लोधी समुदाय लंबे समय तक पार्टी का मजबूत समर्थक माना जाता रहा है. पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को इस समाज का सबसे बड़ा चेहरा माना जाता है. उनके प्रभाव के कारण बड़ी संख्या में लोध मतदाता भाजपा के साथ जुड़े. उमा भारती, साक्षी महाराज और गंगा चरण राजपूत जैसे नेताओं ने भी इस समाज में अपनी पहचान बनाई.
PDA के जरिए नई सामाजिक गोलबंदी में जुटी सपा
समाजवादी पार्टी ने लोधी समाज के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की तैयारी काफी पहले शुरू कर दी थी. 2024 लोकसभा चुनाव में हमीरपुर-महोबा जैसे लोधी बहुल क्षेत्रों में मिली सफलता ने पार्टी का उत्साह बढ़ाया है. अब अखिलेश यादव इसी आधार को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं.
सपा ने अलीगढ़ से लेकर उन्नाव तक दो दर्जन से अधिक जिलों में लोधी समाज से जुड़े कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की योजना बनाई है. इन कार्यकर्ताओं के जरिए पार्टी का संदेश समाज तक पहुंचाया जाएगा. इसके साथ ही 2027 चुनाव के लिए संभावित मजबूत लोध उम्मीदवारों की पहचान और प्रोफाइल तैयार करने का काम भी शुरू किया गया है.
2027 में बड़ा दांव खेलने की तैयारी
लोकसभा चुनाव में कुर्मी और पासी समाज के बीच बेहतर समर्थन हासिल कर भाजपा को चुनौती देने वाली समाजवादी पार्टी अब लोधी समाज को भी अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है. पार्टी का मानना है कि यदि PDA समीकरण में लोधी समुदाय का मजबूत समर्थन जुड़ता है तो 2027 के विधानसभा चुनाव में उसे बड़ा राजनीतिक फायदा मिल सकता है.
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