- नर्सिंग छात्र अपनी परीक्षा, रिजल्ट, डिग्री और रजिस्ट्रेशन की समस्याओं को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं.
- तीन नर्सिंग छात्र नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल कार्यालय के बाहर इमारत पर चढ़कर आत्महत्या की धमकी देने लगे.
- छात्रों का आरोप है कि प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहा और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर नहीं आए.
भोपाल में अपनी मांगों को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे नर्सिंग छात्रों का गुस्सा अब चरम पर पहुंचता दिखाई दे रहा है. भविष्य को लेकर अनिश्चितता और वर्षों से लंबित पड़ी प्रक्रियाओं से परेशान छात्रों ने ऐसा कदम उठाया, जिसने सभी को चिंता में डाल दिया. नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे तीन छात्र अचानक एक निर्माणाधीन छह मंजिला इमारत पर चढ़ गए और आत्महत्या की धमकी देने लगे. छात्रों का कहना है कि परीक्षा, रिजल्ट, डिग्री और रजिस्ट्रेशन की समस्याओं ने उनका करियर छह साल से अधर में लटका रखा है.
आंदोलन के बीच बिल्डिंग पर चढ़े छात्र
भोपाल में नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल कार्यालय के बाहर नर्सिंग छात्र अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन धरना दे रहे हैं. इसी दौरान आंदोलन कर रहे तीन छात्र पास की एक निर्माणाधीन छह मंजिला इमारत पर चढ़ गए. छात्रों के ऊंचाई पर पहुंचते ही वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया. नीचे मौजूद अन्य छात्र लगातार उन्हें समझाने और सुरक्षित नीचे उतारने की कोशिश करते रहे.
छात्रों के इस कदम से आंदोलन स्थल पर तनाव की स्थिति बन गई. बड़ी संख्या में छात्र और लोग इमारत के नीचे जमा हो गए. सभी की नजरें ऊपर खड़े छात्रों पर टिकी थीं. काफी देर तक उन्हें नीचे लाने के प्रयास चलते रहे, जबकि साथी छात्र लगातार उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित नजर आए.
प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
घटना के बाद छात्रों ने प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उनका आरोप है कि तीनों छात्र करीब आधे घंटे तक इमारत पर खड़े रहे, लेकिन इस दौरान कोई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा. छात्रों का कहना है कि जब वे अपनी समस्याओं को लेकर लगातार संघर्ष कर रहे हैं, तब भी उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है.
सरकार और काउंसिल के खिलाफ बढ़ रहा आक्रोश
नर्सिंग छात्रों का प्रदर्शन पिछले कई दिनों से जारी है. आंदोलन के दौरान छात्रों ने सरकार और नर्सिंग काउंसिल के खिलाफ नारेबाजी की. विरोध जताने के लिए पुतला दहन भी किया गया और नोट उड़ाकर अपना रोष व्यक्त किया. छात्रों का कहना है कि बार-बार मांग उठाने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है.
छह साल से अधर में लटका भविष्य
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का दावा है कि परीक्षा, परिणाम, डिग्री और रजिस्ट्रेशन से जुड़ी समस्याओं के कारण हजारों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है. कई छात्रों का कहना है कि उनकी पढ़ाई पूरी होने के बाद भी डिग्री और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया वर्षों से पूरी नहीं हो सकी है. उनका आरोप है कि कुछ मामलों में यह देरी करीब छह साल तक पहुंच चुकी है.
कॉलेजों की मान्यता बना बड़ा मुद्दा
नर्सिंग विवाद में कॉलेजों की मान्यता और संबद्धता भी एक प्रमुख कारण रही है. मध्यप्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल के अंतर्गत प्रदेश में 450 से अधिक नर्सिंग स्कूल और कॉलेज संचालित हैं, जहां एएनएम, जीएनएम और बीएससी नर्सिंग जैसे पाठ्यक्रम चलाए जाते हैं. छात्रों का आरोप है कि कई संस्थानों से जुड़े विवादों का सीधा असर उनकी पढ़ाई और करियर पर पड़ा है.
छात्रों का सवाल, गलती की सजा हमें क्यों?
आंदोलन कर रहे विद्यार्थियों का कहना है कि उन्होंने नियमित फीस जमा कर पढ़ाई पूरी की है. यदि किसी कॉलेज की मान्यता, संबद्धता या प्रशासनिक प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी थी, तो उसकी जिम्मेदारी छात्रों पर नहीं डाली जानी चाहिए. उनका कहना है कि जिन मुद्दों के लिए वे जिम्मेदार नहीं हैं, उनकी वजह से उनका भविष्य दांव पर लग गया है.
छात्रों की मांग है कि लंबित परीक्षाएं जल्द आयोजित कराई जाएं, रुके हुए रिजल्ट घोषित किए जाएं और डिग्री व रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए. साथ ही मान्यता संबंधी विवादों में फंसे छात्रों के लिए सरकार ठोस समाधान निकाले, ताकि हजारों युवाओं का करियर सुरक्षित हो सके.
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