तमिलनाडु में मनचाहे या पसंदीदा पंजीकरण नंबर चाहने वाले वाहन मालिकों को जल्द ही काफी अधिक शुल्क चुकाना पड़ सकता है. राज्य सरकार ने शुल्क में भारी संशोधन का प्रस्ताव रखा है और भविष्य की रजिस्ट्रेशन सीरीज में नंबरों के लिए 8 लाख रुपए तक की लागत वाली एक नई प्रीमियम केटेगरी शुरू की है. यह प्रस्ताव तमिलनाडु मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन के ड्राफ्ट का हिस्सा है, जो 19 जून को असाधारण राजपत्र में प्रकाशित हुआ था. यह कदम 2012 के बाद रजिस्ट्रेशन फीस में पहला बड़ा संशोधन है और इसका उद्देश्य सरकार द्वारा आरक्षित पंजीकरण संख्याओं को नियंत्रित करने वाली मौजूदा प्रणाली में सुधार करना है.
फिलहाल ऐसे होता है रजिस्ट्रेशन
वर्तमान प्रणाली के तहत वाहन पंजीकरण के समय पंजीकरण संख्याएं बिना किसी तय क्रम के रूप से आवंटित की जाती हैं. जो मालिक चल रही सीरीज की 1,000 संख्याओं के अंदर एक खास नंबर प्राप्त करना चाहते हैं, वे निर्धारित शुल्क का भुगतान करके RTO के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं.
दोगुना हो सकती है फीस
संशोधन के ड्राफ्ट में कहा गया है कि आने वाली सीरीज के लिए रजिस्ट्रेशन फीस बढ़ाई जा सकती है. नए नियमों के अनुसार, मौजूदा सीरीज और अगली तीन सीरीज में पसंदीदा नंबर लेने का शुल्क अब पहले से लगभग दोगुना हो जाएगा.

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किस सीरीज के लिए कितने कीमत?
प्रस्ताव के मुताबिक, अगर कोई वाहन मालिक पांचवीं से आठवीं सीरीज के नंबर लेना चाहता है तो उसे करीब 1.2 लाख रुपये देने होंगे. नौवीं और दसवीं सीरीज के नंबरों के लिए यह फीस बढ़कर 2 लाख रुपये हो जाएगी, जबकि ग्यारहवीं और बारहवीं सीरीज के नंबर लेने पर 4 लाख रुपये देने होंगे. इसके अलावा सरकार ने एक नई श्रेणी भी शुरू की है, जिसमें 13वीं और 14वीं आने वाली सीरीज के नंबरों के लिए 8 लाख रुपये का प्रीमियम शुल्क रखा जाएगा, यानी ये सबसे महंगे नंबर होंगे.
फैंसी नंबरों के लिए भी बदल सकती है फीस
सरकार ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि RTO से मिलने वाले फैंसी नंबरों की मौजूदा फिक्स फीस प्रणाली को बदलकर अब गाड़ी की कीमत के हिसाब से फीस तय की जाएगी. दोपहिया और तिपहिया वाहनों के लिए यह शुल्क गाड़ी की कीमत के अनुसार होगा, जहां 50,000 रुपये तक की गाड़ी पर करीब 2,000 रुपये देने होंगे, वहीं 30 लाख रुपये से ज्यादा कीमत वाली गाड़ियों के लिए यह शुल्क 1 लाख रुपये तक जा सकता है. इस नए नियम का मकसद यह है कि महंगी गाड़ियों के मालिकों को पसंदीदा नंबर के लिए ज्यादा फीस देनी . साथ ही इंपोर्टेड गाड़ियों को भी इसी स्लैब सिस्टम में रखा जाएगा.
इंपोर्टेड गाड़ियों का क्या होगा?
आयातित वाहनों के मामले में, 4 लाख रुपये तक की गाड़ी पर 20,000 रुपये और 50 लाख रुपये से ज्यादा की गाड़ी पर करीब 1.5 लाख रुपये तक शुल्क लगेगा, जबकि अभी यह सिर्फ 1,000 से 16,000 रुपये के बीच है. ड्राफ्ट नियमों में यह भी कहा गया है कि भविष्य की सीरीज और सरकार द्वारा आरक्षित फैंसी नंबर देने के लिए राज्य सरकार की मंजूरी जरूरी होगी.
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