- मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना में सरकार ने बदलाव किया है.
- पशुपालकों को गाय खरीदने के लिए दूसरे राज्य जाने होते थे.
- अब घर बैठे ही दूसरे राज्यों से इन गायों को मंगा सकेंगे.
उत्तर प्रदेश के पशुपालकों के लिए अच्छी खबर है. योगी सरकार के 'नंद बाबा दुग्ध मिशन' के तहत संचालित 'मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना' के नियमों में एक बड़ा बदलाव किया गया है. इस नए फैसले के तहत अब योजना में चयनित लाभार्थियों को साहीवाल, थारपारकर और गिर जैसी स्वदेशी नस्ल की दुधारू गायें खरीदने के लिए खुद दूसरे राज्यों में जाना पड़ता था. अब पशुपालक घर बैठे ही दूसरे राज्यों के व्यापारियों के माध्यम से इन गायों को मंगा सकेंगे. पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव (ACS) द्वारा बदलाव की जानकारी दी गई है.
योजना में क्या हुआ है बदलाव?
पहले के नियमों के मुताबिक, योजना के लिए चयनित पशुपालक को स्वयं गुजरात, राजस्थान या अन्य राज्यों में जाकर गायों की तलाश करनी पड़ती थी, उनका सौदा करना होता था और फिर ट्रांसपोर्ट का साधन खोजकर उन्हें उत्तर प्रदेश लाना पड़ता था. नई व्यवस्था के तहत, उत्तर प्रदेश के हर जिले में आयोजित होने वाले पशु मेलों में दूसरे राज्यों के बड़े व्यापारी अपनी स्वदेशी नस्ल की गायें बेचने आते हैं. पशुपालक अब इन मेलों में आने वाले व्यापारियों से संपर्क कर सीधे दूसरे राज्यों से उच्च नस्ल की गायें मंगवा सकेंगे.
पशुपालकों को कैसे मिलेगा फायदा?
पहले पशुपालकों को अच्छी नस्ल की गायें खोजने के लिए दूसरे राज्यों में जाना पड़ता था और इसके लिए खर्च भी करने होते थे. लेकिन अब इस तरह के खर्च नहीं करने होंगे. दूसरे राज्यों में जाकर अनजान लोगों से खरीद करने में ठगी का डर रहता था. लेकिन अब मान्यता प्राप्त और नियमित व्यापारियों के जरिए खरीद आसान और सुरक्षित होगी. व्यापारियों के जरिए आने वाली गायों की खरीद रसीद और वाहन का पूरा ब्योरा सीधे पशुपालन विभाग को सौंपना होगा, जिसे विभाग द्वारा नंद बाबा दुग्ध मिशन पोर्टल पर आसानी से अपलोड कर दिया जाएगा.
मिनी नंदिनी योजना और मिलने वाली सब्सिडी
इस योजना के तहत पशुपालकों को 10 स्वदेशी गायों की डेयरी यूनिट स्थापित करनी होती है. 10 गायों की इस डेयरी यूनिट की कुल परियोजना लागत 23.60 लाख रुपये तय की गई है. इसमें सरकार द्वारा 50% यानी अधिकतम 11.80 लाख रुपये की बंपर सब्सिडी दी जाती है. यह सब्सिडी दो चरणों में सीधे लाभार्थी के खाते (DBT) में भेजी जाती है. पहली किस्त शेड और इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होने के बाद, और दूसरी किस्त गायों की खरीद और उनका बीमा होने के बाद जारी होती है. आवेदन करने वाले किसान के पास डेयरी शेड के लिए करीब 0.20 एकड़ (8,712 वर्ग फुट) और हरे चारे के प्रबंधन के लिए पर्याप्त भूमि होनी अनिवार्य है. यह जमीन 5 साल की लीज पर भी हो सकती है.
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