Tenant Rights: देश में लाखों किराएदार अक्सर एक ही डर के साये में जीते हैं कि मकान मालिक की ओर से कहीं अचानक किराया बढ़ाने या रातों-रात घर खाली करने का फरमान न सुना दिया जाए. ऐसी हालत में ज्यादातर किराएदार घबरा जाते हैं और मकान मालिक की गैर-वाजिब शर्तें मानने पर मजबूर हो जाते हैं. ऐसे में सवाल पैदा होता है कि क्या मकान मालिक के पास ऐसा करने का कानूनी हक है? तो इसका जवाब है बिल्कुल नहीं.
दरअसल, देश में मकान मालिक की शक्तियां सीमित हैं. किराएदार और मकान मालिक के रिश्ते मुख्य रूप से Transfer of Property Act- 1882, राज्यों के अपने रेंट कंट्रोल एक्ट और नए Model Tenancy Act, 2021 से तय होते हैं. ऐसे में अपने अधिकारों को समझ कर आप मकान मालिक की किसी भी गैर-कानूनी मांग का सही जवाब दे सकते हैं.

एग्रीमेंट की शर्तों से बाहर कुछ भी नहीं
आपके और मकान मालिक के बीच एक लिखित और हस्ताक्षरित रेंट एग्रीमेंट मौजूद है, तो पूरी किराएदारी उसी दस्तावेज की शर्तों पर निर्भर करेगी. मकान मालिक किराया केवल तभी बढ़ा सकता है, जब एग्रीमेंट में इसका स्पष्ट क्लॉज हो. जैसे कि ग्यारह महीने बाद किराया दस प्रतिशत बढ़ेगा या वार्षिक आधार पर आपसी सहमति से संशोधन होगा.अगर एग्रीमेंट में किराया बढ़ाने का कोई प्रावधान नहीं है, तो आप बढ़ा हुआ किराया देने के लिए बिल्कुल भी बाध्य नहीं हैं. मकान मालिक एग्रीमेंट की तय समय सीमा से पहले बिना वैध कारण के आपको बेदखल भी नहीं कर सकता है.
एग्रीमेंट न होने पर क्या कहता है कानून?
अगर आपके पास कोई लिखित अनुबंध या एग्रीमेंट नहीं है और आप मौखिक बातचीत पर रह रहे हैं, तो स्थिति थोड़ी बदल जाती है. ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट 1882 की धारा 106 के अनुसार, लिखित अनुबंध के अभाव में रिहायशी संपत्ति के किराए को महीने-दर-महीने की किराएदारी माना जाता है, क्योंकि यह हर महीने की किराएदारी है, इसलिए मकान मालिक अगले महीने से किराया बढ़ाने की बात कह सकता है. अगर आप बढ़े हुए किराए पर सहमत नहीं होते हैं, तो मकान मालिक या किराएदार में से कोई भी 15 दिन का लिखित नोटिस देकर किराएदारी समाप्त कर सकता है.
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लिखित और रजिस्टर्ड एग्रीमेंट क्यों है बेहद जरूरी?
किराए पर मकान लेते समय हमेशा स्टांप पेपर पर लिखित रेंट एग्रीमेंट बनवाना चाहिए. यह दस्तावेज भविष्य में मकान मालिक के किसी भी मनमाने फैसले जैसे अचानक किराया बढ़ाना या बिना नोटिस के घर खाली कराने से आपकी कानूनी रक्षा करता है. केंद्र सरकार के मॉडल टेनेंसी एक्ट 2021 के तहत लिखित एग्रीमेंट को अनिवार्य बनाया गया है. हालांकि, यह राज्यों के लिए एक ढांचा है. वर्तमान में केवल आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और असम ने ही अपने किराएदारी कानूनों को इस नए कानून की तर्ज पर संशोधित किया है.
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