विज्ञापन

मकान मालिक अचानक बढ़ा दे किराया या खाली कराए घर, तो जान लें अपने ये कानूनी अधिकार

क्या आपका मकान मालिक भी अचानक किराया बढ़ा रहा है या घर खाली करने की धमकी दे रहा है? जानिए भारत में किरायेदारों के कानूनी अधिकार, 11 महीने का रेंट एग्रीमेंट और ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट के तहत क्या कहते हैं नियम?

मकान मालिक अचानक बढ़ा दे किराया या खाली कराए घर, तो जान लें अपने ये कानूनी अधिकार
 मकान मालिक की मनमानी या कानून? जानिए किराएदार के रूप में आपके क्या हैं अधिकार.
NDTV

Tenant Rights: देश में लाखों किराएदार अक्सर एक ही डर के साये में जीते हैं कि मकान मालिक की ओर से कहीं अचानक किराया बढ़ाने या रातों-रात घर खाली करने का फरमान न सुना दिया जाए. ऐसी हालत में ज्यादातर किराएदार घबरा जाते हैं और मकान मालिक की गैर-वाजिब शर्तें मानने पर मजबूर हो जाते हैं. ऐसे में सवाल पैदा होता है कि क्या मकान मालिक के पास ऐसा करने का कानूनी हक है? तो इसका जवाब है बिल्कुल नहीं.

दरअसल, देश में मकान मालिक की शक्तियां सीमित हैं. किराएदार और मकान मालिक के रिश्ते मुख्य रूप से Transfer of Property Act- 1882, राज्यों के अपने रेंट कंट्रोल एक्ट और नए Model Tenancy Act, 2021 से तय होते हैं. ऐसे में अपने अधिकारों को समझ कर आप मकान मालिक की किसी भी गैर-कानूनी मांग का सही जवाब दे सकते हैं.

Latest and Breaking News on NDTV

एग्रीमेंट की शर्तों से बाहर कुछ भी नहीं

आपके और मकान मालिक के बीच एक लिखित और हस्ताक्षरित रेंट एग्रीमेंट मौजूद है, तो पूरी किराएदारी उसी दस्तावेज की शर्तों पर निर्भर करेगी. मकान मालिक किराया केवल तभी बढ़ा सकता है, जब एग्रीमेंट में इसका स्पष्ट क्लॉज हो. जैसे कि ग्यारह महीने बाद किराया दस प्रतिशत बढ़ेगा या वार्षिक आधार पर आपसी सहमति से संशोधन होगा.अगर एग्रीमेंट में किराया बढ़ाने का कोई प्रावधान नहीं है, तो आप बढ़ा हुआ किराया देने के लिए बिल्कुल भी बाध्य नहीं हैं. मकान मालिक एग्रीमेंट की तय समय सीमा से पहले बिना वैध कारण के आपको बेदखल भी नहीं कर सकता है.

 एग्रीमेंट न होने पर क्या कहता है कानून? 

अगर आपके पास कोई लिखित अनुबंध या एग्रीमेंट नहीं है और आप मौखिक बातचीत पर रह रहे हैं, तो स्थिति थोड़ी बदल जाती है. ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट 1882 की धारा 106 के अनुसार, लिखित अनुबंध के अभाव में रिहायशी संपत्ति के किराए को महीने-दर-महीने की किराएदारी माना जाता है, क्योंकि यह हर महीने की किराएदारी है, इसलिए मकान मालिक अगले महीने से किराया बढ़ाने की बात कह सकता है. अगर आप बढ़े हुए किराए पर सहमत नहीं होते हैं, तो मकान मालिक या किराएदार में से कोई भी 15 दिन का लिखित नोटिस देकर किराएदारी समाप्त कर सकता है.

यह भी पढ़ें- अब ट्रेन में यह छोटी सी हरकत पड़ेगी बहुत भारी, जा सकते हैं जेल; यात्रीगण कृपया जान लें ये नया नियम 

 लिखित और रजिस्टर्ड एग्रीमेंट क्यों है बेहद जरूरी?

किराए पर मकान लेते समय हमेशा स्टांप पेपर पर लिखित रेंट एग्रीमेंट बनवाना चाहिए. यह दस्तावेज भविष्य में मकान मालिक के किसी भी मनमाने फैसले जैसे अचानक किराया बढ़ाना या बिना नोटिस के घर खाली कराने से आपकी कानूनी रक्षा करता है.  केंद्र सरकार के मॉडल टेनेंसी एक्ट 2021 के तहत लिखित एग्रीमेंट को अनिवार्य बनाया गया है. हालांकि, यह राज्यों के लिए एक ढांचा है. वर्तमान में केवल आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और असम ने ही अपने किराएदारी कानूनों को इस नए कानून की तर्ज पर संशोधित किया है.

 यह भी पढ़ें- इंसानों के सबसे बड़े किलर मच्छर, अब आई ऐसी मशीन जो बिन आवाज, बिन केमिकल हर सेकंड में मारेगी 30 

 यह भी पढ़ें- LPG, FD और ITR समेत एक सितंबर से बदल जाएंगे ये 7 नियम, जानें आप पर क्या होगा असर

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Tenant Rights, Rent Agreement, Real Estate, Legal Rights, Land Lord
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com