New Toll Rules: केंद्रीय सरकार ने नेशनल एक्सप्रेसवे पर टोल के नियम बदल दिए हैं. अब अगर कोई एक्सप्रेसवे पूरी तरह चालू नहीं है, तो यात्रियों से पूरा टोल नहीं लिया जाएगा. वे सिर्फ उतने हिस्से का टोल देंगे, जो पूरा बनकर चालू है. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने National Highways Fee Rules, 2008 में संशोधन के बाद यह नए नियम 15 फरवरी से लागू हो जाएंगे.
आधे-अधूरे एक्सप्रेसवे का नहीं देना होगा पूरा टोल
मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि अगर कोई नेशनल एक्सप्रेसवे अभी पूरी तरह चालू नहीं है, तो उसके उपयोगकर्ताओं के लिए सरकार ने National Highways Fee (Determination of Rates and Collection) Rules, 2008 में संशोधन जारी किया है. यानि, अब अधूरे एक्सप्रेसवे पर यात्रा करने वालों के लिए टोल के नियम अब बदल दिए गए हैं. जानकारी के लिए बता दें, कि पहले एक्सप्रेसवे के बड़े हिस्से अधूरे होने के बावजूद अक्सर पूरे रूट का टोल लिया जाता था. ऐसे में यात्रियों को पूरी लंबाई का शुल्क देना पड़ता था, चाहे वे सिर्फ थोड़े से बने हुए हिस्से पर ही क्यों न यात्रा करें. अब नए नियमों के तहत यह व्यवस्था बदल दी गई है. टोल केवल उसी हिस्से का लिया जाएगा जो पूरा बनकर चालू है. इससे यात्रियों पर अनावश्यक अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा.
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क्या होगा फायदा?
यह बदलाव लोगों को नेशनल एक्सप्रेसवे के चालू हिस्सों का ज्यादा उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से किया गया है. मंत्रालय के अनुसार, इससे एक्सप्रेसवे के समानांतर चलने वाले पुराने नेशनल हाईवे पर भीड़ कम होगी और यात्रियों आवाजाही तेज हो सकेगी. साथ ही, पुराने हाईवे पर लगने वाले ट्रैफिक जाम कम होंगे. इसके अलावा नए टोल नियमों से से निजी वाहन चालकों के साथ-साथ ट्रक और बस ऑपरेटरों को भी फायदा मिलेगा. टोल कम होने से यात्रियों का ट्रांसपोर्टेशन एक्सपेंस कम हो जाएगा.
एक्सप्रेसवे का फीस स्ट्रक्चर
नेशनल एक्सप्रेसवे पर फीस सामान्य नेशनल हाईवे (NH) की तुलना में 25% ज्यादा ली जाती है, क्योंकि ये एक्सेस‑कंट्रोल्ड कॉरिडोर तेज और आरामदायक यात्रा की सुविधा देते हैं. लेकिन अभी तक नियम यह था कि भले ही एक्सप्रेसवे पूरी तरह शुरू न हुआ हो और जितना भी हिस्सा चालू है, उस पर भी ज्यादा वाला टोल ही लिया जाता था. हालांकि, अब नए नियमों के बाद इस व्यवस्था में बदलाव किया गया है.
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