- MP सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों की 87,000 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों की फ्री रजिस्ट्री का फैसला किया है.
- MP सरकार 9,000 करोड़ रुपये के रजिस्ट्रेशन शुल्क व स्टांप ड्यूटी का पेमेंट करेगी, ताकि ग्रामीणों पर बोझ न हो.
- ड्रोन सर्वे के माध्यम से अब तक 49.5 लाख से अधिक संपत्तियों का सटीक सर्वेक्षण पूरा किया जा चुका है.
Madhya Pradesh Swamitva Yojana 2026: मध्य प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों को बड़ा तोहफा देते हुए 'स्वामित्व योजना' के तहत लगभग 87,000 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री कराने का फैसला किया है. इसके तहत करीब 9,000 करोड़ रुपये का भारीभरकम पंजीयन शुल्क और स्टांप ड्यूटी राज्य सरकार खुद वहन करेगी. अब तक प्रदेश में ड्रोन सर्वे के जरिए 49.52 लाख से अधिक संपत्तियों को चिह्नित किया जा चुका है.
मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए अपनी संपत्ति का कानूनी मालिकाना हक पाना अब बेहद आसान और पूरी तरह निःशुल्क हो गया है. राज्य सरकार स्वामित्व योजना के जरिए से ग्रामीण आबादी भूमि पर बने मकानों, दुकानों और भूखंडों की मुफ्त रजिस्ट्री करवा रही है. ग्रामीण नागरिकों को किसी भी प्रकार के आर्थिक बोझ से बचाने के लिए सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए लगभग 9,000 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी और पंजीयन शुल्क खुद चुकाने का निर्णय लिया है. सरकार इस राशि का भुगतान करने के लिए अगले बजट में प्रावधान कर रही है, ताकि वाणिज्यिक कर और पंजीयन विभाग को जरूरी फंड मिल सके.
49.5 लाख से अधिक संपत्तियों का ड्रोन सर्वे पूरा
राजस्व विभाग की देख रेख में चल रही इस महत्वकांक्षी योजना के तहत आधुनिक ड्रोन तकनीक का उपयोग करके ग्रामीण भूमि का सटीक सर्वेक्षण किया जा रहा है.
इसके जरिए अब तक पूरे प्रदेश में लगभग 49.5 लाख संपत्तियों का सर्वे पूरा किया जा चुका है. फिलहाल, राज्य के करीब 600 गांवों में ड्रोन सर्वे का काम तेजी से चल रहा है. इन गांवों का डेटा सामने आने के बाद पात्र संपत्तियों की कुल संख्या बढ़कर 55 लाख से 60 लाख के बीच पहुंचने का अनुमान है.
लाभार्थियों को एसएमएस से मिलेगी शुल्क की जानकारी
भले ही ग्रामीण नागरिकों को रजिस्ट्री के लिए एक भी पैसा नहीं देना पड़ रहा है, लेकिन पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सरकार एक अनोखी व्यवस्था चला रही है. इसके तहत प्रत्येक लाभार्थी के मोबाइल पर एसएमएस भेजकर यह जानकारी दी जा रही है कि अगर यह रजिस्ट्री वे खुद करवाते, तो उन्हें स्टांप ड्यूटी के रूप में कितनी बड़ी राशि चुकानी पड़ती. वर्तमान में राजस्व विभाग के पास करीब 3,800 करोड़ रुपये का प्रावधान है, जबकि 87,000 करोड़ रुपये की संपत्तियों पर कुल 9,000 करोड़ रुपये की स्टांप ड्यूटी बन रही है. ऐसे में बाकी राशि का भुगतान सरकार अगले बजट के जरिए सुनिश्चित करेगी.
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