Kisan Credit Card Scheme: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना के लिए नए और संशोधित दिशानिर्देश जारी किए हैं. इनका उद्देश्य खेती और इससे जुड़ी अन्य गतिविधियों के लिए एक ही सरल और स्पष्ट नियमों वाला ढांचा बनाना है. इस बदलाव का मतलब है कि किसानों को आसान और अधिक लचीला कर्ज (लोन) उपलब्ध कराना, KCC लोन को किसानों की नई जरूरतों के अनुसार बेहतर बनाना, खेती और उससे जुड़े सभी कामों के लिए कर्ज लेना और आसान करना आदि.
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किन–किन बैंकों पर ये नियम लागू होंगे?
- कॉमर्शियल बैंक
- स्मॉल फाइनेंस बैंक
- रीजनल रूरल बैंक (RRBs)
- ग्रामीण सहकारी बैंक
RBI ने KCC यानी किसान क्रेडिट कार्ड लोन के लिए एक सिंगल और आसान नियमों वाला ढांचा प्रस्तावित किया है. इसका मकसद है कि खेती और उससे जुड़ी सभी गतिविधियों के लिए एक ही तरह के नियम लागू हों, ताकि बैंक KCC योजना को और सरल तरीके से चला सकें और ज्यादा किसानों तक पहुंच बनाई जा सके. इसके अलावा किसानों में कन्फ्यूजन कम करने के लिए RBI ने पूरे देश में फसल सीजन को एक जैसा करने का सुझाव दिया है. कम अवधि वाली फसलें यानी 12 महीने का चक्र और लंबी अवधि वाली फसलें यानी 18 महीने का चक्र को शामिल किया गया है. इससे लोन देने और वापस लेने का समय पूरे देश में समान रहेगा.
KCC लोन की अवधि बढ़ाकर 6 साल करने का प्रस्तावसबसे बड़ा बदलाव यह है कि KCC लोन की अवधि अब 6 साल तक हो सकती है. यह खास तौर पर उन किसानों के लिए उपयोगी है, जो लंबी अवधि वाली फसलें उगाते हैं, क्योंकि उनकी फसल का चक्र लंबा होता है, आय आने में ज्यादा समय लगता है और नए नियमों से लोन चुकाना उनके लिए आसान हो जाएगा.
क्या कहते हैं नए नियमनए ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, किसानों को मिलने वाली KCC लोन सीमा यानी ड्रॉइंग लिमिट अब वास्तविक खेती लागत के आधार पर तय की जाएगी. हर फसल के लिए सरकार जो आधिकारिक लागत तय करती है, उसी के अनुसार किसान को लोन मिलेगा. इससे किसानों को कम पैसे मिलने की समस्या कम होगी.
नए ढांचे में KCC के पैसों का इस्तेमाल अब आधुनिक खेती की जरूरतों के लिए भी किया जा सकेगा. इसमें मिट्टी की जांच, मौसम की सही और समय पर जानकारी, ऑर्गेनिक खेती या अच्छी कृषि पद्धतियों के लिए आवश्यक प्रमाणपत्र और इन सभी को खेत के उपकरणों और देखभाल के लिए दिए जाने वाले अतिरिक्त 20% फंड में शामिल किया गया है.
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