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24 साल पुराने पत्रकार हत्याकांड में गुरमीत राम रहीम बरी, CBI को बड़ा झटका

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने 2002 के पत्रकार हत्याकांड में गुरमीत राम रहीम को बरी कर दिया, जबकि अन्य तीन दोषियों की उम्रकैद बरकरार रखी है.

24 साल पुराने पत्रकार हत्याकांड में गुरमीत राम रहीम बरी, CBI को बड़ा झटका
  • पंजाब और हरियाणा HC ने पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में राम रहीम को बरी कर दिया है.
  • राम रहीम को इस मामले में राहत मिली है लेकिन वह अन्य मामलों में अभी भी जेल में बंद है और सजा काट रहा है.
  • हाई कोर्ट ने मामले के अन्य तीन दोषियों कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी है.
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चंडीगढ़:

पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड मामले में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को बड़ी राहत मिली है. पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने इस मामले में दायर अपील को स्वीकार करते हुए उसे बरी कर दिया है. कोर्ट का यह फैसला CBI के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है. इस फैसले के बाद भी राम रहीम अभी जेल में ही रहेगा. क्योंकि ये राहत उसे सिर्फ एक केस में मिली है. जबकि वो और भी मामलों में सजा काट रहा है. 

हालांकि हाई कोर्ट ने मामले के अन्य तीन दोषियों की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी है. राम रहीम को पहले CBI अदालत ने दोषी ठहराया था, जिसके बाद यह मामला हाई कोर्ट में अपील के रूप में पहुंचा था. अदालत के इस फैसले को मामले में बड़ा मोड़ माना जा रहा है.

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CBI कोर्ट ने सुनाई थी सजा

दरअसल हाईकोर्ट ने इस मामले में तीन लोग कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल की सजा को बरकरार रखा है. 17 जनवरी 2019 को पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने सात साल पहले राम रहीम को सजा सुनाई थी.

आरोपियों ने सीबीआई की अदालत के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, इसके बाद ही हाईकोर्ट ने ये फैसला दिया. हाई कोर्ट ने इस मामले में डेरा प्रमुख के खिलाफ पर्याप्त सबूत न होने के आधार पर बरी करने का आदेश दिया है.

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2002 में पत्रकार को मारी गई थी गोली

मामला पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या से जुड़ा हुआ है, जिसने अपने समय में काफी सुर्खियां बटोरी थीं. छत्रपति ने अपने अखबार में डेरा से जुड़े कुछ गंभीर आरोपों को प्रकाशित किया था, जिसके बाद वर्ष 2002 में उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में व्यापक प्रतिक्रिया हुई थी और मामले की जांच बाद में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई थी.

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