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गांव-कस्बे में कैसे खोलें अपना मेडिकल स्टोर, जन औषधि केंद्रों में 5 लाख तक की मदद देती है सरकार, जानें पूरा डिटेल

कम बजट में खुद का मेडिकल स्टोर शुरू करने के लिए प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र एक बेहतरीन विकल्प है. मात्र 120 वर्ग फुट जगह, एक क्वालिफाइड फार्मासिस्ट और न्यूनतम प्रक्रिया के साथ कोई भी पुरुष या महिला इसे आसानी से शुरू कर सकता है.

गांव-कस्बे में कैसे खोलें अपना मेडिकल स्टोर, जन औषधि केंद्रों में 5 लाख तक की मदद देती है सरकार, जानें पूरा डिटेल
कम बजट में खोलें खुद का मेडिकल स्टोर
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  • प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र योजना के तहत कम बजट में मेडिकल स्टोर खोलकर स्वरोजगार शुरू किया जा सकता है.
  • जन औषधि केंद्र खोलने के लिए फार्मासिस्ट की डिग्री या डिप्लोमा और न्यूनतम 120 वर्ग फुट जगह जरूरी है.
  • राज्य औषधि नियंत्रण विभाग से मान्य ड्रग लाइसेंस होना जरूरी है और सामान्य आवेदकों को आवेदन शुल्क देना होता है.

PM Jan Aushadhi Kendra Online Registration Process: अगर आप कम बजट में खुद का मेडिकल स्टोर (Medical Store) खोलकर स्वरोजगार शुरू करना चाहते हैं, तो प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र (PMBJK) एक बेहतरीन मौका है. इसे पुरुष या महिला कोई भी खोल सकता है. मात्र 120 वर्ग फुट जगह, एक क्वालिफाइड फार्मासिस्ट और न्यूनतम प्रोसेस के साथ आप अपना केंद्र शुरू कर सकते हैं. इस योजना के तहत एससी, एसटी, महिलाओं और दिव्यांगों के लिए आवेदन शुल्क पूरी तरह से नि:शुल्क है. खास बात ये है जनऔष्धि संचालक को सरकार 5 लाख रुपये तक की सब्सिडी भी देती है. 

दरअसल, देश में जेनेरिक दवाओं की बढ़ती मांग और सरकार के प्रोत्साहन की वजह से यह बिजनेस मॉडल काफी फायदेमंद साबित हो रहा है. इस योजना की सबसे खास बात यह है कि इसे हर वर्ग का व्यक्ति शुरू कर सकता है. चाहे महिला हो, पुरुष हो, या किसी भी श्रेणी से आते हों. हालांकि, औषधि केंद्र कोई भी नहीं खोल सकता है इसे शुरू करने के लिए कुछ क्राइटेरिया को पूरा करना होता है, जिसकी जानकारी नीचे दी गई है. 

ये हैं जन औषधि केंद्र खोलने के लिए चार जरूरी चीजें

अगर आप जन औषधि केंद्र का लाइसेंस प्राप्त करना चाहते हैं, तो आपके पास  D.Pharma या B.Pharma में डिग्री या डिप्लोमा धारक फार्मासिस्ट होना जरूरी है, चाहे वह आप खुद हों या कोई नियुक्त फार्मासिस्ट.

  • केंद्र खोलने के लिए न्यूनतम 120 वर्ग फुट की जगह खुद की या किराए की होनी चाहिए.
  • राज्य औषधि नियंत्रण विभाग से जारी मान्य ड्रग लाइसेंस होना आवश्यक है.
  • सामान्य श्रेणी के आवेदकों के लिए 5,000 रुपये की नॉन रिफंडेबल आवेदन फीस तय की गई है.
  • SC, ST, महिला आवेदकों, दिव्यांगों और आकांक्षी जिलों के लिए यह एप्लिकेशन फीस बिल्कुल मुफ्त है.

ऐसे करें ऑनलाइन आवेदन 

  • अगर आपके पास ऊपर बताई गई चारों चीजें तैयार हैं, तो घर बैठे चार स्टेप्स को फॉलो कर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. 
  • अपने मोबाइल या लैपटॉप के ब्राउजर में आधिकारिक वेबसाइट janaushadhi.gov.in खोलें और होमपेज पर Apply for Kendra विकल्प पर क्लिक करें.
  • अपनी बेसिक डिटेल्स जैसे पूरा नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और राज्य दर्ज करके अपना रजिस्ट्रेशन पूरा करें.
  • सिस्टम में लॉगिन करने के बाद ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरें, उसमें अपनी जगह का विवरण, फार्मासिस्ट की जानकारी और जरूरी दस्तावेज अपलोड करें.
  • निर्धारित 5,000 रुपये की आवेदन फीस ऑनलाइन जमा करें और फॉर्म सबमिट कर दें.
  • फॉर्म सबमिट होने के बाद फार्मास्यूटिकल्स एंड मेडिकल डिवाइसेज ब्यूरो ऑफ इंडिया की ओर से आवेदन की समीक्षा की जाएगी और अप्रूवल मिलते ही जन औषधि केंद्र खोलने की अनुमति मिल जाएगी.

5 लाख की सब्सिडी भी देती है सरकार

प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र (PMBJK) की शुरुआत करने पर सरकार की ओर से आर्थिक मदद और कई तरह के प्रोत्साहन दिए जाते हैं. यह सहायता सीधे नकद सब्सिडी के रूप में न मिलकर मासिक लाभ और कुछ खास वर्गों के लिए एकमुश्त अतिरिक्त मदद के तौर पर दी जाती है, जो कुल मिलाकर 5 लाख रुपये तक हो सकती है. इस योजना के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता की पूरी जानकारी नीचे दी गई है.

मंथली इंसेंटिव

केंद्र संचालकों को हर महीने की जाने वाली दवाओं की कुल खरीद पर 20 प्रतिशत का इंसेंटिव मिलता है, जिसकी अधिकतम सीमा 20,000 रुपये प्रति माह तय की गई है. इसके अलावा संचालकों को दवाओं की एमआरपी पर 20 प्रतिशत कमीशन भी मिलता है.

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विशेष श्रेणियों के लिए 2 लाख रुपये की एकमुश्त सहायता

अगर कोई नया केंद्र किसी पात्र व्यक्ति या विशेष क्षेत्र के अंतर्गत खोला जाता है, तो सरकार की ओर से 2 लाख रुपये तक का अतिरिक्त रिफंड या पुनर्भुगतान दिया जाता है. ये योजना महिला उद्यमी, दिव्यांगजन, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पूर्व सैनिक के लिए है. इसके अलावा, कुछ विशेष क्षेत्र जैसे उत्तर पूर्वी राज्य, पर्वतीय या हिमालयी क्षेत्र, द्वीप समूह और नीति आयोग की ओर से चिन्हित आकांक्षी जिले के संचालकों को भी ये लाभ दिया जाता है. इस 2 लाख रुपये में से 50 लाख रुपये दुकान के इंटीरियर, फर्नीचर और फिक्सचर तैयार करवाने के लिए दिए जाते हैं. इसके आलावा 50,000 रुपये कंप्यूटर, प्रिंटर, स्कैनर और इंटरनेट जैसी जरूरी तकनीकी व्यवस्थाएं करने के लिए दिए जाते हैं. 

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