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ऑनलाइन ऑर्डर में 45 दिन से कम एक्सपायरी नहीं चलेगी, बुकिंग से पहले दिखेगी मैन्युफैक्चरिंग-एक्सपायरी डेट: FSSAI

क्विक कॉमर्स और ई कॉमर्स के इस दौर में मिनटों में आपके घर राशन पहुंच जाता है, लेकिन अक्सर ग्राहकों को यह पता नहीं चल पाता कि ऑनलाइन ऑर्डर किया गया सामान कितना पुराना है. जानिए FSSAI के नए प्रस्तावों और नियमों की पूरी जानकारी.

ऑनलाइन ऑर्डर में 45 दिन से कम एक्सपायरी नहीं चलेगी, बुकिंग से पहले दिखेगी मैन्युफैक्चरिंग-एक्सपायरी डेट: FSSAI
अब ऑनलाइन राशन खरीदने से पहले दिखेगी मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट.
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  • FSSAI ने ऑनलाइन खाद्य उत्पादों की मैन्युफैक्चरिंग डेट, एक्सपायरी डेट और बैच नंबर दिखाने के नियम कड़े किए हैं.
  • डार्क स्टोर्स में खाद्य पदार्थों की सही तापमान पर रखरखाव और क्लाउड किचन की असली लोकेशन ऑनलाइन दिखाना जरूरी.
  • अब ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स भ्रामक विज्ञापनों और गलत दावों के लिए सीधे जिम्मेदार होंगे.

Blinkit, Zepto, Swiggy Instamart और Amazon जैसी क्विक कॉमर्स व ई कॉमर्स कंपनियों से राशन या खाद्य उत्पाद मंगाने वाले ग्राहक अब बेफिक्र होकर कर सकेंगे खरीदारी. दरअसल, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के लिए नियमों को बेहद कड़ा करने जा रहा है. अब ग्राहकों को ऑनलाइन ऑर्डर सबमिट करने से पहले ही मेनुफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट के साथ ही बैच नंबर साफ तौर पर दिखानी होगी. इसके अलावा डार्क स्टोर्स, क्लाउड किचन की रियल लोकेशन, तस्वीरें और भ्रामक दावों को लेकर भी खाद्य नियामक ने नकेल कसने की पूरी तैयारी कर ली है.

FSSAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) राजित पुनहानी के मुताबिक, नियामक ने ई कॉमर्स व क्विक कॉमर्स कंपनियों के साथ विचार विमर्श की प्रक्रिया पूरी कर ली है और जल्द ही नए दिशा निर्देश लागू किए जाएंगे.

ऑर्डर करने से पहले दिखेगी ये 3 अहम जानकारियां

मौजूदा वक्त में ज्यादातर ऑनलाइन ऐप उत्पाद की केवल कुल शेल्फ लाइफ यानी बेस्ट बिफोर या यूज बाय बताते हैं, लेकिन यह नहीं दिखाते हैं कि पैकेट कब बना था और उसकी वास्तविक एक्सपायरी कब है. नए नियमों के तहत अब ऐप्स को ऑर्डर लेने से पहले ये जानकारी दिखानी होगी.

  1.  मैन्युफैक्चरिंग डेट: उत्पाद कब पैक हुआ था.
  2. एक्सपायरी डेट: उत्पाद कब तक सुरक्षित है.
  3.  बैच नंबर: उत्पाद की गुणवत्ता और ट्रैकिंग पहचान.

डार्क स्टोर और क्लाउड किचन पर बढ़ेगी निगरानी

FSSAI केवल डिलीवरी ऐप्स ही नहीं, बल्कि पीछे काम करने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर की भी सख्त जांच कर रहा है. इसके तहत डार्क स्टोर्स में रखे फ्रीजर, प्रिजर्वेशन तापमान और जमे हुए खाद्य पदार्थों के रखरखाव पर विशेष नजर रखी जा रही है. अब ग्राहकों को यह जानने का पूरा अधिकार होगा कि उनका खाना कहां पकायादिल्ली-यूपी में अक्टूबर और नवंबर में 4 दिन बंद रहेंगी शराब की दुकानें, देखें त्योहारों के हिसाब से ड्राई डे की पूरी लिस्ट जा रहा है. इसलिए क्लाउड किचन का सटीक पता और उसकी वास्तविक तस्वीरें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर शेयर करने के प्रावधान पर काम किए जा रहे हैं.

भ्रामक दावों पर अब प्लेटफॉर्म की भी तय होगी जवाबदेही

अब तक ई कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स यह तर्क देकर बच निकलते थे कि वे केवल विक्रेता और खरीदार के बीच के माध्यम मात्र हैं. हालांकि, FSSAI अब भ्रामक विज्ञापनों, गलत दावों और प्रतिबंधित खाद्य पदार्थों की बिक्री को लेकर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की सीधी जवाबदेही तय करने जा रहा है. पिछले एक साल में ई कॉमर्स कंपनियों, खाद्य निर्माताओं और रेस्टोरेंट्स पर FSSAI की कानूनी अभियोजन की कार्रवाई में 5 से 6 गुना तक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

पैकेट के आगे लगेगा रेड वार्निंग लेवल

खाद्य नियामक पैकेटबंद खाद्य पदार्थों पर फ्रंट ऑफ पैक वार्निंग लेबल लगाने की दिशा में भी कदम बढ़ा चुका है. इसके तहत पैकेज्ड फूड में चीनी , नमक और संतृप्त वसा की ज्यादा मात्रा को सामने की तरफ प्रमुखता से दिखाया जाएगा. FSSAI ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर पैकेट के सामने लाल रंग की चेतावनी लगाने का प्रस्ताव दिया है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले का इंतजार है.

डिलीवरी के समय कितनी लाइन होनी चाहिए?

साल 2024 में जारी FSSAI के निर्देशों के मुताबिक, ग्राहक के घर खाद्य उत्पाद डिलीवरी होते समय उसकी कुल शेल्फ लाइफ का कम से कम 30 प्रतिशत हिस्सा या एक्सपायरी से न्यूनतम 45 दिन पहले की अवधि शेष होनी चाहिए.

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