दिल्ली की सड़कों पर जल्द ही बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. राजधानी में स्ट्रीट लाइट व्यवस्था बदलने वाली है. इसके तहत अब सिर्फ लाइट लगाना ही नहीं, बल्कि उसे चालू रखना भी ठेकेदार की जिम्मेदारी होगी. आसान भाषा में कहें, तो अगर किसी इलाके की स्ट्रीट लाइट खराब होती है और उसे समय पर ठीक नहीं किया जाता है, तो ठेकेदार को भुगतान में कटौती झेलनी पड़ सकती है. दिल्ली सरकार ने स्ट्रीट लाइट्स के लिए 'नो परफॉर्मेंस, नो पेमेंट' मॉडल लागू करने का फैसला किया है. जितने घंटे लाइट खराब रहेगी, उसी के हिसाब से कंपनी पर जुर्माना लगाया जाएगा.
सरकार पहले ही करीब 96 हजार स्ट्रीट लाइट्स को स्मार्ट LED लाइट्स में बदलने की योजना को मंजूरी दे चुकी है. इस पूरे प्रोजेक्ट पर लगभग 473 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे.
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अब काम के हिसाब से मिलेगा भुगतान
नई व्यवस्था में ठेकेदारों को एक ही बार में भुगतान नहीं किया जाएगा. उन्हें हर महीने किस्तों में पैसा मिलेगा. अगर किसी इलाके में लाइट खराब रहती है, मरम्मत में देरी होती है, तो उस महीने की किस्त में कटौती की जा सकती है. आसान शब्दों में कहें तो काम नहीं, तो पैसा नहीं.
कंट्रोल रूम से होगी 24 घंटे निगरानीइस परियोजना के तहत सभी स्मार्ट LED लाइट्स को एक कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम से जोड़ा जाएगा. यह सिस्टम रियल टाइम में पूरे नेटवर्क पर नजर रखेगा. अभी तक किसी स्ट्रीट लाइट के खराब होने की जानकारी अक्सर लोगों की शिकायत के बाद मिलती थी. लेकिन नई व्यवस्था में लाइट खराब होते ही कंट्रोल रूम को इसकी जानकारी मिल जाएगी. इससे अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई करने में मदद मिलेगी और अंधेरे वाले हिस्सों की पहचान जल्दी हो सकेगी.
दिल्ली को क्यों है इसकी जरूरत?PWD के तहत आने वाली सड़कों पर करीब 96 हजार स्ट्रीट लाइट्स और 51 हजार से ज्यादा पोल लगे हैं. इनमें से कई लाइट्स पुरानी हो चुकी हैं. वहीं, कई बार खराब लाइट्स लंबे समय तक ठीक नहीं हो पातीं, जिससे सड़क सुरक्षा प्रभावित होती है. अब, नई तकनीक आने और निगरानी के पूरी तरह डिजिटल होने के बाद इस परेशानी के कम होने की उम्मीद है.
ये योजना करीब 1,400 किलोमीटर लंबी PWD सड़कों, फ्लाईओवर और अंडरपास को कवर करेगी. जहां जरूरत होगी, वहां नए पोल भी लगाए जाएंगे. ऐसे में बेहतर रोशनी से रात में सफर सुरक्षित होगा, दुर्घटनाओं का खतरा कम होगा और पैदल चलने वालों को भी फायदा मिलेगा.
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