दिल्ली में मॉनसून की पहली बारिश लोगों को गर्मी से राहत तो देती है, लेकिन इसके साथ जलभराव की चिंता भी बढ़ जाती है. पिछले कुछ सालों में भारी बारिश के दौरान कई सड़कें पानी में डूब गई थीं और लोगों को घंटों ट्रैफिक जाम में फंसना पड़ा था. कहीं सड़कें तालाब जैसी दिखीं तो कहीं बाढ़ जैसे हालात बन गए थे. इस बार ऐसी परेशानी दोबारा न हो, इसके लिए दिल्ली सरकार ने पहले से ही पूरी तैयारी शुरू कर दी है. सरकार ने 'फ्लड कंट्रोल ऑर्डर-2026' लागू किया है, जिसके तहत ग्राउंड लेवल से लेकर कंट्रोल रूम तक कई इंतजाम किए गए हैं ताकि भारी बारिश के दौरान लोगों को कम से कम परेशानी हो.
ग्राउंड लेवल पर बड़े इंतजाम
बारिश का पानी सड़कों पर जमा न हो, इसके लिए इस बार बड़े स्तर पर काम किया गया है. दिल्ली के 77 बड़े नालों की पूरी सफाई कराई गई है. नालों की गहराई बढ़ाने के लिए उनमें से 30 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा गाद निकाली गई है. इसके अलावा पानी निकालने के लिए 243 से ज्यादा हैवी पंप तैयार रखे गए हैं. किसी भी इमरजेंसी स्थिति से निपटने के लिए 41 नावें भी रिजर्व रखी गई हैं. वहीं किराड़ी, मुंडका और बुराड़ी जैसे संवेदनशील इलाकों पर खास नजर रखी जा रही है.
यमुना के जलस्तर पर रहेगी हर पल नजर
बाढ़ के खतरे को कम करने के लिए यमुना नदी के जलस्तर पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जाएगी. इसके लिए थ्री-टियर अलर्ट सिस्टम एक्टिव किया गया है. एक सेंट्रल फ्लड कंट्रोल रूम भी बनाया गया है, जहां से लगातार हालात पर नजर रखी जाएगी. अगर कहीं खतरे की स्थिति बनती है, तो लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए NDRF की टीमें और रेस्क्यू बोट्स पहले से स्टैंडबाय पर रहेंगी.
दिल्ली सरकार ने मॉनसून के दौरान जलभराव और बाढ़ से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं। Flood Control Order-2026 के तहत Three-Tier Alert System, Central Flood Control Room, Rescue Teams, Boats और Pumping sets को पूरी तरह तैयार रखा गया है। pic.twitter.com/lCQk2E1xX2
— Delhi Government (@DelhiGovDigital) June 25, 2026
अब तय होगी हर अधिकारी की जिम्मेदारी
हर साल जलभराव के बाद अलग-अलग विभागों के बीच जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठते थे. इस बार सरकार ने इसकी भी तैयारी कर ली है. जिन जगहों पर पहले जलभराव की समस्या सामने आती रही है, वहां एक-एक नोडल ऑफिसर की जिम्मेदारी तय की गई है. अगर किसी इलाके में पानी भरता है, तो संबंधित अधिकारी से सीधे जवाब मांगा जाएगा. सरकार को उम्मीद है कि इससे लापरवाही कम होगी और लोगों को राहत मिलेगी.
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