दिल्ली में 598.60 करोड़ रुपये की लागत से नया वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तैयार हो गया है.इससे दिल्ली की 22 लाख आबादी को फायदा मिलेगा. चंद्रावल में 105 MGD क्षमता का उन्नत वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनकर तैयार हुआ है. यह पुराने चंद्रावल-I और चंद्रावल-II जलशोधन संयंत्र की जगह लेगा. इससे सदर बाजार, बल्लीमारान, चांदनी चौक, मटिया महल, करोल बाग समेत पुरानी दिल्ली के इलाकों में पानी की आपूर्ति और बेहतर होगी.दिल्ली जल बोर्ड के अनुसार, यह महारानी बाग में बन रहे दिल्ली के सबसे बड़े सीवेज पंपिंग स्टेशनों में से एक है. इससे साउथ और सेंट्रल दिल्ली के करीब 20 लाख लोगों को सीधा फायदा होगा.
महारानी बाग सीवेज पंपिंग स्टेशन की सौगात
दिल्ली जल बोर्ड (DJB) ने महारानी बाग में करीब 363.68 मिलियन लीटर प्रतिदिन (MLD) क्षमता का एक सीवेज पंपिंग स्टेशन तैयार किया है. यह पंपिंग स्टेशन दिल्ली के घनी आबादी वाले रिहायशी और पुराने इलाकों की सीवरेज सिस्टम को पूरी तरह बदलेगा. पुरानी दिल्ली में लाल किला, महारानी बाग, फ्रेंड्स कॉलोनी, न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी जैसे इलाकों की जलापूर्ति सुधरेगी. इस सीवेज पंपिंग स्टेशन का ज्यादातर सिविल और मैकेनिकल कंस्ट्रक्शन पूरा हो चुका है.इसके आखिरी दौर के तकनीकी ट्रायल हो रहे हैं. इस पंपिंग स्टेशन को पूरी क्षमता के साथ चालू किया जाएगा.
यमुना को प्रदूषण मुक्त बनाने का अभियान
दिल्ली की यह परियोजना सिर्फ सीवरेज सिस्टम को सुधारने का नहीं है. यह यमुना सफाई अभियान का भी हिस्सा है. इससे सीधे यमुना में गिरने वाले कचरे पर रोक लगेगी.महारानी बाग और करीब के बड़े नालों का अशोधित सीवेज के गंदे पानी को पंपिंग स्टेशन से सीधे नदी में गिरने से रोका जाएगा. इस गंदे पानी को पंपिंग कर ओखला जैसे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में भेजा जाएगा. इस जल को पूरी तरह साफ करके यमुना में छोड़ा जाएगा. इससे यमुना नदी में प्रदूषण का लेवल काफी कम हो जाएगा.
महारानी बाग सीवेज पंपिंग स्टेशन पर फोकस
महारानी बाग सीवेज पंपिंग स्टेशन और उससे जुड़े सीवर नेटवर्क, ड्रेनेज टैपिंग पर 60 से 65 करोड़ का खर्च आया है. वहीं जंगपुरा के किलोकरी में 60 MGD क्षमता के सीवेज पंपिंग स्टेशन का खर्च 60 करोड़ है. महारानी बाग सीवेज पंपिंग स्टेशन मुख्यतया बारापुला नाला और महारानी बाग नाले के गंदे पानी को सीधे यमुना नदी में जाने से रोकेगा.
ओखला, राजघाट और यमुना विहार में भी काम
ओखला में 564 MLD शोधन क्षमता का संयंत्र दिल्ली गेट STP 15 MGD (पुराने 2.2 MGD की जगह नया) राजघाट व पुरानी दिल्ली के नालों का पानी सीधे यमुना में गिरने से रोकना
निलोठी संयंत्र को 40 से बढ़ाकर 60 MGD किया जा रहा है. पप्पनकलां से द्वारका और आसपास के इलाकों का सीवेज शोधन होगा. कोंडली,जागृति विहार से पूर्वी दिल्ली के सीवेज को ट्रीटमेंट में फायदा मिलेगा. यमुना विहार एसटीपी को अपग्रेड कर शाहदरा ड्रेन और उत्तर-पूर्वी दिल्ली की सीवेज शोधन क्षमता बढ़ाई जाएगी. छावला और नजफगढ़ का संयंत्र भी नजफगढ़ नाले के प्रदूषण को रोकेगा. 35 से 40 नए छोटे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट कच्ची कॉलोनियों और गांवों के किनारे बन रहे हैं. यमुना में गिरने वाले 22 बड़े नालों में से नजफगढ़ नाला, सप्लीमेंट्री नाला, शाहदरा नाला और बारापुला नाला अकेले 70-80 फीसदी प्रदूषण फैलाते हैं.
यमुना सफाई का अभियान
दिल्ली में रोजाना पैदा होने वाले लगभग 790 से 1000 मिलियन गैलन प्रतिदिन सीवेज (MGD) बिना शोधन के यमुना में गिरता है. इसे रोकने के लिए केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली जल बोर्ड करीब 9 हजार करोड़ की परियोजनाओं पर काम कर रहा है. वर्ष 2028 तक सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता को बढ़ाकर 1500 MGD किया जाएगा.
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