- दिल्ली में कूड़ा उठाने के लिए MCD फिर से शुल्क मांग सकती है.
- MCD कॉलोनी की कैटेगरी के आधार पर दो-स्लैब वाला स्ट्रक्चर बना सकता है
- MCD कचरे के मैनेजमेंट के लिए इंदौर मॉडल पर विचार कर रहा है.
दिल्ली के घरों से म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफ दिल्ली (MCD) कूड़ा उठाने के लिए फिर से पैसे मांग सकती है, क्योंकि सिविक बॉडी ने यूज़र चार्ज की समीक्षा के लिए एक कमेटी बनाई है. अभी तक इस बात पर कोई फैसला नहीं हुआ है कि लोगों को कितना पैसा देना पड़ सकता है या चार्ज तय करने का फॉर्मूला क्या होगा. लेकिन माना जा रहा है कि यह 50 से 200 रुपये तक चुकाने हो सकते हैं. MCD के एक अधिकारी ने बताया कि एडिशनल म्युनिसिपल कमिश्नर की अध्यक्षता वाली इस कमेटी में एनवायरनमेंट मैनेजमेंट सर्विसेज़ डिपार्टमेंट (DEMS), लॉ और फ़ाइनेंस डिपार्टमेंट के प्रतिनिधि शामिल हैं. इसे म्युनिसिपल कमिश्नर को अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए तीन महीने का समय दिया गया है.
दिल्ली के घरों को कितना पैसा देना पड़ सकता है?
विचार-विमर्श किए जा रहे विकल्पों में कॉलोनी की कैटेगरी के आधार पर दो-स्लैब वाला स्ट्रक्चर शामिल है - एक ग्रुप में A से D और दूसरे में E से H कैटेगरी. जांच किए जा रहे एक प्रस्ताव के तहत, निचली कैटेगरी स्लैब वाले घरों से ऊंची स्लैब वाली कैटेगरी के घरों पर लगने वाले चार्ज का आधा हिस्सा लिया जा सकता है. हालांकि, अधिकारियों ने ज़ोर देकर कहा कि न तो दरें और न ही फॉर्मूला अभी तय किया गया है.
MCD की DEMS कमेटी के चेयरमैन संदीप कपूर ने कहा कि इस बारे में बात करना अभी जल्दबाजी होगी कि लोगों को आखिरकार कितना पैसा देना पड़ सकता है. कपूर ने कहा, यह अभी सिर्फ चर्चा के स्टेज पर है; अभी तक कुछ भी तय नहीं हुआ है. उन्होंने यह भी कहा कि यह मान लेना सही नहीं होगा कि दिल्ली की मौजूदा A-से-H प्रॉपर्टी टैक्स कैटेगरी ही कूड़ा उठाने की फीस का आधार बनेगी.
कपूर ने कहा कि शहर के सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की ज़्यादा लागत को देखते हुए यूज़र चार्ज को सही ठहराया जा सकता है, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि MCD को पहले यह पक्का करना होगा कि लोगों को भरोसेमंद सर्विस मिले. अगर आप जनता से पैसे ले रहे हैं, तो आपको उन्हें सही सर्विस भी देनी होगी.
पहले घर कितना पैसा देते थे?
इसके लिए पहले का एक बेंचमार्क मौजूद है. सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट बाय-लॉज़ के तहत, 50 स्क्वायर मीटर तक के घरों से हर महीने 50 रुपये लिए जाते थे. 50 वर्ग मीटर से ज़्यादा और 200 वर्ग मीटर तक के घरों के लिए 100 रुपये का शुल्क तय था, जबकि 200 वर्ग मीटर से बड़े घरों के लिए यह शुल्क 200 रुपये प्रति महीना था.
ये दरें सिर्फ पुराने SDMC इलाके के लिए थीं और एकीकृत MCD के लिए मौजूदा टैरिफ नहीं हैं. पुराने सिस्टम में शुल्क में हर साल 5% की बढ़ोतरी, समय से पहले भुगतान पर छूट, देर से भुगतान पर सरचार्ज और बकाया राशि की टैक्स एरियर के तौर पर वसूली का प्रावधान भी था. इनमें से कोई प्रावधान फिर से लागू होगा या नहीं, यह नई पॉलिसी पर निर्भर करेगा.
पिछले साल कचरा शुल्क का क्या हुआ?
MCD ने अप्रैल 2025 में सालाना प्रॉपर्टी टैक्स के साथ कचरा यूज़र चार्ज वसूलना शुरू किया. इस कदम का विरोध हुआ, जिसके बाद MCD हाउस ने इस शुल्क को रोकने और इसकी समीक्षा करने की मांग की. 1 जून से प्रॉपर्टी-टैक्स पोर्टल पर कचरा शुल्क का भुगतान वैकल्पिक कर दिया गया. MCD के एक अधिकारी ने बताया कि जब शुल्क का भुगतान अनिवार्य था, तब कॉर्पोरेशन ने लगभग डेढ़ महीने में करीब 20 करोड़ रुपये जमा किए. नई बनी कमेटी अब इस बात की जांच करेगी कि भविष्य में यूज़र-फीस सिस्टम कैसा होना चाहिए, और फिर कोई नया फैसला लिया जाएगा.
अगर लोग भुगतान करते हैं तो MCD क्या सुविधा देगी?
घरों के लिए, सेवा की गुणवत्ता उतनी ही महत्वपूर्ण हो सकती है जितनी कि ली जाने वाली राशि. कपूर ने कहा कि दिल्ली में अभी भी पूरे शहर में एक जैसा डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन सिस्टम नहीं है, इसलिए शुल्क लगाने पर कोई भी तत्काल चर्चा जल्दबाजी होगी. कचरा प्रबंधन के पुराने नियमों में सेवा के विस्तृत मानक तय किए गए थे. उनमें हर घर से रोज़ाना डोर-टू-डोर कलेक्शन की व्यवस्था थी, जिसमें झुग्गी-बस्तियां और अनौपचारिक बस्तियां भी शामिल थीं.
कलेक्शन करने वाली गाड़ियों को तय रूट और समय का पालन करना था, और उनके शेड्यूल को मोहल्लों में प्रदर्शित करने और ऑनलाइन प्रकाशित करने की व्यवस्था थी ताकि निवासियों को पता चल सके कि गाड़ी कब आएगी. इस सिस्टम में सभी सड़कों और गलियों को शामिल करने की भी उम्मीद थी, और छुट्टियों सहित हर दिन कलेक्शन और ट्रांसपोर्टेशन जारी रहना था.
एक अधिकारी ने बताया कि वर्तमान में, MCD सभी 12 जोन में कचरा कलेक्शन और ट्रांसपोर्टेशन का काम आउटसोर्स करती है. ठेकेदारों को 'टिपिंग-फीस' मैकेनिज्म के ज़रिए भुगतान किया जाता है. अधिकारी के अनुसार, कॉर्पोरेशन ने हर जोन में कचरा उठाने वाली लगभग 20 गाड़ियां भी तैनात की हैं.
सिविक बॉडी के सामने एक और मुद्दा अनौपचारिक कचरा बीनने वालों की भूमिका का है, जिन्हें दिल्ली के कई घर पहले से ही घर-घर से कचरा उठाने के लिए अलग से भुगतान करते हैं. पुराने नियमों में ऐसे कर्मचारियों को म्युनिसिपल कचरा प्रबंधन सिस्टम में शामिल करने की योजना थी.
कचरा शुल्क का मुद्दा फिर से क्यों उठा है?
यह समीक्षा ऐसे समय में हो रही है जब कचरा प्रबंधन का नया राष्ट्रीय ढांचा लागू हो रहा है. सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2026, 1 अप्रैल से लागू हो गए हैं, जिन्होंने 2016 के नियमों की जगह ली है. ये नियम शहरी स्थानीय निकायों को अपने उप-नियमों के ज़रिए कचरा पैदा करने वालों से यूज़र फ़ीस तय करने और उसे वसूलने की इजाज़त देते हैं. इन नियमों के तहत स्थानीय निकायों को 31 मार्च, 2027 तक नए प्रावधानों को शामिल करते हुए उप-नियम बनाने होंगे. साथ ही, इनमें अलग-अलग किए गए कचरे को घर-घर जाकर इकट्ठा करना भी ज़रूरी है.
यह फ़्रेमवर्क कचरे को उसके स्रोत पर ही चार श्रेणियों में अलग-अलग करने की व्यवस्था लागू करता है - गीला कचरा, सूखा कचरा, सैनिटरी कचरा और विशेष देखभाल वाला कचरा.
MCD इंदौर मॉडल पर विचार कर रहा है
MCD यह भी देख रहा है कि दूसरे शहर म्युनिसिपल कचरे का मैनेजमेंट कैसे करते हैं. कपूर ने कहा कि कॉर्पोरेशन इंदौर मॉडल की जांच कर रहा है, खासकर कचरे को सोर्स पर ही अलग करने और लोगों की भागीदारी पर उसके ज़ोर को. MCD ने हाल ही में इंदौर के मेयर के साथ एक विचार-मंथन सत्र आयोजित किया और बाद में शहर के अधिकारियों से बातचीत की. कॉर्पोरेशन अब स्कूलों, कॉलेजों, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन और मार्केट एसोसिएशन के लिए जागरूकता और ट्रेनिंग प्रोग्राम तैयार कर रहा है.
सोर्स पर कचरा अलग करने और नागरिकों की भागीदारी पर केंद्रित पायलट प्रोजेक्ट्स के लिए वेस्ट, सेंट्रल और साउथ जोन पर विचार किया जा रहा है. ट्रेनिंग मटीरियल पर तैयारी का काम शुरू हो गया है, और MCD अपने मौजूदा कर्मचारियों के साथ इस प्रोग्राम को चलाने की योजना बना रहा है.
दिल्ली के निवासियों के लिए तीन सवाल अभी भी बने हुए हैं. क्या कचरा यूज़र चार्ज फिर से अनिवार्य हो जाएगा? परिवारों को कितना भुगतान करना होगा? और इसके बदले MCD किस स्तर की डोरस्टेप सर्विस देगा? अब कमेटी के पास आगे का रास्ता सुझाने के लिए तीन महीने का समय है.
यह भी पढ़ेंः दिल्ली की 11 हजार कच्ची कॉलोनियों के 45 लाख लोगों को तोहफा, प्रॉपर्टी को पक्का कराने में 75 फीसदी छूट, जानें कैसे
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं