दिल्ली में जब भी बारिश होती है तो किराड़ी इलाका सीवर के पानी में डूब जाता है. इस संकट से निपटने के लिए 263 करोड़ की ड्रेन योजना को मंजूरी दी गई है. किराड़ी में ये नाला बनने से रोहिणी, सुल्तानपुरी, नांगलोई से लेकर मुंडका, मंगोलपुरी तक तस्वीर बदलेगी. 100 से अधिक कच्ची कॉलोनियों को सीवर, कीचड़ और जलभराव के मुश्किल हालातों का सामना नहीं करना पड़ेगा. किराड़ी में करीब 100 से अधिक कच्ची कॉलोनियां हैं, जिसमें किराड़ी सुलेमान नगर, प्रेम नगर, करण विहार, मुबारकपुर जैसी कालोनी शामिल हैं. पूर्वांचल, बिहार, उत्तर प्रदेश और हरियाणा से आकर बसे कमजोर वर्ग के कामकाजी लोग यहां रहते हैं. यहां बड़े पैमाने पर छोटी घरेलू इंडस्ट्री, कपड़े और जूते के कारखाने और रिसाइकलिंग सेंटर हैं. दिल्ली की बड़ी मंडियों और औद्योगिक क्षेत्रों जैसे मुंडका और बवाना का लेबर फोर्स भी इसी किरारी रहता है.
कच्ची कॉलोनियों की तस्वीर बदलेगी
किराड़ी विधानसभा क्षेत्र दिल्ली के उत्तर-पश्चिम जिले का हिस्सा है. ये रोहिणी सेक्टर-20, 21, सुल्तानपुरी, नांगलोई और मुंडका के बीच घिरा है. रिंग रोड या आउटर रिंग रोड से रोहिणी की ओर जाएंगे तो पीरागढ़ी और मंगोलपुरी के ठीक आगे बढ़ते ही किरारी की घनी आबादी वाली कच्ची कालोनियां शुरू हो जाती हैं. किराड़ी का नजदीकी मेट्रो स्टेशन दिल्ली मेट्रो की रेड लाइन का रिठाला स्टेशन है. जबकि ग्रीन लाइन पर नांगलोई और मुंडका मेट्रो स्टेशन पड़ता है. इसके ठीक बगल से दिल्ली-रोहतक रेलवे लाइन गुजरती है. मंगोलपुरी और मुंडका हॉल्ट नजदीकी रेलवे स्टेशन हैं, लेकिन नाले के कारण लोग यहां आना नहीं चाहते. रोहतक रोड और आउटर रिंग रोड के साथ पीरागढ़ी चौक बेहद नजदीक है, जो दिल्ली के बॉर्डर एरिया को जोड़ती है.
सीवर के गंदा पानी से बिगड़ते हैं हालात
सीवर के साथ बारिश का गंदा पानी गलियों में भर जाता है, घरों में घुस जाता है. लोगों को गंदे पानी से होकर स्कूलों, दफ्तरों और बाजारों तक जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है. कई इलाकों में तो बारिश रुकने के बाद भी यह समस्या बनी रहती है. लोगों को सीवर के पानी से भरी सड़कों पर चलने के लिए लंबे रबर के जूते का इस्तेमाल करना पड़ता है. जलभराव के कारण बच्चों की स्कूल की पढ़ाई रुक जाती है. स्थानीय दुकानों का कारोबार भी प्रभावित होता है.
मुख्य नाला परियोजना को मंजूरी
दिल्ली सरकार की 263.45 करोड़ की मुख्य नाला परियोजना जल निकासी की क्षमता को बढ़ाकर किरारी की इस पुरानी जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान देगी. रेलवे लाइन के साथ मुंडका हॉल्ट से सप्लीमेंट्री ड्रेन तक 4.5 किलोमीटर लंबा ये नाला बनेगा. इसकी जल निकासी क्षमता 760 क्यूसेक होगी. यह नाला किरारी की लगभग 70 कॉलोनियों के लिए पानी निकासी का मुख्य जरिया बनेगा. साथ ही मुंडका, बवाना और नांगलोई जाट के कुछ हिस्सों को भी फायदा पहुंचाएगा.
मौजूदा नाला जरूरत के मुकाबले बेहद छोटा
किराड़ी क्षेत्र में बारिश के दौरान 1193 क्यूसेक पानी का बहाव होता है. जबकि यहां के किरारी सुलेमान नगर नाले की क्षमता सिर्फ 88 क्यूसेक ही है. दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) की ट्रंक ड्रेन की क्षमता 433 क्यूसेक है. रेलवे लाइन वाला नया नाला इस नेटवर्क में 760 क्यूसेक की क्षमता और जोड़ देगा. किरारी में 100 से अधिक ऐसी अनधिकृत कॉलोनियां हैं, जहां सीवर लाइन ही नहीं है.
किराड़ी परियोजना की लागत बढ़ी
किराड़ी परियोजना की लागत पहले 220.93 करोड़ थी, लेकिन अब दिल्ली सरकार ने 42.5 करोड़ रुपये बढ़ाकर 263.45 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं. यह नाला मुंडका हॉल्ट के पास से शुरू होकर करीब 4.48 किलोमीटर की दूरी तय कर सप्लीमेंट्री ड्रेन में जाकर मिलेगा. इस पूरे रास्ते में पानी के बहाव के डिजाइन के आधार पर नाले की चौड़ाई और गहराई अलग-अलग होगी. इस परियोजना को दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.
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