- बांस की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए बिहार सरकार की योजना.
- ग्रीन गोल्ड योजना के तहत मिलता है 36000 रुपये की सब्सिडी.
- किसानों को बांस की खेती के साथ कारीगरों को ट्रेनिंग देती है.
पारंपरिक फसलों जैसे धान, गेहूं या मक्का के अलावा किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए बिहार सरकार ने एक अहम कदम उठाया है. राज्य सरकार द्वारा राष्ट्रीय बांस मिशन (National Bamboo Mission) के तहत बांस जिसे 'ग्रीन गोल्ड' भी कहा जाता है, इसकी खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है. सरकार की इस योजना के तहत पात्र किसानों को प्रति हेक्टेयर 36,000 रुपये तक का सब्सिडी दिया जा रहा है.
बिहार सरकार द्वारा इस योजना को सहरसा, सिवान, बांका, बेगूसराय, पूर्णिया, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर समेत कुल 21 चयनित जिलों में इस योजना को प्रभावी रूप से लागू किया गया है.
क्या है ग्रीन गोल्ड योजना की शर्तें
योजना के तहत बांस की खेती करने वाले किसानों को प्रति हेक्टेयर 36,000 रुपये तक की आर्थिक मदद दी जाती है. इस योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों के पास न्यूनतम 10 डिसमिल और अधिकतम 50 डिसमिल तक जमीन होनी चाहिए. किसान चाहें तो 5 साल की लीज पर भी जमीन ले सकते हैं. किसान इसी तय सीमा के भीतर बांस की खेती कर योजना के तहत सब्सिडी का लाभ ले सकते हैं.
किसानों और कारीगरों के लिए ट्रेनिंग का प्रावधान
बांस की खेती और इसके वैज्ञानिक तरीकों को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग द्वारा फिल्ड इनचार्ज, प्रखंड उद्यान अधिकारियों, कृषि समन्वयकों और किसान सलाहकारों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा. बांस से टोकरी, सजावटी सामान और अन्य उत्पाद बनाने वाले स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को भी प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि वे आधुनिक तकनीक से सामान तैयार कर बाजार में बेच सकें और अपनी आय बढ़ा सकें.
सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक खेती के साथ-साथ बांस आधारित उद्योगों और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है. इच्छुक किसान अपने नजदीकी कृषि विभाग या उद्यान कार्यालय में संपर्क कर आवेदन प्रक्रिया की पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.
यह भी पढ़ें | बिहार के ढाई लाख किसानों के अकाउंट में CM सम्राट चौधरी ने भेजे पैसे, चेक करें स्टेटस, जानें बाकी को कब मिलेगा
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं