विज्ञापन

पोते-पोतियों से ज्यादा दादा-दादी चला रहे फोन! आंखों की रोशनी के साथ याददाश्त पर भी पड़ रहा बुरा असर

ज्यादा मोबाइल इस्तेमाल करने से नींद खराब हो सकती है, शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है और चिंता (एंग्जायटी) बढ़ सकती है.

पोते-पोतियों से ज्यादा दादा-दादी चला रहे फोन! आंखों की रोशनी के साथ याददाश्त पर भी पड़ रहा बुरा असर

अब तक जब भी फोन एडिक्शन की बात होती थी, तो बच्चों और यंग जनरेशन को ही जिम्मेदार ठहराया जाता था. लेकिन अब रिसर्च यह बता रही है कि यह समस्या सिर्फ Gen Z तक सीमित नहीं रही. 50, 60 या उससे अधिक उम्र के लोग भी घंटों तक मोबाइल, टैबलेट और टीवी पर समय बिता रहे हैं. कई लोग देर रात तक सोशल मीडिया स्क्रॉल करते रहते हैं या वीडियो देखते रहते हैं, जिससे उनकी दिनचर्या और नींद दोनों प्रभावित हो रही हैं.

रिपोर्ट्स में सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई

The Washington Post की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 10 सालों में बुजुर्गों के बीच स्क्रीन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है. 65 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में सोशल मीडिया का उपयोग 2010 के बाद काफी बढ़ा है. वहीं, सर्वे बताते हैं कि 50 साल से ऊपर के लोग हर हफ्ते कई घंटे डिजिटल डिवाइस पर बिताते हैं. कई परिवारों ने बताया कि अब उनके माता-पिता और दादा-दादी भी परिवार के समय में फेसबुक देखते हैं, यूट्यूब वीडियो देखते हैं या न्यूज ऐप्स पढ़ते रहते हैं, जो पहले सिर्फ युवाओं में देखा जाता था.

65 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के पास अब टैबलेट, लैपटॉप और स्मार्ट टीवी जैसे डिवाइस ज्यादा हैं. जब टीवी, मोबाइल और कंप्यूटर का कुल समय जोड़ा जाता है, तो कई बार बुजुर्ग युवा लोगों से भी ज्यादा समय स्क्रीन के सामने बिताते हैं. इसकी एक बड़ी वजह यह है कि आज के बुजुर्ग टेक्नोलॉजी से ज्यादा परिचित हैं और उनके पास ज्यादा खाली समय भी होता है.

Latest and Breaking News on NDTV

बढ़ता स्क्रीन टाइम सिर्फ आदत नहीं, बल्कि एक बड़ी हेल्थ समस्या बन सकता है. रिसर्च के अनुसार, ज्यादा मोबाइल इस्तेमाल करने से नींद खराब हो सकती है, शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है और चिंता (एंग्जायटी) बढ़ सकती है. 2022 में साउथ कोरिया में हुई एक स्टडी में पाया गया कि 60–69 साल के लगभग 15% लोग फोन एडिक्शन के खतरे में हैं. इसके अलावा, ज्यादा स्क्रीन टाइम का संबंध मोटापे और कम फिजिकल एक्टिविटी से भी जोड़ा गया है.

यूके के मीडिया रेगुलेटर Ofcom के आंकड़े बताते हैं कि बुजुर्ग रोज कई घंटे स्क्रीन पर बिताते हैं. वहीं, स्टैनफोर्ड के अर्थशास्त्री Hunt Allcott की रिसर्च के अनुसार, फेसबुक का कम इस्तेमाल करने से मानसिक स्वास्थ्य में सुधार देखा गया, खासकर बुजुर्गों में.

डूमस्क्रोलिंग क्यों बन रही है आदत?

बुजुर्गों में स्क्रीन की लत बढ़ने की एक बड़ी वजह यह भी है कि उनके पास समय ज्यादा होता है और कोई रोक-टोक नहीं होती. जहां बच्चों के लिए स्कूल और माता-पिता की सीमाएं होती हैं, वहीं, रिटायर लोगों के पास ज्यादा आजादी होती है. यही कारण है कि वे घंटों तक न्यूज पढ़ते रहते हैं, लगातार वीडियो देखते रहते हैं या नकारात्मक खबरों में उलझे रहते हैं, बिना यह महसूस किए कि कितना समय बीत गया.

वहीं, रिसर्च यह नहीं कहती कि मोबाइल या स्क्रीन पूरी तरह खराब है. दरअसल, यह बुजुर्गों के लिए कई फायदे भी देती है. इससे वे अपने परिवार से जुड़े रहते हैं, अकेलापन कम होता है और उनका दिमाग एक्टिव रहता है. लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब इसका इस्तेमाल जरूरत से ज्यादा होने लगता है.

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com