वर्ल्ड बॉक्सिंग के पूर्व अध्यक्ष बोरिस वैन डेर वोर्स्ट ने इस बात पर जोर दिया है कि बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया में स्थिरता और निरंतरता बनी रहनी चाहिए, ताकि इस खेल में हाल ही में हुई प्रगति को कायम रखा जा सके. फेडरेशन के भीतर आंतरिक मतभेदों की खबरों के बीच, वैन डेर वोर्स्ट ने BFI अध्यक्ष अजय सिंह के नेतृत्व का समर्थन किया. उन्होंने अजय सिंह और BFI के CEO अरुण मलिक की तारीफ की, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बड़ी भारतीय टीमों को भेजने और एथलीटों के लिए एक सहायक माहौल तैयार करने में अहम योगदान दिया है.
बोरिस वान डर वोर्स्ट कहते हैं कि उनका बॉक्सिंग वाला दिल चार साल पहले पहली बार भारत आते ही इस देश पर आ गया. ग्रासरूट जिम में उन्हें जो मिला, वो था जुनून, अनुशासन और एक भूख जो और कहीं कम ही दिखती है। वो इस टैलेंट को "कच्चे हीरे" कहते हैं। तभी उन्होंने कहा था कि कुछ ही सालों में भारत इस खेल की अगली महाशक्ति बन जाएगा. वर्ल्ड बॉक्सिंग के पूर्व अध्यक्ष एक अलग संदेश लेकर राजधानी में वापस आए हैं. उन्होंने खेल मंत्री और खेल सचिव से मिलकर कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स में मेडल की बौछार के लिए बधाई दी.
उनका तर्क है कि एशियन गेम्स जीतना ज्यादा मायने रखता है, क्योंकि ओलंपिक बॉक्सिंग के ज्यादातर बड़े देश एशिया में हैं, और पेरिस में बॉक्सिंग के करीब 75 से 80 फीसदी मेडल एशियाई देशों के पास गए. वो कहते हैं कि आज दुनिया का कोई भी बॉक्सर रिंग के पार भारतीय को देखकर घबरा जाता है. बॉक्सरों और फेडरेशन की कड़ी मेहनत ने यह डर पैदा किया है.
वो जानते हैं कि यह मेहनत किस पर टिकी है. एक साल पहले, वो बताते हैं, उन्होंने हरियाणा का दौरा किया और उस एक राज्य में पूरे अमेरिका से ज्यादा स्किल्ड, कॉम्पिटिटिव बॉक्सर देखे. रोहतक हाई परफॉर्मेंस सेंटर ने उन्हें सिर्फ ग्रासरूट नहीं, बल्कि एक पूरे इकोसिस्टम के तौर पर प्रभावित किया. वो इसके लिए फेडरेशन अध्यक्ष अजय सिंह को पैसा लगाने का और सीईओ अरुण मलिक को टीमों को विदेश भेजने का श्रेय देते हैं. उनकी राय में नेशनल कॉम्पिटिशन एक बॉक्सर को एक हद तक ही आगे ले जा सकते हैं.
उनकी चिंता है कि यह सब अंदरूनी लड़ाई से बिखर सकता है, पेरिस में भारत को बॉक्सिंग में कोई मेडल नहीं मिला, और वान डर वोर्स्ट का मानना है कि यह जनरेशन लॉस एंजेलिस में इसे बदलने के लिए काफी अच्छी है, ओलंपिक में 2 साल से भी कम समय बचा है और पहला क्वालिफायर कुछ ही महीनों में है, ऐसे में वो चाहते हैं कि भारत के बॉक्सिंग लीडर अपने झगड़े किनारे रख दें,हर किसी का अपना ईगो है."
बोरिस वान डर वोर्स्ट हर क्षेत्रीय नेता से पूछने को कहते हैं कि वो ओलंपिक पोडियम मिशन में क्या योगदान दे सकते हैं. वो किसी से पद छोड़ने को नहीं कह रहे हैं. उनका कहना है कि लॉस एंजेलिस तक लड़ाई रोक दी जाए. उनकी राय में मौजूदा लीडरशिप, खासकर हाई-परफॉर्मेंस सेटअप जिसने नतीजे दिए हैं, को अभी नहीं बदला जाना चाहिए. बोरिस वान डर वोर्स्ट कहते हैं कि आज जिन बॉक्सरों से उन्होंने बात की, वो इससे खुश हैं, और इसे हटाने के आइडिया को वो "बेवकूफी" बताते हैं.
पूर्व बॉक्सर को अपने टाइमिंग की संवेदनशीलता का एहसास है. अजय सिंह के विरोधी गुट ने इस दौरे पर सवाल उठाए हैं और दोनों के बीच बिजनेस लिंक होने का आरोप लगाया है. आरोप है कि उनकी पत्नियां मिलकर एक बिजनेस को प्रमोट कर रही हैं. वान डर वोर्स्ट इसे टाल देते हैं. वो कहते हैं कि वो भारत में अपना बिजनेस प्रमोट करने नहीं आए हैं और सिर्फ मिशन के लिए यहां हैं.
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