- गुरुग्राम के सेक्टर-65 स्थित ट्रंप टावर्स की 36वीं मंजिल पर रहने वाले वरुण सुहाग ने बिल्डर पर गंभीर आरोप लगाए
- वरुण सुहाग ने बताया कि M3M ग्रुप और उसके मालिक पंकज बंसल ने उनके घर को बंधक बनाने जैसे हालात पैदा किए हैं
- बिल्डर के कर्मचारियों ने उनके अपार्टमेंट तक डिलीवरी एजेंटों, मेहमानों और निजी वाहनों को पहुंचने से रोक दिया है
दिल्ली-NCR की सबसे लग्जरी सोसाइटियों में से एक सेक्टर-65 स्थित ट्रंप टावर्स से हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां 36वीं मंजिल पर रहने वाले एक शख्स ने बिल्डर M3M ग्रुप पर अपने ही घर में बंधक बनाने जैसे हालात पैदा करने का आरोप लगाया है. वरुण सुहाग ने एक्स पर एक वीडियो और M3M के मालिक पंकज बंसल को भेजे गए मैसेज का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा- "मैं अपार्टमेंट नंबर 36C, ट्रंप टावर्स दिल्ली NCR, सेक्टर 65, गुरुग्राम का मालिक हूं, मुझे बिल्डर M3M और मैनेजमेंट, मिस्टर पंकज बंसल ने हाउस अरेस्ट में डाल दिया है." वरुण सुहाग नाम के इस निवासी ने बताया कि कंपनी के कर्मचारियों ने डिलीवरी एजेंटों, मेहमानों, निजी वाहनों और सामान को उनके फ्लैट तक पहुंचने से रोक दिया है.
वरुण सुहाग ने लगाया हाउस अरेस्ट का आरोप
वरुण सुहाग के मुताबिक उन्होंने 27 अगस्त 2026 को ही इस अपार्टमेंट का पजेशन लिया था और 30 अक्टूबर को अपने घर का सामान शिफ्ट करना शुरू किया था. इसके तुरंत बाद बिल्डर के मैनेजमेंट ने उनके खिलाफ दमनकारी रवैया अपना लिया. उनका कहना है कि 36वीं मंजिल पर लिफ्ट का कॉल बटन ही डिएक्टिवेट कर दिया था. जिसके लिए उनके परिवार को नीचे आने या ऊपर जाने के लिए हर बार हेल्पडेस्क को फोन करना पड़ता है, जिसके बाद लिफ्ट आने में 30 से 40 मिनट का समय लगता है. घर में उनकी बुजुर्ग मां हैं, जो दिल की मरीज हैं, और साथ ही उनका एक साल का छोटा बच्चा भी है. आपातकालीन स्थिति में लिफ्ट न मिलने से उनकी जान को गंभीर खतरा हो सकता है. इसके अलावा यह आरोप भी है कि बिल्डर के स्टाफ ने उनके घर आने वाले मेहमानों, डिलीवरी एजेंट्स, सर्विस स्टाफ और यहां तक कि उनकी निजी गाड़ियों और जरूरी सामान को भी परिसर के अंदर आने से रोक दिया है.
पुलिस से भी किया था संपर्क
वरुण सुहाग ने सोशल मीडिया पर यूजर्स के सवालों का जवाब देते हुए बताया कि उन्होंने इस प्रताड़ना के खिलाफ गुरुग्राम पुलिस से संपर्क किया था और शिकायत भी दर्ज कराई. हालांकि, उनके मुताबिक पुलिस ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि वे इस अंदरूनी मामले में कुछ नहीं कर सकते. उनका आरोप है कि इस प्रोजेक्ट को दिसंबर 2024 में पूरा होना था. पजेशन में हुई भारी देरी के कारण उन्होंने बिल्डर के खिलाफ रेरा (RERA) में 'डिलीवरी में देरी के हर्जाने' का केस दर्ज कराया हुआ है.
फिलहाल सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के बाद उनका मामला चर्चा में आया है. जब सोशल मीडिया पर लोगों ने पूछा कि आखिर देश का इतना बड़ा बिल्डर अपनी साख दांव पर लगाकर किसी कस्टमर के साथ ऐसा क्यों करेगा?.
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