चिकिथा तानीपार्थीऔर साहिल जाधव की भारत की कंपाउंड मिश्रित तीरंदाजी जोड़ी ने बुधवार को यहां एशियाई खेलों में रोमांचक शूट ऑफ में दक्षिण कोरिया को हराकर स्वर्ण पदक जीता और 2028 ओलंपिक कोटा स्थान हासिल किया जबकि भारतीय महिला टीम ने भी इसी स्पर्धा में शीर्ष स्थान हासिल किया था. इस तरह भारत की दोनों टीम ने हांगझोउ एशियाई खेल 2023 में जीते अपने खिताब का सफलतापूर्वक बचाव किया.चिकिता और साहिल ने शानदार संयम का परिचय देते हुए रोमांचक फाइनल में दक्षिण कोरिया की जंगयून पार्क और चोई यून ग्यू को शूट ऑफ के बाद 158-157 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया. चीन की फांगयाओ एफ वेई और जिनयी लियू ने कांस्य पदक जीता. भारतीय मिश्रित टीम ने सेमीफाइनल में थाईलैंड को 156-155 से हराकर गोल्ड मेडल के मुकाबले में प्रवेश किया था. गोल्ड मेडल जीतने के साथ ही दोनों को लॉस एंजेलिस ओलंपिक का टिकट भी पक्का कर लिया.
अखबार में खेल के बारे में पढ़कर तीरंदाजी में बनाया करियर, कौन है चिकिथा तानीपार्थी
चिकिथा तानीपार्थी तेलंगाना की एक कंपाउंड आर्चर हैं. एक किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाली चित्रिका को तीरंदाजी की प्रेरणा अपने पिता से मिली, जो उनके पहले मार्गदर्शक रहे हैं. जब वह दूसरी कक्षा में थीं, तब अखबार में इस खेल के बारे में पढ़ने के बाद उनके पिता ने उन्हें तीरंदाजी अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया. उन्होंने 2018 में औपचारिक रूप से अपनी तीरंदाजी यात्रा शुरू की और समय के साथ, यह खेल उनकी शुरुआती दिलचस्पी से बदलकर एक गहरे जुनून में बदल गया. उनके परिवार के प्रोत्साहन और समर्थन ने उन्हें पूरे संकल्प के साथ इस खेल को आगे बढ़ाने का आधार प्रदान किया.

2021 में, चिकिथा तानीपार्थी ने पेशेवर रूप से तीरंदाजी शुरू की, जो एक प्रतिस्पर्धी एथलीट के रूप में उनके विकास का एक महत्वपूर्ण चरण था. उन्होंने 2025 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी सफलता हासिल की और बाद में भारत की कंपाउंड तीरंदाजी टीम की एक महत्वपूर्ण सदस्य बनीं. उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि 2025 में विन्निपेग में आयोजित 'वर्ल्ड आर्चरी यूथ चैंपियनशिप' में मिली, जहां उन्होंने अंडर-21 महिला व्यक्तिगत स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता. चित्रिका इस टूर्नामेंट के इतिहास में यह खिताब जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं. उन्होंने 2025 आर्चरी वर्ल्ड कप सर्किट में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया और अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश के शानदार प्रदर्शन में योगदान दिया.

कौन है साहिल राजेश यादव
साहिल राजेश यादव ने 2016 में अपने पड़ोसी से प्रेरित होकर तीरंदाजी का सफर शुरू किया, जो खुद एक तीरंदाज थे. स्कूल के दिनों में कई खेलों में हिस्सा लेने के बाद, साहिल किसी एक खेल को गंभीरता से आगे बढ़ाना चाहते थे. अपने पड़ोसी को तीरंदाजी का अभ्यास करते देख उनमें दिलचस्पी जगी और उन्होंने इस खेल को अपनाने का फैसला किया. इसके बाद उन्होंने 'दृष्टि तीरंदाजी अकादमी' में ट्रेनिंग शुरू की, जहां उन्होंने अपनी बुनियादी स्किल्स को बेहतर बनाया और धीरे-धीरे एक कॉम्पिटिटिव तीरंदाज के तौर पर आगे बढ़े.
आर्थिक हालात की वजह से तीरंदाजी छोड़ने का बना लिया था मन
साहिल के खेल के सफर में कई चुनौतियां और अनिश्चितता के दौर आए. कभी-कभी पैसों की तंगी के कारण उनकी ट्रेनिंग और टूर्नामेंट में हिस्सा लेने में मुश्किलें आईं. साल 2022 में, आर्थिक हालात की वजह से उन्होंने तीरंदाजी छोड़ने के बारे में भी सोचा था.

पिता ने दिया हिम्मत और प्रेरणा
उनके परिवार, खासकर उनके पिता ने उन्हें लगातार हिम्मत और प्रेरणा दी. उनके माता-पिता ने खेल को जारी रखने के उनके फ़ैसले का पूरा समर्थन किया और उन्हें भरोसा दिलाया कि वे आर्थिक चुनौतियों को संभाल लेंगे, ताकि साहिल अपने खेल के लक्ष्यों पर ध्यान दे सकें.

गोल्ड मेडल की जीत के साथ ओलंपिक का टिकट
साहिल ने 2025 में इंटरनेशनल लेवल पर बड़ी कामयाबी हासिल की और तब से वे भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए कई बड़े इंटरनेशनल टूर्नामेंट्स में हिस्सा ले चुके हैं, जिनमें 'आर्चरी वर्ल्ड कप' के स्टेज और कॉन्टिनेंटल इवेंट्स शामिल हैं.अपने इंटरनेशनल करियर के दौरान उन्होंने 2 इंटरनेशनल मेडल (1 ब्रॉन्ज़ और 1 सिल्वर) जीते हैं. अब साहिल ने रतीय मिश्रित कंपाउंड तीरंदाजी में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है.
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