Adani Group Logistics plan: देश में वेयरहाउसिंग का अगला बड़ा विस्तार अब सिर्फ बड़े शहरों और प्रमुख उपभोग केंद्रों तक सीमित नहीं रहने वाला है. अदाणी पोर्ट्स एंड एसईजेड की वेयरहाउसिंग और अदाणी एग्री लॉजिस्टिक्स इकाई अब केवल ग्रेड-A नहीं, बल्कि ग्रेड-B और ग्रेड-C शहरों पर भी फोकस कर रही है. कंपनी के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और बिजनेस हेड पंकज कुमार भारद्वाज के मुताबिक, आने वाले वर्षों में ओडिशा, पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्य वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स के नए केंद्र बन सकते हैं.
1.4 करोड़ वर्ग फुट तक स्पेस बन रहा
भारद्वाज के मुताबिक, भारत में इस समय करीब 1.3-1.4 करोड़ वर्ग फुट वेयरहाउसिंग स्पेस विकसित हो रहा है. इसमें करीब 60-70% हिस्सा ग्रेड-A और ग्रेड-B शहरों में है.
हालांकि, कंपनी की रणनीति अब छोटे और उभरते शहरों तक विस्तार करने की है. भारद्वाज ने कहा कि कंपनी सिर्फ ग्रेड-A शहरों पर निर्भर नहीं रहना चाहती, बल्कि B और C श्रेणी के शहरों में भी वेयरहाउस विकसित करने पर फोकस कर रही है.
कंपनी के पास कई ऐसे स्थानों पर जमीन उपलब्ध है, जहां ग्राहकों की जरूरत के मुताबिक वेयरहाउस बनाए जा सकते हैं.
ग्राहक के हिसाब से बनेगा वेयरहाउस
अदाणी ग्रुप बिल्ड टू सूट यानी BTS मॉडल के तहत भी वेयरहाउस विकसित करेगा. इस मॉडल में ग्राहक की जरूरत, स्टोरेज क्षमता और दूसरी कारोबारी आवश्यकताओं के हिसाब से सुविधा तैयार की जाती है.
इससे छोटे शहरों में भी कंपनियों को अपनी सप्लाई चेन के करीब वेयरहाउसिंग क्षमता तैयार करने का विकल्प मिल सकता है.

सिर्फ बड़े कंजप्शन सेंटर पर फोकस नहीं
कंपनी की रणनीति सिर्फ उपभोग केंद्रों तक सीमित नहीं है. इसमें EXIM, पोर्ट-बेस्ड और ICD-बेस्ड वेयरहाउसिंग भी शामिल है.
अदाणी ग्रुप की दोनों तटों पर 15-16 पोर्ट्स में मौजूदगी है. कंपनी का मानना है कि इस नेटवर्क का फायदा आने वाले वर्षों में वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के विस्तार में मिल सकता है.
भारद्वाज के मुताबिक, अगले 5-10 वर्षों में सरकार के एक्सपोर्ट बढ़ाने के प्रयासों से पोर्ट-बेस्ड वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स सेवाओं की मांग बढ़ सकती है.
धामरा से विझिंजम तक फोकस
पूर्वी और दक्षिणी तट पर कंपनी की रणनीति में धामरा पोर्ट और केरल का विझिंजम पोर्ट अहम हैं.
विझिंजम पोर्ट तेजी से एक महत्वपूर्ण ट्रांसशिपमेंट हब के तौर पर उभर रहा है. वहीं कंपनी को हाल ही में पारादीप पोर्ट में दो बर्थ भी मिली हैं. इससे पूर्वी तट पर कंपनी की मौजूदगी और मजबूत होने की उम्मीद है.
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बंगाल, ओडिशा और असम में क्यों बड़ा मौका?
भारद्वाज के मुताबिक, पूर्वी भारत में वेयरहाउसिंग का विकास पश्चिमी और उत्तरी भारत की तुलना में अभी अपेक्षाकृत कम हुआ है. ऐसे में ओडिशा, पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में आगे बड़ी ग्रोथ की गुंजाइश है.
वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स गतिविधियां बढ़ने से सिर्फ अतिरिक्त कार्गो वॉल्यूम ही नहीं आएगा, बल्कि सप्लाई चेन इकोसिस्टम की लागत कम करने में भी मदद मिल सकती है.
इस विस्तार के साथ इन राज्यों में वेयरहाउसिंग, ट्रांसपोर्ट, सप्लाई चेन और उससे जुड़ी गतिविधियों में रोजगार के नए अवसर बनने की संभावना भी बढ़ेगी.
भारद्वाज के मुताबिक, अब अलग-अलग राज्य सरकारें निर्माताओं, लॉजिस्टिक्स कंपनियों और औद्योगिक डेवलपर्स को आकर्षित करने के लिए लॉजिस्टिक्स पॉलिसी तैयार कर रही हैं.
उनका कहना है कि कंपनियां भी अपनी जरूरत और बाजार की संभावनाओं के हिसाब से राज्यों के साथ मिलकर अपने लॉजिस्टिक्स पोर्टफोलियो का विस्तार कर रही हैं.
यानी आने वाले वर्षों में भारत का वेयरहाउसिंग नेटवर्क सिर्फ दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे बड़े बाजारों तक सीमित रहने के बजाय B और C श्रेणी के शहरों तथा पूर्वी भारत के राज्यों तक तेजी से फैल सकता है.
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