राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव की तैयारी तेज हो गई है. ओबीसी आयोग ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को रिपोर्ट सौंप दी है. अब निर्वाचन आयोग ने भी राज्य में पंचायत और निकाय चुनाव को लेकर बड़ा फैसला लिया है. राज्य निर्वाचन आयोग ने निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने के उद्देश्य से प्रत्याशियों के चुनावी खर्च की अधिकतम सीमा तय की है. चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रत्याशियों को अपने खर्चे का पूरा ब्योरा 15 दिन में निर्वाचन आयोग को देना होगा.
कौन कितना खर्च कर सकता?
राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश के अनुसार, निकाय के स्तर के आधार पर खर्च की सीमा अलग-अलग तय की गई है. नगर निगम में पार्षद का चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार अधिकतम 3.50 लाख रुपये खर्च कर सकेंगे. वहीं, नगर परिषद के पार्षद पद के उम्मीदवारों के लिए यह सीमा 2.50 लाख रुपये और नगरपालिका सदस्यों के लिए अधिकतम 1.50 लाख रुपये तय की गई है.
आयोग ने यह साफ किया है कि चुनाव प्रचार सामग्री जैसे पोस्टर, बैनर, जनसभाएं, वाहन और घर-घर जाकर किए जाने वाले जनसंपर्क पर होने वाला समस्त खर्च इसी तय सीमा के भीतर ही होना चाहिए. आयोग ने प्रत्याशियों के लिए चुनावी खर्च का पारदर्शी लेखा-जोखा रखना अनिवार्य बनाया है.
15 दिनों के अंदर खर्चे का देना होगा हिसाब
चुनाव परिणाम घोषित होने की तारीख से ठीक 15 दिनों के भीतर सभी उम्मीदवारों को अपने पूरे चुनावी खर्च की रिपोर्ट निर्वाचन आयोग को सौंपनी होगी. अगर कोई प्रत्याशी निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपने खर्चे का ब्यौरा प्रस्तुत करने में विफल रहता है या नियमों का उल्लंघन करता है, तो आयोग उसके खिलाफ सख्त कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई करेगा. निर्वाचन आयोग का यह फैसला सभी प्रत्याशियों को समान अवसर प्रदान करने और चुनावों में अत्यधिक धनबल के प्रयोग पर अंकुश लगाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.
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