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Success Story: ब्यूटी क्वीन से ब्यूरोक्रेट बनीं तस्कीन खान, पिता ICU में भर्ती, बेटी दे रही थी UPSC की परीक्षा

ब्यूटी क्वीन से ब्यूरोक्रेट बनीं तस्कीन खान की कहानी संघर्ष और जुनून की मिसाल है. मिस उत्तराखंड का ताज जीतने के बाद उन्होंने ग्लैमर छोड़ UPSC चुना. तीन बार असफल होने और पिता के ICU में होने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. चौथे प्रयास में AIR 736 हासिल कर वह अफसर बनीं.

Success Story: ब्यूटी क्वीन से ब्यूरोक्रेट बनीं तस्कीन खान, पिता ICU में भर्ती, बेटी दे रही थी UPSC की परीक्षा
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मिस उत्तराखंड का खिताब जीत चुकीं तस्कीन खान ने ग्लैमरस करियर छोड़ यूपीएससी की कठिन राह चुनी. तीन असफलताओं, आर्थिक तंगी और पिता के गंभीर रूप से बीमार होने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. चौथे प्रयास में AIR 736 लाकर अफसर बनीं तस्कीन ने भोपाल में DFM पद का कार्यभार संभाला है. ज‍िसकी जानकारी उन्‍होंने सोशल मीड‍िया पर शेयर क‍ी है.

मिस उत्तराखंड से प्रशासनिक सेवा तक: तस्कीन खान की प्रेरणादायक कहानी

रैंप वॉक पर अपनी खूबसूरती का जलवा बिखेरने से लेकर प्रशासनिक कार्यालय में बड़ी जिम्मेदारियां संभालने तक, तस्कीन खान की जीवन यात्रा यह साबित करती है कि अगर इरादे बुलंद हों तो कोई भी सपना असंभव नहीं है. मिस उत्तराखंड का ताज पहनने और बास्केटबॉल की नेशनल प्लेयर रहने वाली तस्कीन ने जब मिस इंडिया बनने की राह छोड़कर देश सेवा का मन बनाया, तो एक नए संघर्ष की शुरुआत हुई.  

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मॉडलिंग और खेल से सिविल सर्विसेज की ओर झुकाव

देहरादून की रहने वालीं तस्कीन खान बहुमुखी प्रतिभा की धनी रही हैं. वह न केवल एक सफल मॉडल थीं, बल्कि नेशनल लेवल की डिबेटर और बास्केटबॉल चैंपियन भी रही हैं. हालांकि, वह शुरुआत से खुद को पढ़ाई में बहुत तेज नहीं मानती थीं और गणित विषय से उन्हें डर लगता था, लेकिन 10वीं और 12वीं में उन्होंने साइंस स्ट्रीम से 90% से अधिक अंक हासिल कर अपनी काबिलियत साबित की. 

ग्लैमर की दुनिया में रहते हुए एक दिन इंस्टाग्राम पर उनकी बातचीत एक आईएएस उम्मीदवार (फॉलोअर) से हुई. उससे मिली प्रेरणा ने तस्कीन के मन में सिविल सर्विसेज का बीज बो दिया. उन्होंने मॉडलिंग छोड़ अफसर बनने की ठानी और मुंबई की जामिया फ्री कोचिंग के जरिए यूपीएससी की पढ़ाई शुरू की. साल 2020 में वह आगे की तैयारी के लिए दिल्ली आ गईं.

आर्थिक तंगी और पारिवारिक संकट का सामना

तस्कीन का यह सफर आसान नहीं था. उनके पिता आफताब खान ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में ग्रुप D के कर्मचारी थे और परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद सामान्य थी. जब तस्कीन अपनी तैयारी के सबसे महत्वपूर्ण चरण में थीं, तभी उनके पिता गंभीर रूप से बीमार हो गए.

पिता लगभग चार महीने तक अस्पताल में रहे. जब तस्कीन यूपीएससी की मुख्य परीक्षा लिख रही थीं, उस समय उनके पिता आईसीयू में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे थे. मानसिक तनाव और पारिवारिक संकट के बावजूद तस्कीन ने परीक्षा हॉल में अपने धैर्य को टूटने नहीं दिया.

तीन असफलताओं के बाद चौथे प्रयास में मिली कामयाबी

यूपीएससी की राह में तस्कीन को शुरुआती दौर में लगातार असफलता म‍िली. वह लगातार तीन बार प्रीलिम्स परीक्षा पास नहीं कर सकीं. लेकिन अपनी गलतियों से सीखते हुए उन्होंने चौथा प्रयास किया. UPSC 2022 की परीक्षा में उनकी कड़ी मेहनत रंग लाई और उन्होंने ऑल इंडिया 736वीं रैंक (AIR 736) हासिल कर भारतीय रेलवे प्रबंधन सेवा (IRMS) में अध‍िकारी बनीं. 

करियर का नया मुकाम: भोपाल में मिली पहली पदोन्नति

अपनी प्रशासनिक यात्रा को आगे बढ़ाते हुए तस्कीन खान ने हाल ही में अपने करियर में एक नया मील का पत्थर हासिल किया है. 1 अगस्त 2026 को उन्होंने भोपाल में डीएफएम (DFM) के पद पर कार्यभार संभाला. अपनी इस उपलब्धि को साझा करते हुए उन्होंने लिखा कि पहली पदोन्नति हमेशा यादगार होती है, जो नई जिम्मेदारियों और अवसरों की शुरुआत का प्रतीक है. 

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