एक ओर जहां दो बार की ओलंपिक मेडलिस्ट पीवी सिंधु ने शानदार परफॉर्मेंस करते हुए जर्मनी के सारब्रुकन में आयोजित 'हाइलो ओपन सुपर 500' बैडमिंटन टूर्नामेंट का खिताब जीतकर इस सत्र का अपना दूसरा टाइटल हासिल किया तो वहीं, दूसरी ओर बैडमिंटन टूर के दौरान उनकी फंडिंग में कटौती की भी बातें सामने आई है. सूत्रों के अनुसार, स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) की ओर से फंडिंग में कटौती किए जाने के कारण, स्टार शटलर पीवी सिंधु, लक्ष्य सेन और कई अन्य खिलाड़ियों को BWF वर्ल्ड टूर के यूरोपीय चरण के दौरान अपना खर्च खुद ही उठाना पड़ा है. ऐची-नागोया में हुए एशियाई गेम्स 2026 में निराशाजनक प्रदर्शन को पीछे छोड़ते हुए, सिंधु और लक्ष्य ने पिछले हफ्ते जर्मनी के सारब्रुकन में आयोजित 'हाइलो ओपन' में क्रमशः महिला और पुरुष सिंगल्स का खिताब जीता. ऐसी अटकलें थीं कि फंडिंग में यह कटौती जापान में हुए एशियाई गेम्स में बैडमिंटन में भारत के खराब प्रदर्शन से जुड़ी है.
हालांकि, सूत्रों से पता चला है कि फंडिंग में कटौती का ऐची-नागोया में किए गए प्रदर्शन से कोई लेना-देना नहीं था. NDTV को जानकारी मिली है कि SAI की ओर से फंड जारी न करने का कारण यह था कि बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया तय समय-सीमा के भीतर अपना प्रस्ताव जमा नहीं कर पाया था.
SAI ने यह भी आरोप लगाया कि BAI अक्सर फंडिंग में कटौती के लिए एजेंसी को दोष देता है, जबकि असल में फेडरेशन ही कई बार जरूरी प्रस्ताव और सूचियां जमा करने की समय-सीमा का पालन करने में विफल रहता है. एक सूत्र ने NDTV को बताया, "सालों से, फेडरेशन आखिरी समय पर प्रस्ताव भेजते हैं और फिर उसका दोष SAI पर मढ़ देते हैं."
Mr. Kannan, with all due respect, I don't think your tweet fully captures the reality of professional badminton. A first-round exit at Wimbledon earns £80,000. Winning the China Open, one of badminton's richest tournaments, earns $140,000. Lose in the first round? Just $2,000. Yet our expenses are largely similar. Travel, coaches, physios, trainers and support teams. I've had long conversations with Rohan Bopanna about this very disparity. I agree that established athletes should strive to be financially independent. I've been fortunate to have wonderful sponsors, but not everyone has that privilege. That's also why organisations like @OGQ_India are so important. More importantly, if you read Mihir's article in full, you'll see that younger players had to compete without coaches, while several withdrew from tournaments. I can find ways to fund my tour. But what about the 18-year-old chasing her dreams, hoping to become the next Sindhu or Lakshya? And I must acknowledge the tremendous support the Government of India and @Media_SAI have extended to athletes like us over the years. Their contribution to Indian sport cannot be understated. Accountability is absolutely necessary. But supporting athletes isn't bleeding the system. It's investing in India's sporting future. And we shouldn't lose sight of that.
— PV Sindhu (@Pvsindhu1) November 3, 2026
दूसरी ओर पीवी सिंधु, जिन्होंने पिछले हफ्ते इस साल का अपना दूसरा BWF वर्ल्ड टूर खिताब जीता था, SAI के इस फैसले के बारे में जानकर हैरान रह गईं. 'इंडियन एक्सप्रेस' के अनुसार, सिंधु ने कहा, "जब मुझे इस बारे में पता चला, तो मुझे काफी हैरानी हुई और मैं सोचने लगी कि फंडिंग क्यों नहीं मिली. मैंने पहले कभी ऐसी स्थिति का सामना नहीं किया था." सिंधु ने बताया कि उनके प्रायोजकों ने उनके ठहरने के खर्च का कुछ हिस्सा उठाया, जबकि बाकी का खर्च उन्हें अपनी जेब से उठाना पड़ा.
उन्होंने आगे कहा, "लेकिन उस समय, मैं यह तय नहीं कर सकती थी कि फंडिंग न मिलने पर मैं खेलूंगी ही नहीं. मेरे लिए प्राथमिकता यह थी कि मैं टूर्नामेंट में हिस्सा लूं, अपने खेल पर ध्यान दूं, अपने मैच खेलूँ और लगातार सुधार करती रहूं. जाहिर है, यह हैरानी की बात थी कि हमें फंडिंग नहीं मिली, चाहे कारण जो भी रहा हो. मैंने कुछ हद तक फंडिंग का इंतजाम खुद किया और इसमें OGQ (ओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट, जो उन्हें सपोर्ट करते हैं) ने भी मेरी मदद की."
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