पोलो वर्ल्ड कप जोनल प्लेऑफ के लिए भारतीय टीम के चयन पर सवाल उठने लगे हैं. सात सदस्यीय टीम से बाहर रखे गए एक खिलाड़ी ने चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाया है. उन्होंने एक ऐसे खिलाड़ी को टीम में शामिल करने पर भी सवाल उठाए हैं, जो पिछले साल कोकीन के टेस्ट में पॉजिटिव पाया गया था. जोन E के प्लेऑफ नाइजीरिया के अबुजा में 9 से 16 नवंबर तक आयोजित होंगे. इसमें मेजबान नाइजीरिया के अलावा भारत, ईरान और पाकिस्तान की टीमें हिस्सा लेंगी. इन टीमों के बीच अगले साल फरवरी में उरुग्वे के पुंटा डेल एस्टे में होने वाली 'वर्ल्ड पोलो चैंपियनशिप' में जगह बनाने के लिए मुकाबला होगा. इस टूर्नामेंट में कुल छह मैच खेले जाएंगे, और भारत भी क्वालिफ़ाई करने की होड़ में शामिल है.
नवीन ने उठाए सेलेक्शन पर सवाल
नवीन सिंह ने इंडियन पोलो एसोसिएशन के अध्यक्ष, कार्यकारी समिति के सदस्यों और चयन समिति को पत्र लिखकर टीम के चयन और तैयारी में गंभीर खामियों का आरोप लगाया है. अपने पत्र में, नवीन ने एक खिलाड़ी को टीम में शामिल करने पर सवाल उठाए हैं.
उनके अनुसार, यह खिलाड़ी शुरुआती 12 खिलाड़ियों की शॉर्टलिस्ट में शामिल नहीं था, उसने न तो कोचिंग कैंप में हिस्सा लिया और न ही टीम के अभ्यास सत्रों में भाग लिया. इसके अलावा, पिछले साल 'नेशनल एंटी-डोपिंग एजेंसी'द्वारा किए गए टेस्ट में वह कोकीन के लिए पॉजिटिव पाया गया था.
न्यूज एजेंसी पीटीआई के पास मौजूद इस पत्र में नवीन ने लिखा है,"जब मुझे पता चला कि किन खिलाड़ियों का चयन हुआ है, तो मुझे गहरा झटका लगा. एक ऐसे खिलाड़ी को चुन लिया गया जो शुरुआती 12 खिलाड़ियों की शॉर्टलिस्ट में था ही नहीं... एक ऐसा खिलाड़ी जिसने न तो कोचिंग कैंप में हिस्सा लिया और न ही टीम के किसी अभ्यास सत्र में भाग लिया."
उन्होंने संबंधित खिलाड़ी का नाम लिए बिना आरोप लगाया,"मुझे पता चला है कि चयन समिति की बैठक में कोच कर्नल एनएस संधू ने कहा था कि 'अगर कोई खिलाड़ी कोकीन लेने के आरोप में पकड़ा गया, तो क्या हुआ? - कोकीन तो सब लेते हैं'."
नवीन ने अपने पत्र में आगे लिखा,"इस बात की पुष्टि चयन समिति के किसी सदस्य से की जा सकती है. एक पूर्व सेना अधिकारी, 61 कैवेलरी के पूर्व कमांडिंग ऑफिसर, मौजूदा नेशनल कोच और एक जिम्मेदार नागरिक की ओर से इस तरह की सोच आना चौंकाने वाला और बेहद परेशान करने वाला है."
नवीन, जिन्होंने बताया कि पिछले 12 सालों में उन्होंने कई विश्व कप में भारत का प्रतिनिधित्व किया है, ने कोच संधू और आईपीएल सचिव कर्नल VS काहलों पर पक्षपात का आरोप लगाया और उनके बर्ताव पर सवाल उठाए. उन्होंने आगे कहा,"मैं इस मौके का फायदा उठाते हुए आपका ध्यान कुछ ऐसे तथ्यों और घटनाओं की ओर दिलाना चाहता हूं, जो भारतीय टीम के राष्ट्रीय कोच कर्नल NS संधू और IPA सचिव कर्नल VS काहलों के बर्ताव, उनके पक्षपाती रवैये और काम में रुचि न लेने को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं."
"पिछले 12 सालों में मैंने कई पोलो विश्व कप में भारत का प्रतिनिधित्व किया है. इससे पहले मुझे ऐसे कोचों और IPA सचिवों के साथ काम करने का सौभाग्य मिला है, जो समर्पित, सक्षम और निष्पक्ष थे. लेकिन मौजूदा कोच और IPA सचिव के साथ मेरा अनुभव बेहद निराशाजनक रहा है." उन्होंने कोच संधू को तुरंत पद से हटाने की मांग की और आरोप लगाया कि कोच का बर्ताव पक्षपाती रहा है.
कोच ने किया फैसले का बचाव
वहीं, संधू ने खिलाड़ी को टीम में शामिल करने का बचाव करते हुए कहा कि खिलाड़ी का निलंबन खत्म हो चुका है और वह चयन के लिए योग्य है. उन्होंने इस पूरे मामले को एक 'बेवजह का विवाद' करार दिया. उन्होंने कहा,"जो कुछ भी हुआ, उसे अपना निलंबन और प्रतिबंध झेलना पड़ा, वह सब अब खत्म हो चुका है. वह चयन के लिए योग्य है. इसमें कोई विवाद नहीं है. मैं तो यही कहूंगा कि यह विवाद जानबूझकर खड़ा किया जा रहा है."
खिलाड़ी के तैयारी शिविर (कैंप) में शामिल न होने पर संधू ने बताया कि प्रतिबंध के दौरान वह अकेले ही ट्रेनिंग कर रहा था, इसलिए वह कैंप का हिस्सा नहीं था. संधू ने बताया,"यह कैंप खिलाड़ियों को तैयार करने के लिए है. तकनीकी रूप से कैंप अभी भी चल रहा है. ऐसा नहीं है कि हमने पहले कोई कैंप लगाया और सिर्फ उसी के आधार पर खिलाड़ियों का चयन कर लिया. यह कैंप खिलाड़ियों को और अधिक फिट बनाने के लिए था, क्योंकि यह ऑफ-सीजन के बाद हो रहा था."
कोच ने कहा,"खिलाड़ी खुद को और अपने घोड़ों को फिट कर रहे थे. वह भी अपने स्तर पर यही कर रहा था, लेकिन वह कैंप का हिस्सा नहीं था क्योंकि शुरुआत में उसका प्रतिबंध 1 नवंबर तक था. अब उसका प्रतिबंध खत्म हो चुका है और वह चयन के लिए योग्य है, जबकि तकनीकी रूप से कैंप अभी भी जारी है."
IPA की कार्यकारी समिति के एक सदस्य ने पुष्टि की कि विवादित खिलाड़ी के मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय पैनल बनाया गया था. जय शेरगिल की अध्यक्षता वाले इस पैनल में दीपक उदर, IPA के कोषाध्यक्ष एपी सिंह और सचिव कर्नल वीएस काहलों शामिल थे.
कार्यकारी समिति के सदस्य ने बताया कि पैनल ने फैसला किया था कि खिलाड़ी को दो साल तक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करने की अनुमति नहीं दी जाएगी. ऐसे में, नाइजीरिया क्वालीफायर के लिए उसे टीम में शामिल करना और भी हैरान करने वाला है.
सदस्य ने बताया कि पिछले साल दिसंबर में हुए NADA टेस्ट में खिलाड़ी पॉजिटिव पाया गया था और उसने अपना अपराध स्वीकार भी कर लिया था. हालांकि, पोलो खेलने वालों की कम संख्या को देखते हुए IPA ने बहुत कड़ी सजा देने के बजाय उस पर तीन महीने का प्रतिबंध लगाया, जबकि NADA के नियमों के तहत तीन साल तक का प्रतिबंध लगाया जा सकता था.
सदस्य ने कहा,"IPA के संविधान में दो साल के निलंबन का प्रावधान है, जिसके तहत खिलाड़ी को उस अवधि के दौरान अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने से रोका जाता है. लेकिन, इस मामले में इस प्रावधान को लागू नहीं किया गया."
कार्यकारी समिति के सदस्य ने यह भी बताया कि टीम में संतुलन बनाए रखने के लिए खिलाड़ी का हैंडीकैप चार से घटाकर तीन कर दिया गया था, क्योंकि पोलो प्रतियोगिताएं हैंडीकैप सिस्टम के तहत खेली जाती हैं.
वहीं, नवीन ने फिर कहा कि वह खिलाड़ी किसी भी तैयारी शिविर में शामिल नहीं हुआ था. साथ ही, उन्होंने फिटनेस और कोचिंग शिविरों में लगातार मौजूद रहने के बावजूद खुद को बाहर रखे जाने पर सवाल उठाया.
इस पर प्रतिक्रिया मांगे जाने पर IPA के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) राजिंदर दीवान ने कहा,"मैं क्यों प्रतिक्रिया दूं? मुझे कुछ नहीं कहना है." वहीं, कोषाध्यक्ष एपी सिंह ने संदेश भेजकर कहा कि "इस मुद्दे पर मुझे कुछ नहीं कहना है."
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