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'पापा भारत के लिए नहीं खेल सके, अब मुझमें देखते हैं अपना सपना', समायरा राघव का इमोशनल बयान

समायरा राघव को विमेंस प्रीमियर लीग का ऑक्शन नहीं देखना था. उनके माता-पिता ने उन्हें पिछले हफ्ते कोच्चि में हो रहे ऑक्शन की लाइव कवरेज देखने से मना किया था.

'पापा भारत के लिए नहीं खेल सके, अब मुझमें देखते हैं अपना सपना', समायरा राघव का इमोशनल बयान
समायरा राघव का इमोशनल बयान

समायरा राघव को विमेंस प्रीमियर लीग का ऑक्शन नहीं देखना था. उनके माता-पिता ने उन्हें पिछले हफ्ते कोच्चि में हो रहे ऑक्शन की लाइव कवरेज देखने से मना किया था. उन्हें डर था कि अगर किसी टीम ने उन्हें नहीं खरीदा, तो 16 साल की उम्र में इतनी बड़ी उम्मीद का बोझ संभालना उनके लिए मुश्किल हो सकता है. ऑक्शन से एक दिन पहले, समायरा उन चार खिलाड़ियों में शामिल थीं, जिन्हें आखिरी समय में ऑक्शन पूल में जोड़ा गया. इससे WPL 2027 के ऑक्शन पूल में खिलाड़ियों की संख्या 146 से बढ़कर 150 हो गई. 

उन्हें इस बारे में एक इंस्टाग्राम स्टोरी से पता चला, और फिर उनकी मां ने भी उन्हें बताया. सोमवार को न्यूज एजेंसी आईएएनएस के साथ एक खास बातचीत में समायरा ने बताया,"मेरी मां ने मुझे तुरंत मैसेज किया कि, 'मुझे लगता है कि अब तुम भी ऑक्शन लिस्ट में शामिल हो गई हो.'"

अपना नाम आने से पांच मिनट पहले, उन्होंने बिलासपुर (हिमाचल प्रदेश) के अपने होटल के कमरे में लाइव फीड चालू कर दी. वहां वह अपनी टीम D की रूममेट के साथ U19 विमेंस T20 चैलेंजर्स टूर्नामेंट खेल रही थीं.

उन्होंने आगे बताया,"फिर मैंने अपना नाम देखा और गुजरात जायंट्स का पैडल ऊपर उठते हुए देखा, तो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा. हम दोनों ने होटल के कमरे में जोर-जोर से चिल्लाकर अपनी खुशी जाहिर की. वह पल बिल्कुल किसी सपने जैसा था." 

गुजरात जायंट्स ने उन्हें उनके बेस प्राइस, 10 लाख रुपये में खरीदा. लेकिन समायरा के लिए, यह उस सपने की पहली सार्वजनिक मान्यता थी, जिसकी शुरुआत नौ साल पहले हुई थी. 23 जनवरी 2010 को जन्मीं समायरा का खेलों से नाता 100 मीटर और 200 मीटर की दौड़ से शुरू हुआ. समायरा ने कहा,"लेकिन मेरे पिता चाहते थे कि मैं दूसरे खेलों में भी हाथ आजमाऊं, क्योंकि बचपन से ही मुझे खेलों में बहुत दिलचस्पी थी."

सात साल की उम्र में, उनके पिता सुनील राघव उन्हें एक क्रिकेट अकादमी ले गए. पहले ही सेशन में फील्डिंग कराई गई, और समायरा को यह बहुत पसंद आया. समायरा ने कहा,"मुझे इसमें बहुत मज़ा आया. उस दिन के बाद, मैं अपनी मर्जी से अकादमी जाने लगी. मेरे पापा ने मुझे क्रिकेट की तरफ धकेला था, लेकिन उसके बाद मैंने खुद ही सब संभाल लिया."

सुनील कॉलेज के दिनों तक लेग-स्पिनर के तौर पर खेलते रहे, फिर उन्होंने अपनी पढ़ाई पर ध्यान दिया और IIM कलकत्ता से MBA किया. बाद में, उन्होंने अमेरिका और भारत में डॉव केमिकल्स, डॉ. रेड्डीज़ लैबोरेटरीज और टोटल (आर्केमा ग्लोबल) जैसी कंपनियों में टेक्नोलॉजी को आगे बढ़ाने का काम किया. 

समायरा ने बताया,"मुझे लगता है कि उनकी खुद की इच्छा थी कि वे भारत के स्तर पर क्रिकेट खेलें, लेकिन वे ऐसा नहीं कर पाए. इसलिए, अब वे शायद मुझमें अपना सपना देखते हैं और मैं उसी दिशा में काम कर रही हूं."

समायरा की मां, पूजा जैन ने मैकिन्से एंड कंपनी में एक दशक तक काम किया. वे वहां पार्टनर बनीं और सस्टेनेबिलिटी प्रैक्टिस को सह-संभाला. इसके अलावा, पेन स्टेट यूनिवर्सिटी और डॉव केमिकल्स में अपनी रिसर्च के दौरान उन्हें दो अमेरिकी पेटेंट भी मिले. आज यह दंपति 'एलिमेंटरी' नाम की कंपनी चलाता है, जो लिथियम-आयन बैटरी की पूरी रीसाइक्लिंग प्रक्रिया में माहिर है.

पूजा जहां CEO हैं, वहीं सुनील CTO के तौर पर काम करते हैं. क्रिकेट में, समायरा ने शुरुआत में मुख्य रूप से एक बल्लेबाज के तौर पर खेलना शुरू किया था. कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान, गुरुग्राम में उनकी हाउसिंग सोसाइटी में बल्लेबाजी करना मुमकिन नहीं था, इसलिए सुनील को उनकी लेग-स्पिन स्किल्स को निखारने का समय मिल गया. 

समायरा बताती हैं,"हम अपनी सोसाइटी में नीचे जाते थे और मैं गेंदबाजी करना शुरू कर देती थी. उन्होंने मुझे बुनियादी बातें सिखाईं, और इस तरह मैंने अपने पापा से ही गेंदबाजी सीखी."

जैसे-जैसे समायरा बड़ी हुईं, सुनील ने खुद को थोड़ा पीछे कर लिया. "जब मैं थोड़ी छोटी थी, तब मैं उतनी आत्मनिर्भर नहीं थी. लेकिन कुछ सालों बाद, उन्होंने मुझे खुद से चीजें करने की आज़ादी दी. मैं मेट्रो से आती-जाती थी. तब से वे मेरे साथ तो रहे हैं, लेकिन अब वे मुझे पूरी तरह से अपने दम पर काम करने देते हैं." 

समायरा अब हौज खास स्थित 'सिटी क्रिकेट अकादमी' में दीप्ति ध्यानी की देखरेख में ट्रेनिंग लेती हैं. दीप्ति ध्यानी फिलहाल दिल्ली की सीनियर महिला टीम की हेड कोच हैं. यह अकादमी 'दिल्ली एंड डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन'से जुड़ी है और यहां 'सॉनेट' नाम से टीम खेलती है.

यहीं पर उनका रोल बदल गया. बचपन में वह ओपनिंग करती थीं, लेकिन सीनियर खिलाड़ियों के साथ खेलने के दौरान उन्हें बल्लेबाजी क्रम में नीचे भेज दिया गया. उनके कोचों ने उन्हें एक सलाह दी: अगर उन्हें बल्लेबाजी का मौका देर से मिलता है, तो उन्हें छक्के लगाने चाहिए.

उन्होंने बताया,"उन्होंने मुझसे कहा कि मुझे छक्के लगाने की कला विकसित करनी चाहिए. इसलिए, हमने इस पर काम करना शुरू कर दिया. इसके बाद, मैं मैदान पर जाकर मैच खत्म करने लगी. ऐसा करते समय मुझे ज्यादा दबाव महसूस नहीं होता था. इसलिए मैंने इसे अपना लिया और अब मुझे इसमें बहुत मजा आता है."

उन्होंने यह भी समझा कि महिला क्रिकेट किस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है - यानी पावर-हिटिंग और छक्के लगाने की कला की ओर. "पहले के समय में, ज्यादातर जमीन पर शॉट खेले जाते थे. लेकिन अब, खेल पूरी तरह बदल गया है."

"अब खेल के फॉर्मेट छोटे हो गए हैं और हर कोई पावर-हिटिंग और छक्के लगाने पर ज्यादा ध्यान दे रहा है. मैंने भी सोचा कि जो ट्रेंड चल रहा है, मुझे भी उसे सीखना चाहिए. मुझे पता है कि अगर मैं छक्के लगा सकती हूं, तो इससे मुझे भविष्य में भी काफी मदद मिलेगी."

उनके रोल मॉडल भारत के दो बेहतरीन 'फिनिशर' हैं. पूर्व कप्तान एमएस धोनी और विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋचा घोष. समायरा ने कहा,"जाहिर है, एमएस धोनी तो हैं ही. और ऋचा घोष - वह सच में कमाल की खिलाड़ी हैं."

उनकी इस मेहनत का असर इस साल 'विमेंस दिल्ली प्रीमियर लीग' में देखने को मिला, जहां समायरा 'नॉर्थ दिल्ली स्ट्राइकर्स' की ओर से खेलीं. 'साउथ दिल्ली सुपरस्टार्स' के खिलाफ, उन्होंने 26 गेंदों में 32 रन बनाए (जिसमें दो चौके और एक छक्का शामिल था), जिससे उनकी टीम को 2 रन से जीत मिली. 

वहीं, 'ईस्ट दिल्ली राइडर्स' के खिलाफ उन्होंने 21 गेंदों में नाबाद 34 रन बनाए और आखिरी से ठीक पहले वाली गेंद पर छक्का जड़कर अपनी टीम को जीत दिलाई.

"हम (ईस्ट दिल्ली के खिलाफ) मैच को बिल्कुल आखिरी तक ले गए. मुझे लगा कि अब यहाँ से हारना तो मुमकिन ही नहीं है. मुझे जीतना ही होगा, क्योंकि मैं इस मैच में इतनी दूर तक आ चुकी हूं. उस समय ऐसा लग रहा था कि हमारे गेंदबाज ही बल्लेबाज की भूमिका निभा रहे हैं, क्योंकि अब कोई ऐसा बल्लेबाज नहीं बचा था जो छक्के लगा सके."

उन्होंने याद करते हुए बताया,"इसलिए, उस गेंद पर मुझे लगा कि किसी भी तरह एक बाउंड्री की जरूरत है. मैंने छक्का मारने का ही फैसला किया, क्योंकि अगर मैं सिंगल लेती, तो शायद हम मैच हार जाते. ऐसा इसलिए क्योंकि आखिरी बल्लेबाज छक्का नहीं लगा पाता. फिर मैंने पूरी कोशिश की, और किस्मत से गेंद बल्ले पर अच्छे से लगी और छक्के के लिए चली गई." 

इस तरह के प्रदर्शन की बदौलत समायरा शानदार फॉर्म में हैं. अंडर-19 महिला T20 ट्रॉफी में दिल्ली के लिए खेलते हुए, उन्होंने सात पारियों में 216 के स्ट्राइक रेट से 162 रन बनाए. वह सिर्फ तीन बार आउट हुईं, उनका औसत 54 रहा और उन्होंने 14 चौके और 12 छक्के लगाए.

अंडर-19 महिला T20 चैलेंजर ट्रॉफी में, टीम A के खिलाफ, टीम D आठ ओवर के बाद 27/3 के स्कोर पर संघर्ष कर रही थी. तब समायरा क्रीज पर आईं और 44 गेंदों में 78 रन बनाए, जिसमें छह चौके और इतने ही छक्के शामिल थे. उनकी इस पारी की मदद से टीम 137/6 के स्कोर तक पहुंच सकी. टीम B के खिलाफ, जहां 10 रन प्रति ओवर से ज्यादा की दर से रन बनाने थे, उन्होंने 12 गेंदों में नाबाद 24 रन बनाए, जिसमें दो चौके और दो छक्के शामिल थे.

इस बीच, समायरा को दो WPL ट्रायल में हिस्सा लेने का मौका मिला - मुंबई में मुंबई इंडियंस के लिए और बेंगलुरु में गुजरात जायंट्स के लिए. मुंबई में केवल एक ओपन नेट सेशन था. बेंगलुरु का अनुभव अलग रहा. 

उन्होंने कहा,"मुंबई इंडियंस में, हमारे पास सिर्फ एक ओपन नेट सेशन था. वहां मुझे कोचों से बात करने का मौका नहीं मिल पाया. लेकिन गुजरात जायंट्स के कैंप में, उन्होंने मुझ पर और मेरी छक्के मारने की क्षमता पर खास ध्यान दिया." 

"उन सभी ने मुझे बहुत सकारात्मक फीडबैक दिया और कुछ ऐसी बातें बताईं जिन पर मुझे काम करने की ज़रूरत थी, और मैं अभी उन पर काम भी कर रही हूं. उन्होंने मेरी बॉलिंग पर भी ध्यान दिया. बॉलिंग कोच, पीटी और प्रवीण (तांबे) सर ने देखा कि मैं बॉलिंग भी कर सकती हूं और मुझमें एक अच्छी बॉलर बनने की क्षमता है. मुझे लगता है कि शायद इसीलिए उन्होंने मुझे चुना है. उस कैंप का हिस्सा बनना वाकई बहुत शानदार अनुभव था."

गुजरात जायंट्स के कोचिंग स्टाफ ने उनकी फील्डिंग स्किल्स पर भी ध्यान दिया."हमने बस एक मैच सिमुलेशन खेला था. मुझे लगता है कि मैंने एक या दो बाउंड्री रोकी थीं. मुझे नहीं पता कि उस पर कितना ध्यान गया होगा, लेकिन मैंने अपना 100 प्रतिशत दिया." 

दो दिनों के ट्रायल के दौरान उन्हें देखने वालों ने बताया कि उन्होंने गेंद को वहां मौजूद बाकी खिलाड़ियों की तरह ही ज़ोर से हिट किया, और उनकी फील्डिंग बाकी खिलाड़ियों के मुकाबले काफी अलग और बेहतर थी;.

समायरा DPL के जरिए महिला खिलाड़ियों को एक अच्छा मंच दिलाने के लिए DDCA और इसके अध्यक्ष रोहन जेटली को श्रेय देती हैं. "सच कहूं तो, मैं DDCA की बहुत आभारी हूं. उन्होंने हम जैसे युवाओं को अपना टैलेंट दिखाने के लिए कई मौके दिए हैं. अब WPL के स्काउट्स हमारे मैच देखने आते हैं, जिससे खिलाड़ियों का चयन हो पाता है."

"मुझे लगता है कि इस बार दिल्ली से 4-5 खिलाड़ी WPL में हैं. इससे वाकई बहुत फर्क पड़ता है. इसलिए, मैं DDCA की बहुत आभारी हूं. रोहन जेटली सर ने महिलाओं को पुरुषों के बराबर लाने के लिए बहुत प्रयास किए हैं. जैसे कि उन्हें समान अवसर देना, एक ही मैदान पर खेलने का मौका देना- मैं सच में उनकी बहुत आभारी हूं. उन्होंने हमें वाकई बहुत अच्छा एक्सपोज़र दिया है."

वह जानती हैं कि तारीफ मिलने पर एक युवा खिलाड़ी का भटकना कितना आसान होता है. समायरा ने आगे कहा,"मैं हमेशा अपनी जड़ों के बारे में सोचती हूं. मैं कहां से आई हूं और आज कहां पहुंच गई हूं. यह एहसास मुझे ज़मीन से जोड़े रखता है. मैं उन मुश्किल दौर के बारे में सोचती हूं, जब मेरे परिवार और कोच के अलावा मेरे साथ कोई नहीं था. ऐसे में, जो लोग मेरे साथ रहे, उनके प्रति मेरे मन में बहुत कृतज्ञता का भाव आता है." 

वह बताती हैं कि उनके माता-पिता को उन पर गर्व है, लेकिन वे इसे शायद ही कभी जाहिर करते हैं. "मुझे लगता है कि वे ऐसा इसलिए नहीं दिखाते क्योंकि उन्हें लगता है कि अगर उन्हें पता चल गया कि वे खुश हैं, तो मैं बहुत ज्यादा खुश हो जाऊंगी और बाकी चीजों पर ध्यान नहीं दूंगी. इसलिए, वे मुझे जमीन से जुड़ा रखना चाहते हैं. यही वजह है कि वे बिल्कुल सामान्य व्यवहार करते हैं."

जब घबराहट होती है, तो वह पेंटिंग और ड्राइंग करती हैं. संगीत भी उन्हें शांत करता है - हर मैच से पहले, बस से उतरकर खेलने जाने से ठीक पहले, वह पंजाबी गायक करण औजला का गाना '52 बार्स' जरूर सुनती हैं. समायरा के इंस्टाग्राम बायो में उनकी गहरी समझ झलकती है: "क्रिकेट खेलना पसंद है." इसके नीचे महान खिलाड़ी राहुल द्रविड़ की एक लाइन लिखी है,"आप बदला लेने के लिए नहीं, बल्कि सम्मान और गर्व के लिए खेलते हैं."

अगर समायरा को अंडर-19 वर्ल्ड कप के लिए चुना जाता है, तो उन्हें WPL से दूर जाना पड़ सकता है. लेकिन समायरा को इसमें कोई टकराव नहीं दिखता, क्योंकि यह उनके पिता के सपने को पूरा करने की दिशा में पहला कदम होगा.

"अगर मुझे अंडर-19 वर्ल्ड कप टीम में जगह मिलती है, तो यह वाकई बहुत शानदार होगा. मुझे लगता है कि अगर मेरा चयन अंडर-19 वर्ल्ड कप के लिए होता है, तो यह मेरे देश के प्रति मेरा कर्तव्य होगा . लेकिन अभी, मैं बस इतना सोच रही हूं कि मैं जहां भी जाऊं, अच्छा प्रदर्शन करती रहूं, बाकी सब भगवान देख लेंगे."

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