मंगलवार को एशियाई खेलों में हरियाणा के जींद की रहने वाली 26 साल की नीरू ढांडा ने ज़बरदस्त बारिश और गिरते तापमान का सामना करते हुए मज़बूत प्रतिद्वंद्वियों के बीच कॉन्टिनेंटल रिकॉर्ड तोड़ा और व्यक्तिगत ट्रैप शूटिंग में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं. इसी इवेंट में उन्होंने पहले आशीमा अहलावत और मनीषा कीर के साथ मिलकर टीम सिल्वर मेडल जीता था. उन्होंने देश के लिए पुरुषों या महिलाओं के व्यक्तिगत ट्रैप इवेंट में दूसरा गोल्ड मेडल जीतने का 48 साल का इंतज़ार भी खत्म किया. भारतीय सेना की 5'2" लंबी नायब सूबेदार नीरू ने ज़बरदस्त संयम और सटीकता का प्रदर्शन किया. उन्होंने महिलाओं के ट्रैप फाइनल में 30 में से 28 निशाने लगाए और चीन की सुन युनोंग (26) और कुवैत की अब्दुलमलिक हजर (21) से आगे रहीं.
बुधवार को ट्रैप मिक्स्ड टीम इवेंट में कीनन चेनाई के साथ मिलकर नीरू अपने पदकों की संख्या और बढ़ा सकती हैं. बारिश से भीगी रेंज पर, जहां विज़िबिलिटी कम थी और उड़ते हुए क्ले टारगेट को ट्रैक करना बहुत मुश्किल था, नीरू ने हार नहीं मानी. उन्होंने सबसे अहम मौके पर बेहतरीन प्रदर्शन करके भारतीय शूटिंग के इतिहास में एक यादगार पल रचा.
उनका गोल्ड मेडल कई वजहों से अहम है. यह महिलाओं के ट्रैप इवेंट में भारत का पहला एशियाई खेलों का व्यक्तिगत मेडल है और इन खेलों में देश का पहला व्यक्तिगत शूटिंग गोल्ड भी है. भारतीय राइफल और पिस्टल शूटर्स के लिए यह सफ़र मुश्किल भरा रहा. नीरू की इस बड़ी कामयाबी से पहले, सुरुचि इंदर सिंह और कमलजीत का 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड टीम गोल्ड जीतना ही सबसे अच्छा प्रदर्शन था.

एशियाई खेलों में भारत का पहला ट्रैप गोल्ड 1978 में बैंकॉक में पुरुषों के इवेंट में रणधीर सिंह ने जीता था. इस इवेंट में देश को अगला गोल्ड जीतने में 32 साल और लगे, जब डबल-ट्रैप शूटर रोंजन सोढ़ी ने 2010 के ग्वांगझू खेलों में यह कारनामा किया. नीरू ने अब उस विरासत में एक और अध्याय जोड़ा है और साथ ही शॉटगन शूटिंग में भारतीय महिलाओं के लिए एक बिल्कुल नया अध्याय शुरू किया है.
एशियाड से पहले बीमारी थी नीरू
यह जीत इसलिए भी खास थी क्योंकि प्रतियोगिता से सिर्फ़ 10 दिन पहले ही नीरू गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं. तेज़ फ़्लू (शायद H1N1) की वजह से उन्हें भोपाल में अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था और वह पांच दिनों तक कुछ खा-पी भी नहीं पाई थीं.
उनके हिस्सा लेने और फ़ॉर्म को लेकर अनिश्चितता थी, लेकिन उनके पर्सनल कोच और पूर्व इंटरनेशनल शूटर व कॉमनवेल्थ गेम्स के गोल्ड मेडलिस्ट मनशेर सिंह ने उन्हें बीमारी को भुलाकर अपना सब कुछ झोंक देने के लिए प्रेरित किया. जीत के बाद नीरू ने कहा,"मनशेर सर ने बस यही कहा कि जो हुआ उसे भूल जाओ और निशाने पर ध्यान लगाओ, और मैंने वही किया."
यह सलाह बहुत काम आई. जींद में जन्मी इस शूटर ने ऐसा शानदार प्रदर्शन किया जिससे उनकी हालिया मुश्किलों का कोई असर नहीं दिखा. उनके शुरुआती सफ़र में 2017 में मध्य प्रदेश शूटिंग एकेडमी जाना शामिल था, जब उनके कज़िन और 2018 एशियन गेम्स में पुरुषों के ट्रैप इवेंट में सिल्वर मेडल जीतने वाले लक्ष्य शेरॉन ने उन्हें इस खेल को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया था.

मंगलवार को फ़ाइनल में, नीरू ने क्वालिफ़िकेशन के शुरुआती चार राउंड में 100 में से 95 का ज़बरदस्त स्कोर करके अपने इरादे साफ़ कर दिए और फ़ाइनल डे के लिए अकेली बढ़त बना ली. खराब होते मौसम के बावजूद, उन्होंने पांचवें और आखिरी राउंड में अपना संयम बनाए रखा और 23 का स्कोर करके कुल 118 अंक हासिल किए. वह कतर के बासिल रे के बराबर रहीं और आठ शूटरों वाले फ़ाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली.
टीम इवेंट में जीता सिल्वर
क्वालिफिकेशन स्कोर टीम इवेंट में भी काम आए, जिसमें नीरू ने आशीमा अहलावत और मनीषा कीर के साथ मिलकर सिल्वर मेडल जीता. नीरू ने 118, आशीमा ने 106 और मनीषा ने 104 का स्कोर किया, जिससे भारत का कुल स्कोर 328 हो गया. चीन ने 346 के स्कोर के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि कुवैत ने 325 के स्कोर के साथ ब्रॉन्ज़ मेडल हासिल किया. फाइनल में नीरू शुरू से ही ज़बरदस्त फ़ॉर्म में थीं.
शुरुआती 10 टारगेट के बाद जब कॉम्पिटिशन में खिलाड़ियों की संख्या कम होने लगी और मुकाबला और कड़ा हो गया, तब भी उन्होंने अपनी लय बनाए रखी और मौसम को अपने प्रदर्शन पर हावी नहीं होने दिया. मुश्किल हालात में एक-एक करके उनकी प्रतिद्वंद्वी लड़खड़ाती गईं, लेकिन नीरू ने कमाल की निरंतरता के साथ टारगेट पर निशाना लगाना जारी रखा.
आखिरी पांच शॉट्स से पहले, उन्हें चीन की सुन युनोंग पर दो अंकों की बढ़त हासिल थी, जो आखिर में सिल्वर मेडल से ही संतुष्ट रहीं. बीच में थोड़ी देर के लिए खेल रुका, जब नीरू को येलो कार्ड दिखाया गया-एक ऐसा फैसला जिस पर आपत्ति जताई गई और आखिरकार उन्हें इसका फायदा मिला-जिससे उनके ध्यान भटकने का खतरा पैदा हो गया था.
लेकिन भारतीय खिलाड़ी अविचलित रहीं; वे फायरिंग लाइन पर लौटीं, सभी पांच टारगेट पर निशाना साधा और 28 के शानदार स्कोर के साथ गोल्ड मेडल पक्का किया. जैसे ही आखिरी टारगेट टूटा, रेंज में जश्न का माहौल बन गया. भारत के ब्रिटिश कोच और ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट पीटर विल्सन ने नीरू को भारतीय तिरंगे में लपेटा, जबकि खुद शूटर भारतीय शॉटगन इतिहास के सबसे अहम प्रदर्शनों में से एक करने के बाद भी बेहद शांत और संयमित रहीं.
नीरू हाल ही में इटली के लोनाटो में ISSF वर्ल्ड कप में ट्रैप इवेंट में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनी थीं, जिसमें ओलंपिक मेडलिस्ट और वर्ल्ड चैंपियन भी शामिल थे. लेकिन आर्मी की इस शूटर के लिए, इस मेडल की अहमियत उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि से कहीं ज़्यादा थी. उन्होंने कहा, "मैं यह मेडल उन जवानों को समर्पित करती हूं जो हमारी सीमाओं की रक्षा करते हैं. सीमा पर वे जो काम करते हैं, उसके मुकाबले मेरी उपलब्धि कुछ भी नहीं है. मैं यह गोल्ड मेडल रणधीर सिंह जी को भी समर्पित करती हूं, जो 1978 में बैंकॉक में एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीतने वाले पहले भारतीय ट्रैप शूटर थे. वे बहुत मिलनसार व्यक्ति थे, हमेशा मुझसे गले मिलकर और ज्ञान की बातें साझा करते हुए मिलते थे."
भोपाल के अस्पताल के बिस्तर से लेकर एशियाई खेलों के पोडियम तक, नीरू का सफ़र हिम्मत और ज़बरदस्त सटीकता वाला रहा है और उन्होंने कहा कि उनका असली मक़सद ओलंपिक खेलों में कामयाबी हासिल करना है. उन्होंने कहा,"बेशक, हर खिलाड़ी ओलंपिक खेलों में कामयाबी का सपना देखता है और ये मेडल उस असली मक़सद तक पहुँचने की सीढ़ियाँ भर हैं." हालांकि, भारत पुरुषों की ट्रैप प्रतियोगिता में टीम या व्यक्तिगत इवेंट, किसी में भी पोडियम तक नहीं पहुंच सका.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं