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एशियन गेम्स 2026: 40 साल में पहली बार, एशियाड से खाली हाथ लौटी भारतीय टेनिस टीम

भारतीय टेनिस इस बार खाली हाथ लौटी है. 40 साल में ऐसा पहली बार हुआ है कि जब टीम एशियाड से खाली हाथ लौटी है.

एशियन गेम्स 2026: 40 साल में पहली बार, एशियाड से खाली हाथ लौटी भारतीय टेनिस टीम
एशियाड से खाली हाथ लौटी भारतीय टेनिस टीम

गुरुवार को भारतीय टेनिस के लिए एक निराशाजनक दिन रहा. 1986 के बाद पहली बार एशियाई खेलों से भारतीय टीम बिना कोई मेडल जीते खाली हाथ लौटी. पुरुष सिंगल्स में सुमित नागल के क्वार्टर फाइनल में हारने के साथ ही भारत का अभियान खत्म हो गया. बुधवार को मेडल की उम्मीद वाली डबल्स जोड़ियों के बाहर होने के बाद, भारत को अपने नंबर एक सिंगल्स खिलाड़ी नागल से उम्मीद थी कि वे देश को मेडल की दौड़ में बनाए रखेंगे. लेकिन वे चीन के यिबिंग वू से एक घंटे 38 मिनट तक चले मुकाबले में 4-6, 4-6 से हार गए.

1990 के बाद से हर एशियाई खेलों में भारत ने मेडल जीते हैं और इस बार भी कम से कम तीन मेडल की उम्मीद थी. हाल ही में सियोल में डेविस कप के क्वालीफायर राउंड 2 में दक्षिण कोरिया से मिली निराशाजनक हार के बाद, जापान में मेडल जीतने वाला प्रदर्शन टेनिस फैंस को कुछ राहत दे सकता था. प्रजनेश गुणेश्वरन और अंकिता रैना एशियाई खेलों में मेडल जीतने वाले आखिरी सिंगल्स खिलाड़ी थे. दोनों ने 2018 जकार्ता खेलों में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता था. 2023 हांग्जो खेलों में भारत सिंगल्स में कोई मेडल नहीं जीत पाया. नागल क्वार्टर फाइनल में हार गए और रामकुमार रामनाथन तीसरे राउंड में बाहर हो गए.

रोहन बोपन्ना, जो दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी बने, ने भारत को 2018 (दिविज शरण के साथ पुरुष डबल्स) और 2022 (रुतुजा भोसले के साथ) में दो गोल्ड मेडल जिताने में मदद की थी. उनके रिटायरमेंट के बाद, भारत के बेहतरीन डबल्स खिलाड़ी युकी भांबरी और एन श्रीराम बालाजी से इस परंपरा को आगे बढ़ाने की उम्मीद थी, लेकिन वे पुरुष डबल्स और मिक्स्ड डबल्स दोनों में बाहर हो गए.

बालाजी-अनिरुद्ध चंद्रशेखर और भांबरी-दक्षिनेश्वर सुरेश दोनों क्वार्टर फाइनल में हार गए. भारत की टेनिस की नई उम्मीद दक्षिनेश्वर पुरुष सिंगल्स के तीसरे राउंड में हार गए। नागल पहले ही 29 साल के हो चुके हैं और जब 2030 में दोहा में अगले एशियाई खेल होंगे, तब झज्जर के इस खिलाड़ी की उम्र 33 साल होगी. भारत को अभी से अगली पीढ़ी को तैयार करने और खिलाड़ियों की अगली कतार को पूरा सहयोग देने पर ध्यान देना होगा.

भारतीय कोच आशुतोष सिंह, जिन्होंने अपनी आंखों के सामने भारत के अभियान को बिखरते देखा, ने पीटीआई से कहा,"ज़ाहिर है, हम बेहतर नतीजों की उम्मीद कर रहे थे, खासकर टीम की क्वालिटी और अनुभव को देखते हुए." उन्होंने माना कि मुकाबले का स्तर "बहुत ऊंचा" था, लेकिन उन्हें उम्मीद थी कि सिंगल्स खिलाड़ी मौके के हिसाब से अच्छा प्रदर्शन करेंगे."

आशुतोष सिंह ने कहा,"सुमित नागल ने अपने मैचों में कड़ी टक्कर दी. पहले अपने करियर में पहली बार होंग को हराया, फिर फोमिन को मात दी. उन्होंने वही किया जिसकी ज़रूरत थी. आज भी सुमित ने कई मौके बनाए, लेकिन किसी तरह उन्हें भुना नहीं पाए." "डीके (दक्षिनेश्वर) ने टूर पर अपना खेल दिखाया है, लेकिन अगर वह खुद को टीम का अगुआ मानते हैं, तो उन्हें कई हफ़्तों तक चलने वाले मुश्किल नेशनल कैंपेन के दौरान अच्छे प्रदर्शन को बनाए रखने के लिए और मेहनत करने की ज़रूरत है."

डबल्स के बारे में बात करते हुए सिंह ने कहा कि भाम्बरी और भोसले को ताइपे की मज़बूत टीम का सामना करना पड़ा. भारतीय कोच आशुतोष सिंह ने कहा,"डबल्स कॉम्बिनेशन टीम की कुल ज़रूरतों और इवेंट से पहले के प्रदर्शन और हालात के आधार पर तय किए गए थे. दुर्भाग्य से, हम उस मौके को मेडल में नहीं बदल पाए." "युकी और रुतुजा को ग्रैंड स्लैम चैंपियन ह्सिह ने हराया, जिन्होंने अपने ऊंचे स्तर के अनुभव का पूरा इस्तेमाल किया और उनकी पार्टनर भी बहुत आक्रामक टेनिस खेल रही थीं."

सिंह ने आगे कहा,"एक टीम के तौर पर, हम नतीजों की ज़िम्मेदारी लेते हैं. बहाने बनाने का कोई फ़ायदा नहीं है. साथ ही, सही आकलन के लिए सिर्फ़ फ़ाइनल स्कोरलाइन देखने के बजाय हालात, शेड्यूल, तैयारी और विरोधी टीम की क्वालिटी पर भी ध्यान देना होगा."

एआटीए के अंतरिम सेक्रेटरी जनरल सुंदर अय्यर ने भारत के खराब प्रदर्शन पर संभलकर प्रतिक्रिया दी, लेकिन माना कि नेशनल फ़ेडरेशन को खिलाड़ियों का बेहतर तरीके से समर्थन करने की ज़रूरत है. अय्यर ने पीटीआई से कहा,"खिलाड़ियों ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की कोशिश की. हम तीन बार क्वार्टर फाइनल तक पहुंचे और मेडल जीतने के करीब थे. एक एसोसिएशन के तौर पर हमें यह देखना होगा कि हम अपने खिलाड़ियों, जूनियर और प्रोफेशनल खिलाड़ियों को और अधिक सहयोग कैसे दे सकते हैं ताकि वे बेहतर प्रदर्शन कर सकें."

कोच ने अपनी बात खत्म करते हुए कहा,"जिस तरह से खिलाड़ी एक ग्रुप के तौर पर एकजुट रहे, वह काबिले तारीफ है." उन्होंने कहा,"ऐसे मुश्किल पल, सिलेक्शन और कॉम्बिनेशन के मौके आए जिनसे स्वाभाविक रूप से दबाव बनता है, लेकिन टीम ने पूरे कैंपेन के दौरान प्रोफेशनलिज्म बनाए रखा और एक-दूसरे का साथ दिया."

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