जब भी किसी को डायबिटीज का पता चलता है, तो पहली सोच यही आती है कि अब जिंदगी पहले जैसी नहीं रहेगी. खान-पान पर पाबंदी, बार-बार सुई चुभोना और दिनभर सुस्ती. लेकिन जरा सोचिए कि अगर कोई खिलाड़ी ऐसी गंभीर बीमारी के साथ कोर्ट पर उतरे, घंटों पसीना बहाए और दुनिया के सबसे बड़े टूर्नामेंट्स में दिग्गजों को धूल चटा दे, तो इसे आप क्या कहेंगे.
हम बात कर रहे हैं जर्मनी के स्टार टेनिस खिलाड़ी अलेक्जेंडर ज्वेरेव (Alexander Zverev) की. ज़्वेरेव जब महज 4 साल के थे, तब डॉक्टरों ने कह दिया था कि उन्हें टाइप 1 डायबिटीज है. कुछ लोगों का तो यहां तक मानना था कि वे कभी हाई-लेवल एथलीट बन ही नहीं पाएंगे. लेकिन आज ज़्वेरेव ने टेनिस की दुनिया में जो मुकाम हासिल किया है, वो हर उस इंसान के लिए एक मिसाल है जो किसी न किसी बीमारी से जूझ रहा है.

अलेक्जेंडर ज्वेरेव
इस बारे में अधिक जानकारी के लिए एनडीटीवी ने आकाश हेल्थकेयर की वरिष्ठ परामर्शदाता एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. मोनिका शर्मा से बात की. डॉ. मोनिका शर्मा से जानें कि डायबिटीज क्या है-
टाइप 1 मधुमेह आखिर क्या है?
बहुत से लोग टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज में फर्क नहीं समझ पाते. इसे आसान शब्दों में समझना जरूरी है.
- टाइप 1 डायबिटीज एक ऑटोइम्यून कंडीशन है, यानी इसमें इंसान की अपनी ही रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) गलती से पैंक्रियाज की इंसुलिन बनाने वाली बीटा सेल्स को नष्ट कर देती है.
- इसका खानपान या मोटापे से सीधा कोई सम्बंध नहीं होता. यह ज्यादातर बचपन या किशोरावस्था में ही डिटेक्ट हो जाती है.
- शरीर में इंसुलिन बिल्कुल नहीं बनता, इसलिए मरीज को जिंदा रहने के लिए बाहर से इंजेक्शन या पंप के जरिए इंसुलिन लेना ही पड़ता है.
- वहीं टाइप 2 डायबिटीज आमतौर पर उम्र बढ़ने और खराब लाइफस्टाइल की वजह से होती है, जिसमें शरीर इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पाता.
For every kid who was told “you can't.” ❤️ https://t.co/N5pZamAb88
— US Open Tennis (@usopen) September 13, 2026
जब कोर्ट पर हर मिनट होती है जिंदगी की परीक्षा: प्रोफेशनल लाइफ पर असर
डॉ. मोनिका शर्मा के अनुसार टेनिस जैसे खेल में मैच कई बार 4 से 5 घंटे तक खिंच जाते हैं. ऐसे में एक आम खिलाड़ी भी पूरी तरह थक कर चूर हो जाता है. अब जरा ज़्वेरेव की स्थिति की कल्पना कीजिए.
अचानक शुगर गिरना (हाइपोग्लाइसीमिया): मैच के दौरान अगर खून में शुगर का स्तर अचानक कम हो जाए, तो आंखों के आगे अंधेरा छाने लगता है, हाथ कांपने लगते हैं और चक्कर आने लगते हैं. ज़्वेरेव को कोर्ट पर ही इसे भांपना पड़ता है.
ग्लूकोज मॉनिटरिंग की चुनौती: ज़्वेरेव हमेशा अपने बैग में इंसुलिन किट, शुगर चेक करने वाली मशीन और ग्लूकोज जेल या कार्बोहाइड्रेट ड्रिंक्स रखते हैं. कई बार मैचों के ब्रेक में उन्हें इंसुलिन का इंजेक्शन खुद लगाते हुए भी देखा गया है.
मानसिक दबाव: ज़्वेरेव ने एक इंटरव्यू में बताया था कि बचपन में उन्हें अपनी बीमारी को लेकर बहुत झिझक महसूस होती थी. वे दुनिया से यह बात छुपाते थे क्योंकि उन्हें डर था कि लोग उन्हें कमजोर समझने लगेंगे. लेकिन जब उन्होंने अपनी फाउंडेशन शुरू की और खुलकर बात की, तो यह उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गई.
खेल पर फोकस के साथ सेहत का गणित: आम खिलाड़ी केवल अपनी सर्विस और बैकहैंड की रणनीति पर ध्यान देता है, लेकिन ज़्वेरेव को हर सेट के बाद यह हिसाब लगाना होता है कि उनके शरीर की एनर्जी और शुगर लेवल किस दिशा में जा रहा है.

-Dr. Monika Sharma, Senior Consultant, Endocrinology, Aakash Healthcare
अलेक्जेंडर ज्वेरेव ने कैसे दी इस बीमारी को मात?
ज़्वेरेव ने कभी भी अपनी बीमारी को बहाना नहीं बनने दिया. उन्होंने अपनी सफलता से यह साबित किया कि अनुशासन से किसी भी परेशानी को कंट्रोल किया जा सकता है. टाइप-1 डायबिटीज के साथ प्रोफेशनल लाइफ में सबसे बड़ी चुनौती ब्लड शुगर को स्थिर रखना होती है. लंबे समय तक काम करना, मीटिंग्स, यात्रा, तनाव, अनियमित भोजन या अधिक शारीरिक गतिविधि ग्लूकोज स्तर को प्रभावित कर सकती है.
डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा कि कुछ लोगों में ग्लूकोज बहुत कम होने पर हाइपोग्लाइसीमिया हो सकता है, जबकि इंसुलिन की कमी से शुगर बहुत बढ़ सकती है. इसलिए मरीज को अपने ग्लूकोज लेवल की जानकारी रखना, समय पर भोजन करना और डॉक्टर द्वारा निर्धारित इंसुलिन लेना जरूरी होता है.
प्रोफेशनल खिलाड़ियों के लिए यह चुनौती और ज्यादा होती है. कई घंटे चलने वाली ट्रेनिंग या प्रतियोगिता के दौरान शरीर की ऊर्जा जरूरत बदलती रहती है. ऐसे में इंसुलिन, भोजन और एक्सरसाइज का संतुलन व्यक्तिगत मेडिकल प्लान के अनुसार तय किया जाता है.
कड़ा अनुशासन: वे अपने खाने का समय, सोने का रूटीन और ट्रेनिंग को एकदम सख्त तरीके से फॉलो करते हैं.
मॉडर्न टेक्नोलॉजी का सहारा: वे लगातार ग्लूकोज मॉनिटर (CGM) का इस्तेमाल करते हैं, जो उनकी त्वचा पर लगा रहता है और मोबाइल या स्मार्टवॉच पर रियल टाइम शुगर लेवल बताता रहता है.
मानसिक मजबूती: ज़्वेरेव का कहना है कि जब आप बीमारी को अपना हिस्सा मान लेते हैं, तो उससे डरना बंद कर देते हैं. यही निडरता उन्हें ग्रैंड स्लैम जैसे बड़े टूर्नामेंट्स के लंबे और थकाऊ मुकाबलों में टिके रहने की हिम्मत देती है.
हम और आप इससे क्या सीख सकते हैं?
ज़्वेरेव की यह पूरी जर्नी सिर्फ खेल प्रेमियों के लिए नहीं, बल्कि हर उस आम इंसान के लिए सबक है जो किसी पुरानी बीमारी से परेशान है.
- बीमारी कोई फुलस्टॉप नहीं है: अगर आपको डायबिटीज या कोई और क्रॉनिक समस्या है, तो यह मत सोचिए कि आपकी जिंदगी की रफ्तार थम गई है. सही इलाज और आदतों के साथ आप अपने सपनों को पूरा कर सकते हैं.
- अपनी परेशानी को स्वीकारें: जब तक आप अपनी बीमारी से भागेंगे या उसे दुनिया से छुपाने की कोशिश करेंगे, तनाव बना रहेगा. इसे खुलकर स्वीकारें ताकि समय रहते सही कदम उठा सकें.
- टेक्नोलॉजी और रेगुलर जांच में कोताही न बरतें: अपने डॉक्टर के संपर्क में रहें और समय पर जांच करवाएं. आज बाजार में ऐसे कई आसान टूल्स हैं जिनसे घर बैठे सेहत पर नजर रखी जा सकती है.
- मानसिक तनाव को खुद पर हावी न होने दें: ज़्वेरेव ने दिखाया कि खेल हो या जिंदगी, सबसे बड़ा मुकाबला शरीर का नहीं बल्कि दिमाग का होता है. अगर मन में हार न मानने का जज्बा हो, तो कोई भी शारीरिक कमी आपको आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती.
अलेक्जेंडर ज्वेरेव की कहानी इस बात का पुख्ता सबूत है कि हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, सही रणनीति और मजबूत हौसले के दम पर हर मैदान जीता जा सकता है.
नोट: टाइप 1 डायबिटीज एक गंभीर मेडिकल कंडीशन है. किसी भी उपचार, इंसुलिन डोज या स्वास्थ्य प्रबंधन के लिए डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है. अलेक्जेंडर ज्वेरेव की दिनचर्या व्यक्तिगत स्वास्थ्य जरूरतों पर आधारित है.
(इस विषय पर विस्तृत जानकारी के लिए एनडीटीवी ने आकाश हेल्थकेयर में वरिष्ठ परामर्शदाता (एंडोक्राइनोलॉजी) डॉ. मोनिका शर्मा से बातचीत की)
FAQs
अलेक्जेंडर ज्वेरेव को कौन सी डायबिटीज है?
अलेक्जेंडर ज्वेरेव को टाइप 1 डायबिटीज है, जिसका पता उन्हें बचपन में चला था.
टाइप 1 डायबिटीज क्या होती है?
यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर इंसुलिन बनाना लगभग बंद कर देता है और मरीज को इंसुलिन लेना पड़ता है.
क्या टाइप 1 डायबिटीज के मरीज खेल-कूद कर सकते हैं?
डॉक्टर की सलाह, नियमित मॉनिटरिंग और सही मैनेजमेंट के साथ टाइप 1 डायबिटीज वाले लोग खेल-कूद और प्रोफेशनल स्पोर्ट्स में हिस्सा ले सकते हैं.
ज़्वेरेव ब्लड शुगर को कैसे मैनेज करते हैं?
वे इंसुलिन थेरेपी, लगातार ग्लूकोज मॉनिटरिंग (CGM), संतुलित आहार और नियमित ट्रेनिंग का सहारा लेते हैं.
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