- इंडिया अलायन्स की दिल्ली में हुई बैठक में अखिलेश यादव व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हुए.
- सपा ने सीट शेयरिंग को लेकर कांग्रेस के साथ मतभेद जताए हैं और विजयी प्रत्याशियों की सूची मांगने की बात कही है.
- कांग्रेस ने गठबंधन में सम्मानजनक हिस्सेदारी की मांग करते हुए आधी सीटों पर दावा किया है. समझें पूरी कहानी.
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बनाए गए विपक्ष के माहौल को आगे बढ़ाने की कोशिश में कल दिल्ली में इंडिया अलायन्स के नेताओं की बैठक हुई. गठबंधन में शामिल हर दल के बड़े नेता या व्यक्तिगत तौर पर बैठक में मौजूद रहे या ऑनलाइन जुड़े. इसमें सिर्फ समाजवादी पार्टी ऐसी थी, जिसने अपने दो सांसदों को भेजकर ये जाता दिया कि वो इस मुहिम में गठबंधन के साथ हैं लेकिन उनके सभी बड़े नेता बैठक से दूर रहे. इस दूरी के आखिर क्या मायने हैं? ये सवाल इसलिए क्योंकि इंडिया अलायन्स के दो सबसे बड़े दलों के कांग्रेस और सपा हैं. दोनों का यूपी में गठबंधन है. दोनों के बीच बीते कुछ दिनों से सीट शेयरिंग को लेकर खटपट चल रही है. दोनों तरफ से बयानबाजी जारी है. ऐसे में सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव का खुद बैठक के ना जाने की वजह महज व्यस्तता है या अखिलेश प्रेशर पॉलिटिक्स का हथकंडा अपना रहे हैं.
बैठक का दिन तय होते सपा ने बताया था अखिलेश बिजी
दरअसल, जिस दिन कांग्रेस ने ये ऐलान किया कि 30 सितंबर को दिल्ली में इंडिया अलायन्स की बैठक होगी, उसी दिन सपा की तरफ़ से कह दिया गया कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव उस दिन व्यस्त हैं. अखिलेश यादव की जगह उनके चाचा और सांसद प्रो रामगोपाल यादव बैठक में हिस्सा लेंगे.
बैठक से ऐन पहले प्रो रामगोपाल यादव दिल्ली पहुंच गए और तय हुआ कि 30 सितंबर को सपा के राज्यसभा के दो प्रत्याशी नामांकन करेंगे और इंडिया अलायन्स की बैठक में सांसद हरेंद्र मलिक और मोहिबुल्ला नदवी हिस्सा लेंगे.

राज्यसभा उम्मीदवारों के नामांकन में अखिलेश यादव.
अखिलेश का बैठक से दूर रहना इतना सामान्य नहीं
दिखने में तो ये एक सामान्य सी बात लगती है कि अखिलेश यादव व्यस्त थे इसलिए बैठक में ना जा सके. हालांकि ये इतना सामान्य है नहीं. इसकी वजह ये है कि 30 सितंबर की अखिलेश यादव की दिनचर्या देखी जाये तो सुबह 11 बजे अखिलेश यादव अपने दोनों राज्यसभा प्रत्याशियों का नामांकन कराने पहुंचे और उसके बार किसानों की एक बैठक की. उसके बाद दोपहर 2 बजे से प्रेस कॉन्फ्रेंस करने लगे. पीसी ख़त्म होते होते तीन बज गए और वो सपा दफ्तर से निकालकर घर चले गए.
अखिलेश चाहते तो बैठक में जा सकते थे
यानी इंडिया अलायन्स की बैठक में वो जाना चाहते तो जा सकते थे लेकिन नहीं गए. चाहते तो नामांकन 1-6 अक्टूबर के बीच कभी भी करा सकते थे. चूंकि इंडिया अलायन्स की बैठक की तारीख हफ्ते भर पहले तय हुई थी, इसलिए किसानों की बैठक भी किसी और दिन की जा सकती थी. रही बात पीसी की तो वो अक्सर होती ही रहती है. कुल मिलाकर ऐसी कोई व्यस्तता नहीं थी कि अखिलेश यादव ख़ुद, या उनके चाचा प्रो रामगोपाल यादव या शिवपाल यादव या डिंपल यादव या धर्मेंद्र यादव बैठक में ना जा सकें.
चर्चा हुई तो अखिलेश बोले- जीत ही सीट का आधार
सियासी गलियारों में अखिलेश यादव की इंडिया अलायन्स की बैठक में ना जाने को लेकर खूब चर्चा है. कल जब अखिलेश यादव पीसी कर रहे थे, तब उनसे इंडिया अलायन्स को लेकर सवाल किए जाने पर जवाब आया - “जीत ही सीट का आधार है”. बीते कई दिनों से इस बात की लेकर सपा और कांग्रेस नेताओं के बीच बयानबाज़ी चल रही है कि सीट शेयरिंग का आधार क्या होगा. कांग्रेस को गठबंधन में कितनी सीटें मिलेंगी. कांग्रेस आधी सीटों पर हिस्सेदारी का दावा कर रही है.

कांग्रेस खेमे से भी हो रही बयानबाजी
कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम बार बार सम्मानजनक हिस्सेदारी की बात कह रहे हैं. उन्होंने बराबरी का हिस्सा मांगते हुए कांग्रेस को बड़ा भाई तक कह दिया. इमरान मसूद ने तो अकेले लगने तक की बात एक नहीं कई बार कही है. सपा की तरफ़ से भी पलटवार हुआ है. इकरा हसन से लेकर उदयवीर सिंह और पार्टी के कई नेता कांग्रेस को उसकी ज़मीनी सच्चाई बताते हुए ये कह रहे हैं कि पहले वो जीत की गारंटी दें, तब सपा सीट देने की बात करेगी.
150-200 सीटें चाहिए तो प्रत्याशियों की लिस्ट दीजिएः सपा सूत्र
सूत्र बताते हैं कि सपा ने कांग्रेस से कहा है कि अगर उन्हें डेढ़ सौ या दो सौ सीटें चाहिए तो उन्हें उन प्रत्याशियों की सूची सपा को देनी होगी, जिसमें जिताऊ प्रत्याशी का नाम शामिल हो. अगर कांग्रेस जिताऊ प्रत्याशियों की सूची दे देगी तो सपा उस पर विचार करेगी. कांग्रेस के सूत्रों का दावा है कि सपा को सूची मांगने का हक़ नहीं है. वो सीट दें, कांग्रेस तय करेगी कि चुनाव कौन लड़ेगा. सपा और कांग्रेस के बीच इसी को लेकर मतभेद और मनभेद चल रहा है.
राजभर ने भी पोस्ट कर उठाए सवाल
सपा प्रमुख अखिलेश यादव का दिल्ली जाकर या ऑनलाइन जुड़कर इंडिया अलायन्स की बैठक में हिस्सा लेने की जगह लखनऊ के रहने इसीलिए चर्चा का मुद्दा बन गया है. यूपी के मंत्री ओम प्रकाश राजभर भी सिलसिलेवार पोस्ट में अखिलेश की इंडिया अलायन्स की बैठक से दूरी पर सवाल उठा रहे हैं.
ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि आख़िर अखिलेश यादव के मन में क्या है? आखिर क्यों उन्होंने अपने बड़े नेताओं को बैठक में जाने से रोक दिया और ना ख़ुद गए. सवाल ये भी है कि क्या इंडिया अलायन्स में सपा-कांग्रेस एक साथ मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ेगी या चुनाव से ऐन पहले ये गठबंधन टूट जाएगा.
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