हरियाणा की बेटियां अखाड़े में उतरकर अपनी मेहनत और दमखम से नई पहचान बना रही हैं. ऐसी ही एक बेटी हैं हांसी के राजथल गांव की खुशी, जिन्होंने 19वीं नेशनल ग्रेपलिंग रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर अपने गांव और प्रदेश का नाम रोशन किया. खुशी की इस कामयाबी के बाद उनके स्वागत का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है.
वीडियो में उनके माता-पिता झूमते और डांस करते नजर आए, जबकि पीछे कुछ गाड़ियां दिखाई दे रही थीं. इसके बाद चर्चा शुरू हो गई कि गांव में खुशी का स्वागत करने कोई नहीं पहुंचा और सिर्फ मां-बाप ही बेटी की जीत का जश्न मना रहे हैं. हालांकि, अब इस वायरल वीडियो की पूरी कहानी सामने आई है. खुशी और उनके पिता सुनील ने खुद बताया है कि गांव में उनका किस तरह स्वागत हुआ था.
अंडर-17 के 52 किलो भार वर्ग में जीता गोल्ड
हरियाणा के राजथल गांव की रहने वाली खुशी ने 19वीं नेशनल ग्रेपलिंग रेसलिंग चैंपियनशिप के अंडर-17 के 52 किलोग्राम भार वर्ग में गोल्ड मेडल अपने नाम किया. यह प्रतियोगिता हरिद्वार में 23 से 26 तारीख तक आयोजित हुई थी. खुशी फिलहाल दसवीं कक्षा में पढ़ती हैं और दिल्ली में रहकर कुश्ती की तैयारी कर रही हैं. वह कश्मीरी गेट के पास चंद्रा अखाड़े में प्रैक्टिस करती हैं, उन्हें तैयारी करते हुए कुल 6 साल हो चुके हैं. खुशी का लक्ष्य है कि वह ओलपिंक में गोल्ड मेडल लेकर आएं.
खुशी के कुश्ती में आने की कहानी भी दिलचस्प है. उन्होंने बताया कि करीब 12-13 साल की उम्र में फिल्म 'दंगल' देखने के बाद उनके मन में पहलवान बनने का सपना आया. उन्होंने अपने पिता से कुश्ती खेलने की इच्छा जताई. इसके बाद पिता ने उन्हें हॉस्टल भेज दिया, जहां से उनके कुश्ती के सफर की शुरुआत हुई. खुशी को फिल्म में गीता फोगाट का खेल काफी पसंद आया था. वह पिछले छह साल से कुश्ती कर रही हैं और अब राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं.
वायरल वीडियो में सिर्फ मां-बाप क्यों दिखे?
खुशी की जीत के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो को लेकर सवाल उठे कि जब बेटी ने राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीता तो गांव के लोग उसका स्वागत करने क्यों नहीं पहुंचे? वीडियो में खुशी के माता-पिता गाड़ी के आगे डांस करते दिखाई दे रहे थे. इसी दृश्य को देखकर यह चर्चा होने लगी कि बेटी की उपलब्धि पर सिर्फ माता-पिता ही जश्न मना रहे हैं.
इस तरह की चर्चा के बाद NewsMike24 को दिए इंटरव्यू में खुशी ने इस पूरे मामले की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि गांव के लोगों ने उनका स्वागत किया था. गांव के सरपंच और अन्य प्रमुख लोग भी मौजूद थे. उनका फूल-मालाओं से स्वागत किया गया और सम्मानित भी किया गया.
खुशी ने बताया कि गांव के लोग एक निश्चित जगह तक उनके साथ आए थे. इसके बाद मंदिर की ओर जाते समय सभी लोग साथ नहीं थे. जिस समय वीडियो बनाया गया, उस वक्त गाड़ी के पास सिर्फ उनके माता-पिता मौजूद थे. परिवार के दूसरे सदस्य और रिश्तेदार आगे थे. ऐसे में वीडियो में स्वागत का पूरा दृश्य सामने नहीं आया. खुशी ने साफ कहा कि ऐसा बिल्कुल नहीं है कि गांव के लोगों ने उनका स्वागत नहीं किया. गांव वालों ने उन्हें पूरा सम्मान दिया और उनका हौसला बढ़ाया.
पिता सुनील ने भी बताई वायरल वीडियो की सच्चाई
खुशी के पिता सुनील ने भी कहा कि गांव के लोगों ने उनकी बेटी की उपलब्धि पर पूरा सम्मान दिया. सरपंच और गांव के प्रमुख लोग मौजूद थे. बेटी का स्वागत किया गया और उसे फूल-मालाएं पहनाकर सम्मानित किया गया. सुनील ने वायरल वीडियो को लेकर नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्हें नहीं पता कि यह वीडियो किसने अपलोड किया, लेकिन इससे गांव की छवि खराब हो रही है। उन्होंने वीडियो अपलोड करने वाले लोगों से इसे हटाने की अपील की. सुनील ने कहा कि गांव ने उनकी बेटी को जो सम्मान दिया, उसके लिए वह सभी के आभारी हैं.
गांव में नशे के खिलाफ चल रही मुहिम का भी किया जिक्र
इस बातचीत में राजथल गांव में चल रही नशे के खिलाफ मुहिम का मुद्दा भी सामने आया. खुशी ने बताया कि गांव के लोग पिछले करीब दो महीने से इस मुद्दे पर शांतिपूर्ण तरीके से धरने पर बैठे हैं. उनका मकसद गांव के बच्चों को नशे से दूर रखना और आने वाली पीढ़ी को बेहतर माहौल देना है. खुशी के पिता सुनील ने भी गांव में नशे के कारोबार पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि कुछ लोगों की ऐसी गतिविधियों से गांव की छवि खराब होती है. उनका कहना है कि आने वाली पीढ़ी पर इसका बुरा असर पड़ रहा है. खुशी ने भी कहा कि गांव का माहौल ऐसा होना चाहिए, जहां बेटियां और बेटे खेलों में आगे बढ़ें और अपने परिवार व गांव का नाम रोशन करें.
एशियन चैंपियनशिप और ओलंपिक में गोल्ड जीतना है सपना
राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीतने के बाद खुशी की नजरें अब अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं पर हैं. उनका अगला लक्ष्य एशियन चैंपियनशिप में देश के लिए पदक जीतना है. इसके साथ ही वह भविष्य में ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने का सपना देख रही हैं. खुशी ने गांव की बेटियों को भी खेलों में आगे आने का संदेश दिया. वहीं, उनके पिता सुनील की इच्छा है कि सिर्फ उनकी बेटी ही नहीं, बल्कि गांव और हरियाणा की दूसरी बेटियां भी खेलों में आगे बढ़ें और देश के लिए पदक जीतें.
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