F4 Indian Championship: 13 सालों में पहली बार भारत के ग्रेटर नोएडा स्थित बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट में FIA-सर्टिफाइड चैंपियनशिप की वापसी हुई है. शनिवार को 'इंडियन रेसिंग फेस्टिवल' का हिस्सा रही 'F4 इंडियन चैंपियनशिप' उसी ट्रैक पर आयोजित हुई, जहां 2013 में अपना चौथा वर्ल्ड टाइटल जीतने के बाद सेबेस्टियन वेटेल ने अपनी मशहूर 'डोनट्स' (गाड़ी को गोल-गोल घुमाना) वाली करतब दिखाई थी. अगर आप अपनी आंखें बंद करके इंजनों की गड़गड़ाहट सुनें, तो आपको ऐसा लगेगा जैसे यह कोई फॉर्मूला 1 रेस हो. और यह भारत में मोटरस्पोर्ट्स के भविष्य के लिए एक बहुत अच्छा संकेत है.
'इंडियन रेसिंग फेस्टिवल' - जिसमें F4 इंडियन चैंपियनशिप और इंडियन रेसिंग लीग शामिल हैं - का अभी चौथा सीजन चल रहा है. हालांकि, 2026 में पहली बार ऐसा हुआ है कि यह इवेंट देश के मशहूर F1 ट्रैक पर पहुंचा है. उम्मीद है कि यह इस ट्रैक के भारतीय रेसिंग में एक नियमित हिस्सा बनने की शुरुआत भर है. इस इवेंट के आयोजन का जिम्मा संभालने वाली कंपनी RPPL के चेयरमैन, अखिलेश रेड्डी ने कहा, 'हमें पूरी उम्मीद है कि आने वाले कुछ सालों तक BIC, इंडियन रेसिंग फेस्टिवल का हिस्सा बना रहेगा.'
उन्होंने कहा कि, 'अगर वे ट्रैक को अपग्रेड करके इसे (FIA) ग्रेड 1 सर्किट बना देते हैं, तो यह हमारे लिए और भी बेहतर होगा. भले ही यहां फॉर्मूला 1 रेस न हो, फिर भी ट्रैक इतनी अच्छी स्थिति में रहेगा कि ड्राइवर यहां गाड़ी चलाने में खुशी महसूस करेंगे.' रेड्डी ने मजाकिया अंदाज में कहा, 'अगर आप गली में क्रिकेट खेल रहे हों और अचानक आपको एक स्टेडियम मिल जाए, तो क्या आप वहां खेलने या मैच देखने में खुश नहीं होंगे? यहां भी बिल्कुल वैसा ही मामला है.'
रेड्डी ने बताया कि बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट पहले से ही बहुत अच्छी स्थिति में है और उन्होंने इसके मैनेजमेंट की तारीफ की. 'चूंकि अब मैनेजमेंट बदल गया है, वे बहुत शानदार काम कर रहे हैं. मैनेजमेंट ट्रैक को अच्छी तरह से मेंटेन कर रहा है. फॉर्मूला 4 रेस के लिए भी हमें कोई बड़े बदलाव नहीं करने पड़े, क्योंकि इससे पहले यहां मोटोजीपी (MotoGP) का आयोजन हो चुका था. ट्रैक काफी अच्छी स्थिति में है.' 'नए मैनेजमेंट से हमें जो रिस्पॉन्स और सपोर्ट मिला है, वह शानदार रहा है.'
भारत में मोटरस्पोर्ट्स का कल्चर
इस सवाल के जवाब में कि इंडियन रेसिंग लीग का असली मकसद क्या है? अखिलेश रेड्डी ने बताया कि लीग का फोकस पूरे देश में एक मोटरस्पोर्ट्स इकोसिस्टम तैयार करने पर है. इसमें न केवल ड्राइविंग टैलेंट को निखारा जाएगा, बल्कि इंजीनियरों और मैकेनिक्स को भी ट्रेनिंग दी जाएगी.
रेड्डी ने कहा, 'हमारा मुख्य लक्ष्य दुनिया के लिए एक बेहतरीन प्रोडक्ट तैयार करना है. हम इंजीनियरों को फ्री इंटर्नशिप दे रहे हैं ताकि उन्हें प्रैक्टिकल अनुभव मिल सके. हम मैकेनिक्स को भी स्टाइपेंड और नए मौके दे रहे हैं. हमारा ध्यान सिर्फ मैकेनिक्स पर ही नहीं, बल्कि मोटरस्पोर्ट्स से जुड़े हर पहलू पर है.'
उन्होंने बताया कि 'इंडियन F4' ड्राइवरों के लिए एक बहुत अच्छा विकल्प हो सकता है, क्योंकि इसमें चैंपियनशिप में हिस्सा लेने का खर्च यूरोपीय सर्किट के मुकाबले काफी कम है. उन्होंने कहा, 'हम ड्राइवरों को कम और किफायती कीमत पर चैंपियनशिप में हिस्सा लेने का मौका दे रहे हैं. यूरोप में इसके लिए बहुत ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ते हैं. कई ड्राइवरों में टैलेंट तो होता है, लेकिन वे इसका खर्च नहीं उठा पाते. हम इस रुकावट को दूर करके सभी को बराबरी का मौका देना चाहते हैं.'
भारत से अगला F1 ड्राइवर कैसे तैयार होगा?
भारत से अगला नारायण कार्तिकेयन या करुण चंडोक कैसे निकलेगा - कोई ऐसा व्यक्ति जो फॉर्मूला 1 में तिरंगे का मान बढ़ा सके? रेड्डी का मानना है कि टैलेंट की कमी नहीं है, बस और ज्यादा सपोर्ट की जरूरत है.
उन्होंने कहा कि, 'जब तक RPPL ने इसमें कदम नहीं रखा था, तब तक मोटरस्पोर्ट्स में कोई कमर्शियल एंगल नहीं था. लेकिन हमें काफी सपोर्ट की जरूरत है. फॉर्मूला 1 में भारतीय ड्राइवर कम क्यों हैं? सबसे पहले तो यह गलतफहमी दूर होनी चाहिए कि F1 बहुत महंगा है. आज के समय में तो हर खेल महंगा है, यहां तक कि क्रिकेट भी. अगर आप किसी नामी क्रिकेट एकेडमी में जाना चाहते हैं, तो आपको हर महीने 1.5 से 2 लाख रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं. ठीक इसी तरह, अगर आप मोटरस्पोर्ट्स में आना चाहते हैं, तो कार्टिंग (karting) में भी लगभग इतना ही या उससे थोड़ा कम खर्च आता है.'
'दूसरी बात, हमें सरकार से काफी समर्थन की जरूरत है. यहीं पर हम बहुत पीछे रह गए हैं. अन्य खेलों को सरकार से जितना समर्थन मिलता है, उसका मुश्किल से एक या दो प्रतिशत ही मोटरस्पोर्ट्स को मिल पाता है. मुझे लगता है कि अब समय आ गया है, क्योंकि बहुत सारे बच्चे मोटरस्पोर्ट्स की ओर आ रहे हैं. 'बहुत कम 'सीट टाइम' (गाड़ी चलाने का अनुभव) मिलने के बावजूद, भारतीय प्रतिभाएं उन यूरोपीय ड्राइवरों को हराने में सक्षम हैं, जिन्हें काफी ज्यादा 'सीट टाइम' मिला होता है. उन्होंने कहा, 'भारत में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है. कमी सिर्फ समर्थन की है.'
खेल मंत्रालय द्वारा भारत में F1 की वापसी की संभावनाओं का आकलन करने के लिए एक टास्क फोर्स बनाने और देश के सबसे तेज ट्रैक पर फॉर्मूला 4 के फिर से रफ्तार पकड़ने के साथ, रेसिंग को लेकर उत्साह पहले से कहीं ज्यादा है."
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