भारतीय स्प्रिंटर अनिमेष कुजूर और गुरिंदरवीर सिंह गुरुवार को अपने शुरुआती राउंड की हीट में क्रमशः तीसरे और दूसरे स्थान पर रहने के बाद पुरुषों की 100 मीटर दौड़ के सेमीफाइनल में पहुंच गए. कुजूर ने अपनी हीट में 10.36 सेकंड का समय लेकर तीसरा स्थान हासिल किया और सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की की. शुक्रवार को इन दोनों के सेमीफाइनल इवेंट होंगे और उसके बाद फाइनल राउंड होगा. थाईलैंड के पुरीपोल बूनसन ने 9.95 सेकंड में हीट जीती, जबकि चीन के ज़ेंग केली 10.22 सेकंड के साथ दूसरे स्थान पर रहे. कुजूर का रिएक्शन टाइम 0.140 सेकंड रहा और वे अगले राउंड में जाने के लिए क्वालिफिकेशन की जगह बनाए रखने में सफल रहे.
गुरिंदरवीर ने हीट 4 में 10.38 सेकंड का समय लेकर दूसरा स्थान हासिल किया. ओमान के मलहम अल बलुशी ने 10.29 सेकंड में हीट जीती, जबकि ईरान के हसन ताफ़्टियन 10.46 सेकंड के साथ तीसरे स्थान पर रहे. गुरिंदरवीर का रिएक्शन टाइम 0.142 सेकंड रहा और वे हीट जीतने वाले खिलाड़ी से 0.09 सेकंड पीछे रहे. दूसरे स्थान पर रहने से उनका सेमीफाइनल के लिए क्वालिफिकेशन पक्का हो गया, जिससे पुरुषों की 100 मीटर स्पर्धा में भारत के दो प्रतिनिधि हो गए.
75 सालों में आए हैं सिर्फ तीन पदक
एशियन गेम्स के इतिहास में भारत 100 मीटर की रेस में सिर्फ 3 पदक जीत पाया है.1951 में लवी पिंटो के स्वर्ण के बाद 1954 में मैरिएन ग्रैबिएल ने ब्रॉन्ज जीता था, लेकिन इसके बाद भारत को लंबा इंतजार करना पड़ा. 1978 में रामास्वाणी ज्ञानशेखरन ने इसके बाद सिल्वर जीता. उसके बाद से भारत 100 मीटर में पदकों का सूखा जारी है. 1982 से 2023 हांगझोउ तक भारतीय पुरुष धावक 100 मीटर में पदक जीतने में सफल नहीं रहे.
हालांकि हाल के सालों में अमलान बोर्गोहेन जैसे धावकों ने फाइनल तक पहुंचकर उम्मीद जगाई, लेकिन एशियाई स्प्रिंटिंग के सबसे बड़े मंच पर भारत अब भी अगली बड़ी सफलता का इंतजार कर रहा है. अमलान बोर्गोहेन ने 2018 जकार्ता एशियन गेम्स में फाइनल राउंड में जगह बनाई थी. उन्होंने फाइनल में 10.24 सेकेंड का समय निकाला और चौथे स्थान पर रहे.
क्या इतिहास रच पाएंगे गुरिंदरवीर सिंह- अनिमेष कुजूर
गुरिंदरवीर सिंह भारत के सबसे तेज एथलीट है. उनका पर्सनल बेस्ट 10.09 सेकेंड है. यह नेशनल रिकॉर्ड भी है. वह 10.10 सेकेंड के अंदर 100 मीटर की दौड़ पूरी करने वाले पहले भारतीय है. जबकि अनिमेष कुजुर का बेस्ट प्रदर्शन 10.14 सेकेंड का है. जुलाई 2026 में उन्होंने यह समय निकाला था. बीते दो सालों में भारतीय एथलीटों ने कई बार अपने प्रदर्शन में सुधार किया है. ऐसे में इनसे मेडल की उम्मीद जगी है. ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह दोनों सालों से चले आ रहे 100 मीटर रेस में पदक के सूखे को खत्म कर पाते हैं या नहीं.
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